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अव्यवस्था / सिविल लाइन हॉस्टल के दो कमरों में रह रहे 100 बच्चे, फर्श पर सोना मजबूरी



hostel condition in mp
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hostel condition in mp

Dainik Bhaskar

Sep 16, 2018, 11:44 AM IST


होशंगाबाद। शहर के आवासीय विद्यालयों और हॉस्टलों में बच्चे बदतर जीवन जीने पर मजबूर हैं। गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए गांवों से लाकर यहां रखा गया है वहां की हालत बेहद बदतर है। बच्चे जिस जगह पढ़ते हैं रात में उसी जगह पर चटाई बिछाकर सो जाते हैं। 

 

 

इसी तरह आदिम जाति कल्याण के जिले में 132 होस्टल हैं। इन हॉस्टलों में 7410 बच्चे दर्ज हैं। अधिकांश होस्टलों में रहने और सोने के लिए पर्याप्त पलंग और गद्दे नहीं हैं। आदिम जाति कल्याण के पास सालाना लगभग 30 करोड़ का बजट आता है लेकिन होस्टलों में सुविधाएं नहीं हैं। 

 


सिविल लाइंस, बालक आवासीय विशेष प्रशिक्षण केंद्र में 2 कमरों में 100 बच्चे 

दो कमरों में 100 बच्चे, पलंग नहीं जमीन पर सोते हैं। 2015 में पढ़ाई से वंचित बच्चों के लिए सिविल लाइंस में यह ट्रेनिंग सेंटर खुला था। यहां दो कमरों में पहली से आठवीं तक की कक्षाओं वाले 100 बच्चे रहते हैं। हालांकि एक कमरा बड़ा और हॉल जैसा है लेकिन दूसरा कमरा बेहद छोटा है। बच्चे जिस जगह पढ़ते हैं वहीं जमीन पर कंबल और दरी बिछाकर सो जाते हैं। हरे रंग की चटाई हमेशा फर्श पर जरूर बिछी रहती है। बच्चों का सामान भी पेटियों में रखा रहता है। बारिश का समय है जमीन पर बच्चे सोते हैं समीप ही ग्राउंड में पानी थमा रहता है ऐसे में जहरीले जीव-जंतु बच्चों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

 

खंजनपुर छात्रावास में 400 स्कवेयर फीट में रहते हैं 92 बच्चे 

 

एक साल पहले सितंबर में खंजनपुर प्राइमरी स्कूल के तीन कमरे लेकर इस छात्रावास को शुरू किया है। एक साल में पलंग का इंतजाम नहीं हो पाया है। 92 बच्चों के रहने और सोने का इंतजाम 300 से 400 स्क्वेयर फीट के छोटे से 4 कमरों में की है। इन कमरों में ही पेटियां, स्कूल बैग और अन्य सामान रहता है। बच्चे बमुश्किल सो पाते हैं। सहायक वार्डन आत्माराम धुर्वे ने बताया कि पलंग का बजट नहीं है। समीप ही नाला है इस नाले में विषैले सांप रहते हैं ऐसे में जमीन पर सोने वाले बच्चों को नुकसान हो सकता है। 

 

दो करोड़ रुपए का गबन आया था सामने 

 

सर्व शिक्षा अभियान में एक साल पहले शालात्यागी बच्चों के स्कूलों में सुविधाएं उपलब्ध करवाने के नाम पर 2 करोड़ 43 लाख का गबन सामने आया था। फर्जी उपस्थिति दिखाकर गबन किया था। इस मामले में तत्कालीन डीपीसी जीएल साहू समेत अन्य शिक्षकों को आरोपी बनाया था। 


 

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