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सत्संग सुनते- सुनते रूक्मणि को कृष्ण के प्रति प्रेम जागा: शास्त्री

मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम सोजना स्थित पालर माता धाम में आध्यात्मिक श्रीमद भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। जिसमें...

Dainik Bhaskar

Apr 08, 2018, 04:30 AM IST
सत्संग सुनते- सुनते रूक्मणि को कृष्ण के प्रति प्रेम जागा: शास्त्री
मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम सोजना स्थित पालर माता धाम में आध्यात्मिक श्रीमद भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। जिसमें कथा वाचक पं. रवि शास्त्री ने भागवत कथा के छटवें दिन रूक्मणि विवाह का प्रसंग सुनाया।

कथा व्यास ने कहा कि शुकदेव जी महाराज कहते हैं परीक्षित महाराज भीष्मक विदर्भ देश के अधिपति थे उनके 5 पुत्र और एक सुंदरी कन्या थी सबसे बड़े पुत्र का नाम था रुकमी और चार छोटे थे जिनके नाम थे क्रमश: रुकमर्थ, रुकम्बाहू रुक्मकेश और रुकम्माली इनकी बहन थी सती रुकमणि। रुकमणि भगवान की कथा और लीला को सुनते सुनते ही बड़ी हुई थी। यह अपने पिता के साथ जाकर सत्संग में बैठ जाती थी और भगवान की लीलाओं का आनंद लेती थी तभी से इनके मन में कृष्ण के प्रति प्रेम जागृत हो गया और उन्होंने कृष्ण जी को मन में अपना पति स्वीकार कर लिया।

अतः भगवान भी ने रुक्मणि जी से विवाह करने का निश्चय किया। रूक्मणि के भाई बंधु भी चाहते थे कि हमारी बहन का विवाह श्रीकृष्ण से ही हो परंतु रुक्मणी श्रीकृष्ण से बड़ा द्वेष रखता था उसने उन्हें विवाह करने से रोक दिया और शिशुपाल को ही अपने बहन के योग्य समझा। ग्राम के पं. सुशील व्यास ने बताया कि चैत की नवमी के दिन भव्य मेले का आयोजन सदियों से चला आ रहा है इस दिन आसपास के लगभग 20 गांवों के श्रद्धालु पालर माता से अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

धार्मिक आयोजन

पालर माता धाम में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा

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