नई जिंदगी / अखरोट जैसा था 82 दिन की सान्वी का दिल, 11 डॉक्टरों ने 10 घंटे किया आॅपरेशन



बच्ची को लिए माता-पिता। बच्ची को लिए माता-पिता।
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बच्ची को लिए माता-पिता।बच्ची को लिए माता-पिता।

Dainik Bhaskar

Oct 10, 2018, 11:12 AM IST

इटारसी। महज 82 दिन की सान्वी का दिल अखरोट के बराबर था। हार्ट की दो शिराओं और वॉल्व में जन्मजात विकृति होने से बच्ची की जान को खतरा था। इतनी छोटी उम्र में ऑपरेशन करने कई अस्पतालों ने मना कर दिया था। लेकिन माता-पिता ने हिम्मत नहीं हारी। मुंबई के के 11 डॉक्टरों ने सान्वी के हार्ट का ऑपरेशन कर नई जिंदगी दी। 10 घंटे में आॅपरेशन कर हार्ट की दो शिराओं व वॉल्व की विकृति दूर की। इतनी छोटी उम्र में हार्ट का ऑपरेशन चिकित्सा विज्ञान का चमत्कार है। 

 

इटारसी में रहने वाले एक दंपती आदित्य प्रताप और संजना चौहान को जांच में पता चला था कि गर्भ में पल रही बच्ची की धड़कन कम हो रही है। ऐसे में भोपाल के एक निजी हॉस्पिटल (तनुश्री) ले गए। वहां 10मई को तुरंत ही ऑपरेशन कर 7 माह 20 दिन में बच्ची को गर्भ से बाहर निकाला गया। फिर छह दिन तक दूसरे हॉस्पिटल (रेनबो) के आईसीयू में रखा। समय से पहले बच्ची पैदा हुई तो वजन सिर्फ 2.4 किलोग्राम था। नवजात बच्ची के ह्दय की पूरी जांच की तो इको -काड्रियल फ्यूजन डिफेक्ट (ईसीडी) पाया गया। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने तीन माह के भीतर ही ऑपरेशन की सलाह दी अन्यथा बच्ची का बचना मुश्किल हो जाएगा। 

 

10 हजार में एक नवजात को होता है सेप्टल डिफेक्ट : भोपाल के डॉ. राजन क्षेत्रपाल का कहना था कि दिल में दोहरा सेप्टल डिफेक्ट के मामले बहुत कम सामने आते हैं। नवजात के हार्ट का ऑपरेशन होना साधारण बात नहीं है। स्थानीय शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. यूके शुक्ला ने बताया 10 हजार नवजातों में किसी एक को हार्ट की यह समस्या आती है। नवजात बच्ची को जन्म से ही गंभीर ह्दय संबंधी विकृतियां थीं। इस कारण ह्दय की दो शिराओं और वॉल्व में असाधारण विकृति के कारण रक्त का प्रवाह रुक रहा था। इस विकृति को कोन्जिनिटल हार्ट डिसीज विथ बाई-वेंट्रीकुलर सेप्टल डिफेक्ट कहा जाता है।
 
बच्ची स्वस्थ, वजन भी बढ़ा: हॉस्पिटल के चिल्ड्रन हार्ट सेंटर में बच्चों के दिल की डॉ. स्नेहिल कुलकर्णी ने नवजात सान्वी को देखा। वे भ्रूण चिकित्सा व जन्मजात ह्दय रोग विशेषज्ञ हैं। पांच दिन बाद 2 अगस्त को 11 डॉक्टरों ने 10 घंटे ऑपरेशन कर नवजात के ह्दय की विकृति ठीक की। जांच व सर्जरी पर तीन लाख रुपए का खर्च आया। ऑपरेशन के सवा माह बाद बच्ची ठीक है। उसका वजन भी आधा किलो बढ़ गया है। 

 

कई अस्पतालों ने कर दिया था ऑपरेशन करने से इंकार: मां संजना (30) ने बताया वे पति के साथ दो महीने की नवजात बच्ची को लेकर पलवल (हरियाणा) के सत्य साईं हार्ट इंस्टीट्यूट गईं। वहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन में असमर्थता व्यक्त की। यह कहा कि चेन्नई या मुंबई के बड़े हार्ट अस्पताल में दो सप्ताह के अंदर ही बच्ची का ऑपरेशन करवा लें। तब वे मुंबई पहुंचे वहां केईएम व वाडिया जैसे अस्पतालों ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया। अंतत: कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने तीन माह से छोटी बच्ची का ऑपरेशन करने के लिए हां कर दी। 

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