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8 माह में 600 महिलाओं की निकालनी पड़ी बच्चादानी

भास्कर संवाददाता| होशंगाबाद होशंगाबाद जिले में 8 माह में 600 महिलाओं के बच्चादानी (यूटेरस) निकालनी पड़ी। आदिवासी...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:55 AM IST
भास्कर संवाददाता| होशंगाबाद

होशंगाबाद जिले में 8 माह में 600 महिलाओं के बच्चादानी (यूटेरस) निकालनी पड़ी। आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों में किशाेरियों और महिलाओं में मेंस्ट्रुअल साइकल (माहवारी) के प्रति जागरूकता नहीं है। इस कारण अंदरूनी ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं घास, मिट्टी, राख और कपड़े का उपयोग करती हैं। संक्रमण का शिकार होने के कारण बच्चादानी निकालकर जान बचाना पड़ रहा है। यह बात अपनी रिसर्च के लिए होशंगाबाद जिले में जागरूकता दौरे पर आईं पैड वुमन माया विश्वकर्मा ने कही। पेडमैन अक्षय कुमार की तरह अरुणाचलम मुरुगनाथम से कैलिफोर्निया में मुलाकात के बाद प्रेरणा लेकर माया अब पैड वुमन बनकर समाज को मेंस्ट्रुअल हाईजीन, सेनेटरी पेड के उपयोग और डिस्पोजल के विषय में जागरुक कर रही हैं। जिले की तीन दिनी यात्रा में पैड वुमन माया ने स्कूल, कॉलेज और छात्रावासों में पहुंचकर छात्राओं को हेलो पीरियड फिल्म दिखाकर समाज को जागरुक करने का संदेश दिया। इसके बाद वे इंदौर के लिए रवाना हुईं।

पैड वुमन की रिसर्च

होशंगाबाद पहुंची पैड वुमन माया विश्वकर्मा, स्कूल कॉलेजों में हेलो पीरियड फिल्म दिखाकर किया जागरुक

होशंगाबाद| किशोरियों को जागरुक करतीं नरसिंहपुर की माया विश्वकर्मा।

25 मार्च तक चलेगी पैड वुमन की यात्रा

माया ने यूटरस इन्फेक्शन और कैंसर को देखते हुए 45 दिनी यात्रा शुरू की है। यात्रा 25 मार्च तक चलेगी। वे 21 जिलों के आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं को जागरुक कर रही हैं।

अमेरिका में मेंस्ट्रुएशन 5वीं के कोर्स में

माया बताती हैं अमेरिका में 5वीं की बच्चियों को मेंस्ट्रुएशन पढ़ाया जाता है। संक्रमण से बढ़ रही बीमारियों और घटती प्रजनन क्षमता पर नियंत्रण के लिए जागरूकता जरूर है।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने खोली फैक्टरी

एनआरआई माया को नरसिंहपुर में सस्ते पैड बनाने की एक फैक्टरी लगाई। इसमें महिलाएं प्रतिदिन 2000 सेनेटरी पैड का उत्पादन करती हैं। यह पैड ग्रामीण क्षेत्रों में जनभागीदारी से निशुल्क बंटवाए जाते हैं। महिलाएं माया को पैड जीजी कहकर बुलाती हैं।