होशंगाबाद / मटकुली में बंदरों के हमले से बचने के लिए डंडे लेकर कर रहे चुनाव ड्यूटी

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 12:48 PM IST


पिपरिया में बंदरों के डर से डंडा लेकर करनी पड़ रही है कर्मचारियों को ड्यूटी। पिपरिया में बंदरों के डर से डंडा लेकर करनी पड़ रही है कर्मचारियों को ड्यूटी।
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पिपरिया में बंदरों के डर से डंडा लेकर करनी पड़ रही है कर्मचारियों को ड्यूटी।पिपरिया में बंदरों के डर से डंडा लेकर करनी पड़ रही है कर्मचारियों को ड्यूटी।
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  • मटकुली में बंदर लाइलाज समस्या हैं, इसीलिए चुनाव तक ये सब चलता रहेगा 

पिपरिया. होशंगाबाद और छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र की सीमा पर मटकुली में चुनाव आयोग का एसएसटी दल ड्यूटी के साथ ही बंदरों से भी जूझ रहा है। हालत यह है कि दल के सदस्य अपने हाथों में डंडे लेकर चुनाव ड्यूटी कर रहे हैं। मटकुली में बंदर लाइलाज समस्या हैं इसीलिए चुनाव तक यह सब चलता रहेगा। 

 

मटकुली में छिंदवाड़ा और होशंगाबाद लोकसभा सीट की सीमा पर निर्वाचन शाखा ने वाहनों की जांच के लिए एसएसटी नाका लगवाया हुआ है। नाके पर तैनात कार्यपालिक मजिस्ट्रेट एनके कौशिक ने बताया यहां पर बंदरों के कारण बहुत ज्यादा परेशानी हा़े रही है। आप धूप में ज्यादा देर नहीं बैठ सकते। हम लोगों ने एक टेंट लगवाया हुआ था जिसमें बैठ जाते थे। वाहन आने पर चेकिंग किया करते थे। टेंट लगने के कुछ ही देर बाद बंदरों का एक दल आ गया और उसने हमें टेंट से बाहर खदेड़ कर टेंट पर कब्जा कर लिया। उन्होंने बेहद मजबूत केंट को कई जगह से फाड़ डाला है और वह टेंट अब किसी काम का नहीं रहा। उसे खोल कर हमने रख दिया है। निर्वाचन शाखा कुछ जानकारी भेज दी गई है और यहां पर अस्थाई रूप से टीन शेड लगवाए जा रहे हैं। 

 

डंडे से करते हैं बचाव 
इसी नाके पर तैनात पुलिस सब इंस्पेक्टर राजकुमार शाक्य ने कहा क्षेत्र में बंदरों की कई सारी गैंग हैं जो बारी-बारी से आती हैं। आप इनसे मुकाबला नहीं कर सकते हैं। इन्हें डांटने पर यह सब मिलकर हमलावर करने लगते हैं। शाक्य ने बताया हम लोग इनसे बोलते ही नहीं है। इसके बाद भी छोटे बंदर हमारे साथ शरारत कर हमें उकसाते हैं। उनसे बचाव के लिए हम लोग यह डंडे रखे हुए हैं। पीने का पानी या खाने का कोई सामान हम लोग साथ नहीं रख सकते। उस पर यह आशंका बनी रहती है कि रजिस्टर या कोई और सामान बंदर ना ले जाए। 

 

बंदर लेते हैं जामा तलाशी 
इस क्षेत्र में बंदरों का इतना आतंक है कि अगर वे किसी को घेर ले तो आत्मसमर्पण के अलावा कोई चारा नहीं बचता है। सब इंस्पेक्टर शाक्य ने बताया कि जामा तलाशी में व्यक्ति के सिर से लेकर पैर तक बारीकी से तलाशी ली जाती है। मैंने यहां ड्यूटी के दौरान कई बार देखा बंदरों की गैंग लोगों को घेर लेती है और उनकी जामा तलाशी लेती है। उन्हें केवल खाने के सामान की तलाश होती है। कुछ मामलों में हमने देखा है मोबाइल फोन लेकर पेड़ पर चले जाते हैं। बंदरों के बच्चे कपड़े ले जाते हैं। 

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