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छात्रों ने रंग महल किला में बिखेरे रंग

नगर के शासकीय एक्सीलेंस इंग्लिश मीडियम मिडिल नावघाट स्कूल के छात्रों ने बुधवार को नगर की ऐतिहासिक धरोहर रंगमहल...

Danik Bhaskar | Feb 01, 2018, 01:55 PM IST
नगर के शासकीय एक्सीलेंस इंग्लिश मीडियम मिडिल नावघाट स्कूल के छात्रों ने बुधवार को नगर की ऐतिहासिक धरोहर रंगमहल किला का भ्रमण किया। भ्रमण कार्यक्रम में स्कूल के छात्र सुबह स्कूल में एकत्रित हुए उसके बाद पैदल मार्च करते हुए रंग महल किला पहंुचे। जहां उन्होंने किला का भ्रमण करते हुए किला के इतिहास को लेकर प्रश्नों की झड़ी लगा दी।

छात्रों का मार्ग दर्शन कर रहे डाइट व्याख्याता मनोज जैन ने छात्रों को किला की बरीकियां बताते हुए कहा कि यह किला एक रंगमहल है, जहां प्राचीनकाल में राजा महाराजाओं के रंग मंचीय कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। किला के मध्य में एक मंच है जहां कार्यक्रम आयोजित होते थे और उस समय पर्दा प्रथा होने के कारण महिलाओं को बैठने के लिए अलग गैलरी होती थी। महिला पारदर्शी पर्दा के पीछे से ही रंगमचीय कार्यक्रम को देखती थी। किला के अंदर पानी की व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, गुप्तद्वार आदि के बारे में जानकारी दी गई।

प्रधानाध्यापक रामस्वरूप चौरसिया ने प्राचीन समय में किस तरह किला का निर्माण होता था। कैसे रंगो का उपयोग होता था उनकी विशेषताओं के बारे में बताया। शिक्षिका संध्या जैन, निवेदिता दुआ, रजनी जैन ने छात्रों के द्वारा पूछे गये प्रश्नों का उत्तर दिया। रश्मि पांडे, रूपांजली नेमा ने छात्रों को बताया कि लोग बताते है कि इस किला में ऐसे गुप्त मार्ग भी है जो यहां से 100 किमी दूर पन्ना में जाकर निकलते हैं। इसके साथ कई गुप्त मार्ग एवं कमरा ऐसे भी है जहां लोगों को जाने के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह भी कहा जाता है कि इस रंगमहल के चारों ओर पानी भरा रहता था। जिसके भी प्रमाण देखने को मिलते हैं। स्कूल स्टाफ ने सभी छात्रों को किला की मजबूती के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि 12 साल पहले सनू 2005 में सुनार नदी में आई प्रलयकारी बाढ में पानी का बहाव किला की दीवार्रल से टकरा कर रास्ता बदल लेता था लेकिन किला की दीवारों को कोई क्षति नहीं हुई।

भ्रमण

प्राचीन कला को नजदीक से देखा, नावघाट स्कूल के छात्रों का किला भ्रमण कार्यक्रम

सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किए

छात्रों ने किला के इतिहास को जानकार किला के मध्य स्थित रंगमच पर देशभक्ति एवं धार्मिक गीतों पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किए। छात्र दीपेश पटेल, मयंक श्रीवास्तव, पूर्वी अग्रवाल, पूर्णिमा शुक्ला, निर्मल पटेल, अंकिता तिवारी, नैनसी साहू, माही आसाटी, शिवानी पटेल, गौरीशा सिंह ने अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा कि नगर में ऐसी ऐतिहासिक धरोहर है लेकिन लोगों को इस स्थल देखने का समय नहीं मिलता, लोग अपने मुख्य दिवस यहां मनाए, सोशल मीडिया पर डाले ताकि अधिक से अधिक लोग इसके बारे में जान सकें।