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भदभदा जलप्रपात पर गर्मी में आनंद उठा रहे सैकड़ों लोग

प्रकृति ने जहां इस स्थल पर अपनी अनुपम छटा बिखेरी है वही यह स्थल घातक भी साबित हो सकता है। गर्मी के दिनों में दोपहर...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 07, 2018, 05:05 AM IST

भदभदा जलप्रपात पर गर्मी में आनंद उठा रहे सैकड़ों लोग
प्रकृति ने जहां इस स्थल पर अपनी अनुपम छटा बिखेरी है वही यह स्थल घातक भी साबित हो सकता है। गर्मी के दिनों में दोपहर में यहां नहाने से लू लपट लगने की संभावना बनी रहती है। पत्थरों पर जमी काई एवं चिकनाई के कारण फिसलन भी ज्यादा रहती है। पानी का बहाव तेज होने के कारण छोटे बच्चों पर विशेष नजर रखनी पड़ती है। इस बहाव के लोग महिलाओं के आभूषण एवं कीमती जेवर आदि के बह जाने का भय बना रहता है। मुख्य स्थल तक पहुंचने के लिए को सीधा स्थान न होने के कारण संभलकर चलने की आवश्यकता होती है। भदभदा जलप्रपात हारट टोल प्लाजा से मात्र 100 मीटर की दूरी पर है, इस स्थल तक पहुंचने के लिए चार पहिया वाहनों को इस 100 मीटर की दूरी तय करने के लिए आने जाने का पैसा देना पड़ रहा है।

मार्च में बूंद भर नहीं था पानी, अब बारिश जैसा नजारा

मुजाहिद खान | हटा

जहां लोग बरसात के दिनों में पिकनिक के लिए प्राकृतिक व ऐतिहासिक धरोहर को देखने जाते थे, वहीं इस वर्ष गर्मी के दिनों में नगर से मात्र 6 किमी दूर हारट गांव से निकलने वाली पवित्र सुनार नदी का प्राकृतिक बांध एवं जल प्रपात पिकनिक स्थल बन गया है।

मार्च माह में नगर में जहां पानी की कमी एवं गिरते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन चिंतित हो गया था, नगर में पानी लाने के लिए योजनाएं बना रहा था, वही पंचमनगर बांध परियोजना से सुनार नदी में पानी छोडे जाने से नगर की पानी समस्या दूर हुई तो अंतिम सांसे ले रही सुनार नदी को पुर्नजीवन प्राप्त हो गया। नदी में पानी आते ही प्रशासन ने भी राहत की सांस ली। बांध का पानी नदी में आने से नदी के घाटों पर रौनक आई साथ ही सूखे पड़े जल प्रपात ने भी अपनी छटां बिखेर कर रख दी। हारट के पास भदभदा जल प्रपात तो गर्मी के दिनों में भी पिकनिक स्थल बन गया है।

जहां सुबह शाम सैकड़ों की संख्या में लोग सपरिवार जाकर इस प्राकृतिक स्थल का आनंद लेकर गर्मी से निजात पा रहे है। इस मार्ग से निकलने वाले साधू संतो के पग चरण भी इस स्थल को पवित्र कर रहे हैं।इस स्थल को कई नामों से जाना जाता है। चट्‌टानों के प्राकृतिक बांध पर एक साथ सात स्थानों से पानी झरना के रूप में नीचे गिरता है, इस कारण इसे सतधारा के नाम से भी जाना जाता है। इस झरने से निकलने वाली पानी की फुहार बहुत दूर-दूर तक फैलती है।

लोग सारे दिन की थकान दूर करने के लिए इस फुहार का आनंद लेने के लिए भी सायंकाल कई घंटों तक यहां बैठते हैं। प्रकृति का आनंद लेने पहुंचे रामेश्वर, दिनेश नेमा ने बताया कि इस स्थल का महत्व इसलिए भी ज्यादा बढ़ जाता है कि यहां पानी की ज्यादा गहराई नहीं है, बच्चों के लिए अलग झरना है जहां कम पानी है, नगर के पास है, कोई रोकटोक व प्रतिबंध नहीं है। आदित्य जैन, प्रवीण जैन ने बताया कि इस स्थल पर जैन संतों ने अपने बिहार के दौरान साधना की थी। तभी से यहां प्रकृति प्रेमियों की संख्या में इजाफा हुआ है। अब रोज सैकड़ों की संख्या में लोग यहां आकर स्नानकर आनंद लेते हैं।

प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था नहीं

भदभदा जल प्रपात पर प्रतिदिन दोनों समय सैकड़ों की संख्या में लोग छोटे-छोटे बच्चे भी नहाने के लिए जा रहे हैं। यह स्थल हटा, पटेरा एवं बटियागढ़ की सीमा को स्पर्श करता है। पुलिस थाना हटा लगता है। रोज बढ़ती भीड़ को देखते हुए इस स्थल पर अभी तक सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। न ही यहां गोताखोर तैनात किए गए हैं।

खतरे से खाली नहीं है यहां मौज मस्ती करना

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