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बच्चों का संकल्प स्थापित करेंगेे मिट्टी की मूर्ति, गमले में आसानी करें विसर्जन

मूर्ति प्रशिक्षण- अन्नापुरा स्कूल में दैनिक भास्कर और समाजसेविका की पहल से सिखाया मिट्टी के गणेश बनाना

Danik Bhaskar | Sep 09, 2018, 11:45 AM IST

हरदा। मिट्टी से गणेश की मूर्ति बनाने के लिए शनिवार को पार्षद एवं समाजसेविका अनीता अग्रवाल ने अन्य साथियों के साथ अन्नापुरा स्कूल में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें बच्चे सरल तरीके से और सही मूर्ति बना सकें, इसके लिए एक मूर्तिकार की भी मदद ली। जिन्होंने बच्चों को मूर्ति बनाने की आसान विधि सिखाई। यह कार्यक्रम भास्कर की पहल से प्रेरित होकर किया। पार्षद अग्रवाल समाजसेवी और पर्यावरण प्रेमी महिलाओं के साथ दोपहर तीन बजे अन्नापुरा स्कूल पहुंची। यहां उन्होंने बच्चों को मिट्टी के गणेश व पीओपी की मूर्ति में अंतर बताया। उन्होंने कहा कि पीओपी लंबे समय तक पानी में घुलता नहीं है। इससे हमारी आस्था को ठेस पहुंचती है। जल भी प्रदूषित होता है। पर्यावरण को भी नुकसान होता है।


अनीता सराफ मोनिका अग्रवाल ने कहा कि जिस जल में मूर्ति विसर्जित होती है, उस पानी का हम सेवन करते हैं। इससे हमारी त्वचा को नुकसान होता है। पानी में भी रासायनिक रंग घुलते हैं। इससे जलीय जीव और पौधों को नुकसान पहुंचता है।


40 रुपए खर्च और 30 मिनट का समय

मूर्ति कलाकार दिलीप ने तीन सरल स्टेप्स में पहले बच्चों काे स्वयं मूर्ति बनाने की विधि बताई। इसके बाद उन्होंने कुछ बच्चों को बारी-बारी से अपने पास बुलाया। उनसे मूर्ति बनाने को कहा। ज्यादातर ने अच्छी मूर्तियां बनाई। दिलीप ने बताया कि मूर्ति बनाने के लिए ठीक मिट्टी का चयन करें। उन्होंने कहा कि अधिकतम 40 रुपए खर्च कर 30 मिनट में सुंदर मूर्ति तैयार की जा सकती है।

ऐसे करें विसर्जन

मिट्टी से मूर्ति बनाने के बाद इन्हें घर पर ही सुखाया जा सकता है। विसर्जन घर के बर्तन में पानी लेकर कर सकते हैं। बाद में मिट्टी युक्त जल को गमलों में डालने से मिट्टी में बदल जाएगी।

इन आसान स्टेप से तैयार कर सकते हैं प्रतिमा


1 प्रतिमा बनाने के लिए सबसे काली चिकनी मिट्टी को पानी मिलाकर अच्छे से गूंथ लें। उसके बाद उसे दो से तीन घंटे के लिए रख दें।
2 भिगोई गई मिट्टी को पांच या उससे अधिक हिस्सों में बांट ले। इससे पेट, पैर, हाथ व सूंड तैयार कर सकते हैं।
3 प्रतिमा को तैयार करने के बाद उसे कुछ घंटों के लिए सूखने छोड़ दे। फिर कलर कर सकते हैं। इसके लिए बाजार में उपलब्ध ईको फ्रैंडली कलर का प्रयोग करें।

हरदा। अभा मारवाड़ी महिला मंडल ने आयोजित किया कार्यक्रम। हरदा। अभा मारवाड़ी महिला मंडल ने आयोजित किया कार्यक्रम।

गणेशोत्सव पूरी धूमधाम से मनाएं लेकिन, रायपुर जैसा यह दृश्य दोबारा सामने न आए इसलिए पीओपी नहीं, मिट्‌टी के गणेश घर लाएं

 

तस्वीर रायपुर शहर के करबला तालाब की है। पिछले साल तालाब के गहरीकरण के दौरान पीओपी से निर्मित गणेशजी की अनेक प्रतिमाएं पानी की तह में मिलीं। इन्हें तालाब में लगभग आठ महीने पहले विसर्जित किया गया था। इतने महीनों के बाद भी ये बिल्कुल भी नहीं घुली थीं। 

कुछ शहरों में हुए अध्ययन बताते हैं कि पीओपी और रासायनिक रंगों की वजह से पानी में लेड, मरकरी और कैडमियम जैसे हानिकारक तत्वों, ठोस पदार्थों और एसिड की मात्रा में तेजी से इजाफा होता है और ऑक्सीजन की मात्रा में भी कमी आ जाती है। 

दैनिक भास्कर कई वर्षों से आप सभी पाठकों के साथ मिलकर 'मिट्‌टी के गणेश' अभियान चला रहा है। उद्देश्य सिर्फ यही है कि हम पीओपी की बजाय मिट्‌टी से बने गणेशजी की स्थापना करें। फिर घर पर ही उनका विसर्जन कर पवित्र मिट्‌टी को गमले में डालकर उसमें पौधा लगा दें। इस तरह उत्सव के बाद भी पौधे के रूप में उनका आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ बना रहेगा। जलाशय भी दूषित होने से बचेंगे। 

- मिट्‌टी के गणेश के साथ अपनी सेल्फी 9893886910 नंबर पर वॉट्सएप करें। चयनित सेल्फी को भास्कर और हमारे सोशल मीडिया पेजेस पर प्रकाशित किया जाएगा।