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ओलावृष्टि से 984 गांव प्रभावित, 30 हजार रु. प्रति हेक्टेयर मिलेगा मुआवजा

ओला प्रभावित क्षेत्रों में अफसरों ने शुरू किया सर्वे, जल्द सौंपेंगे रिपोर्ट एग्रो भास्कर | खंडवा मध्यप्रदेश...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:45 AM IST
ओला प्रभावित क्षेत्रों में अफसरों ने शुरू किया सर्वे, जल्द सौंपेंगे रिपोर्ट

एग्रो भास्कर | खंडवा

मध्यप्रदेश में पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि से प्रभावित गांवों की संख्या बढकर 984 हो गई है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने ओलावृष्टि से हुए नुकसान की समीक्षा बैठक की, जिसमें प्रभावित गांवों का नया आंकड़ा पेश किया गया है। इससे पहले 621 गांवों के प्रभावित होने का अनुमान जताया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल के नुकसान का आकलन शीघ्र कर किसानों को जल्द राहत पहुंचाई जाएगी, इसके बाद राजस्व अमला और कृषि विभाग के अफसर खेतों में पहुंचकर सर्वे कार्य शुरू कर दिया है, जल्द ही रिपोर्ट कंपाइल कर सरकार को सौंपी जाएगी।

ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को फसल बीमा के साथ-साथ किसानों को सिंचित फसल के लिए 30 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर और असिंचित फसल के लिए 16 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से राहत दी जाएगी। अन्य किसान दो हेक्टेयर से अधिक जमीन धारित किसानों को सिंचित के लिए 27 हजार और असिंचित के लिए 13 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर राहत राशि देने का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के 13 जिले ओलावृष्टि की चपेट में आए थे, इनमें सबसे ज्यादा नुकसान भोपाल, होशंगाबाद, विदिशा, सीहोर, सिवनी, छिंदवाड़ा और बालाघाट शामिल है। 11 से 13 फरवरी के बीच लगातार तीन दिन प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश और ओले गिरने की घटनाएं हुई है, इसमें रबी फसलों को ज्यादा नुकसान हुआ है।

मंदी से बचाने में सक्षम है भावांतर योजना डॉ.मिश्र

दतिया जिले के कुरथरा गांव के किसानों को सूखा राहत राशि के रूप में 1324 किसानों को 62 लाख 20 हजार 448 रुपए मिलेंगे। यह जल्द ही किसानों के खाते में ट्रांसफर की जाएगी, ताकि किसान नई फसल की तैयार कर लें। उधर, जनसंपर्क, जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्र ने कहा भावांतर भुगतान योजना मध्यप्रदेश सरकार की अनोखी योजना है। योजना के तहत बाजार में उतार-चढ़ाव और मंदी से किसानों को बचाने की व्यवस्था की गई है। यदि बाजार में किसान की फसल कम दामों में बिकती है तो मध्यप्रदेश सरकार किसान की फसल का मूल्य तथा समर्थन मूल्य के भाव का अंतर किसानों के खाते में जमा करेगी।