Hindi News »Madhya Pradesh »Hata» 200 साल पुरानी बावड़ी बनी सैकड़ों परिवारों के लिए पेयजल का सहारा

200 साल पुरानी बावड़ी बनी सैकड़ों परिवारों के लिए पेयजल का सहारा

एक ओर नगर के कई वार्ड पेयजल संकट से जूझ रहे हैं तो वहीं नगर के चंडीजी वार्ड स्थित एक बावड़ी से आसपास के सैकड़ों परिवार...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 09, 2018, 04:35 AM IST

200 साल पुरानी बावड़ी बनी सैकड़ों परिवारों के लिए पेयजल का सहारा
एक ओर नगर के कई वार्ड पेयजल संकट से जूझ रहे हैं तो वहीं नगर के चंडीजी वार्ड स्थित एक बावड़ी से आसपास के सैकड़ों परिवार के लोगों भरपूर पानी मिल रहा है। दरअसल चंडीजी मंदिर के पास 200 साल प्राचीन पुरानी बावड़ी है। बुजुर्गों के अनुसार यह बावड़ी सालों से आधे हटा की आबादी की प्यास बुझाती थी, लेकिन करीब 20 साल पहले नगर के विभिन्न वार्डों में पाइप लाइन बिछाने के बाद प्राचीन बावड़ियों की ओर लोगों ने ध्यान देना बंद कर दिया। जिसे चलते यह बावडी लगातार अपना अस्तित्व खोती जा रहीं थी।

लेकिन जैसे-जैसे नगर में जलसंकट का दौर शुरू हुआ तो लोगों को इन प्राचीन बावड़ियों का ख्याल आना शुरू हुआ, जिनमें वर्ष वर्ष पर्याप्त पानी भरा रहता है, लेकिन सफाई न होेने के कारण इनके पानी का कोई उपयोग नहीं करता। जिसके बाद वर्ष 2016 में स्थानीय लोगों ने सामूहिक रूप से इस तलैया की साफ-सफाई कराई। करीब एक सप्ताह तक नगर के समाजसेवियों, बुजुर्गों व युवाओं ने मिलकर तलैया में पड़े कचरे के साथ कर दिया। साथ ही इसमें फिटकरी व ब्लीचिंग पाउडर डाला गया, जिसके बाद इसका पानी पहले की तरह साफ व स्वच्छ हो गया। जिसके बाद आसपास रहने वाले करीब 200 परिवार के लोग इसके पानी का नियमित रूप से उपयोग करते हैं।

नीचे न उतरना पड़े इसलिए लगा दिया हैंडपंप

स्थानीय निवासी सुरेश पटेल, वीरेंद्र सिंह, रूकमन, हीराबाई ने बताया कि बावड़ी की सफाई के बाद लोगों को सीढ़ियों से नीचे उतरकर पानी निकालने में डर बना रहता था, जिसके चलते नगर के लोगों को एक उपाय सूझा, उन्होंने नगर पालिका के सहयोग से इसमें एक हैंडपंप लगा दिया गया। जिसके कारण लोगों को बावड़ी के उपर से ही पर्याप्त पानी मिलने लगा।

45 लाख की लागत से स्वीकृत नलजल योजना बंद

सालों से शोपीस बनकर रह गई पानी की टंकी

भास्कर संवाददाा। कुम्हारी/सगौनी

पटेरा ब्लाॅक की ग्राम पंचायत पटेरिया में लोगों को जलसंकट से राहत दिलाने के लिए शासन द्वारा करीब 10 साल पहले 45 लाख की लागत से नलजल योजना की स्वीकृत की थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते यह योजना केवल शोपीस बनकर रह गई है। ग्रामीणों को आज तक इससे एक बूंद पानी नहीं मिला। योजना के तहत करीब 8 जगह बोरबेल कराए गए, लेकिन कहीं पर भी पानी नहीं निकला।

दूसरी ओर पूरे गांव में पाइप लाइन भी बिछाई गई। इसके बावजूद भी ग्रामीणों को नलजल योजना का लाभ नहीं मिला। गांव के सरमन, उजयार, विजय, राजकुमार, सुनील ने बताया कि शासन ने ग्रामीणों की समस्या देखते हुए जैसे-तैसे नलजल योजना तो शुरू कर दी लेकिन निर्माण एजेंसी एवं पीएचई के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते पूरी योजना में लापरवाही बरती गई। घटिया क्वालिटी की पाइप लाइन बिछाने के कारण कुछ ही समय में पूरी पाइप लाइन खराब हो गई। दूसरी ओर गांव के आसपास ही बोरबेल कराकर लाखों रूपए बर्बाद कर दिए गए जबकि यदि गांव से एक किमी दूर सरकारी जमीन पर बोरबेल कराया जाता तो पर्याप्त पानी निकलता। मामले को लेकर कई बार कलेक्टर जनसुनवाई में भी शिकायत की गई, लेकिन स्थिति जस की तस है।

इस संबंध में पीएचई के एसडीओ एचएल अहिरवार का कहना है कि नलजल योजना को चालू कराने के प्रयास किए गए थे, लेकिन बोरबेल में पानी नहीं हैं। इसमें हम क्या कर सकते हैं।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Hata

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×