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प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो रहे परंपरागत जलस्त्रोत

बुंदेलखंड की उपकाशी हटा नगरी को गंगा रूपी सुनार नदी का सौभाग्य प्राप्त है। इसके साथ ही नगर को एक नहीं अनेक जल...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 08, 2018, 03:10 AM IST

प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो रहे परंपरागत जलस्त्रोत
बुंदेलखंड की उपकाशी हटा नगरी को गंगा रूपी सुनार नदी का सौभाग्य प्राप्त है। इसके साथ ही नगर को एक नहीं अनेक जल स्त्रोत का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ है, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण सारे परंपरागत जलस्त्रोत दिनों दिन विलुप्त होते जा रहे हैं।

यदा कदा जब कभी नगर में जल संकट उभरता है तो नगर के गणमान्य नागरिकों द्वारा जोर-शोर से चर्चा तो की जाती है लेकिन उसे अंतिम रूप देने के लिए कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। नगर का नदी के बाद दूसरा सबसे बड़ा जल स्त्रोत गौरीशंकर की तलैया माना जाता है। आज से करीब तीन दशक पहले इस तालाब में अनेक धार्मिक अनुष्ठान होते थे, रक्षा बंधन की कजलियां यही विसर्जित होती थीं। मेला भी लगता था। इसके अलावा घरों में आयोजित होने वाले शुभ कार्यो में मेहर का पानी भी यहां से जाता था। रामगोपालजी वार्ड, संजय वार्ड, चंडीजी वार्ड एवं गौरीशंकर वार्ड के लिए यहां नहाते थे और कपड़े आदि भी धोते थे। तालाब के चारों को घाट भी बने हुए थे। वार्ड निवासी श्रीराम कुड़ेरिया, मोनू पांडे, देवशंकर, ममतारानी, मुरारी अहिरवार ने बताया कि जब इस तालाब में पानी रहता था तो आस पास करीब तीन तीन सौ मीटर की दूरी पर जो कुआं, बावड़ी, बोर आदि थे उसमें भी पानी रहता था। लेकिन जब से यह तलैया उपेक्षा का शिकार हुई है, तभी से तालाब सहित आसपास का भी जलस्तर घट गया है।

स्थानीय निवासी बद्री प्रसाद, वीरेंद्र कुमार, सुधारानी ने बताया कि यह तालाब वैसे तो देवश्री रामगोपाल जी मंदिर की संपति में से हैं। मंदिर कमेटी के द्वारा इसके जल के उपयोग करने कभी किसी को रोका नहीं गया। सभी लोग इसके पानी का उपयोग करते हैं। वर्तमान में इस तालाब की मेड़ों पर अतिक्रमण की बाढ आ गई है। जहां से बरसात का पानी आता है वहां मिट्‌टी डाल दी गई है। लोग घरों की गंदगी भी इसी तालाब में डाल रहे हैं। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो यह तालाब अपनी पहचान खोकर पूरी तरह अतिक्रमण या अवैध निर्माण का शिकार हो जाएगी।

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गौरीशंकर मंदिर के पास की तलैया देखरेख के अभाव में विलुप्त होती जा रही है।

तैयार कराई जाएगी कार्ययोजना

बीते वर्ष भी इस तालाब के जीर्णोद्धार का प्रयास किया गया था। अब पुनः इसके लिए नए सिरे से कार्य योजना तैयार करेंगे। अतिक्रमण हटाने के लिए तहसीलदार एवं एसडीएम से चर्चा की जाएगी । तालाब के चारों ओर वृक्षारोपण भी कराया जा सकता है। - प्रियंका झारिया, सीएमओ

तलैया के पास तीन

स्कूल संचालित

नगर के राहुल अहिरवार, मुरलीधर, हरप्रसाद ने बताया कि तालाब में अब केवल गंदा पानी रहता है, जिसमें फायलेरिया और मलेरिया जैसे मच्छर पनप रहे हैं। तालाब से ही सटकर तीन बड़े निजी स्कूल एवं एक सरकारी स्कूल हैं, जिसमें सैकड़ों की संख्या में छात्र पड़ते हैं। आने वाले कल में यहां से संक्रामक बीमारी फैलने का अंदेशा बना रहेगा। अरविंद, शुभम, दिनेश, राजेश अहिरवार ने बताया कि तालाब का गहरीकरण एवं जीर्णोद्धार की पहल प्रशासन द्वारा सकारात्मक रूप से प्रारंभ की जाना चाहिए। जन सहयोग भी लिया जाए तो इस तालाब को नया जीवन मिल सकता है।

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Web Title: प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो रहे परंपरागत जलस्त्रोत
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