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अभी भी चेतने का समय...

होशंगाबाद | होशंगाबाद से 30 किमी दूर नर्मदा किनारे बसा हिरानी गांव। जलस्तर घट रहा है, लेकिन यहां नर्मदा के बीच निकले 5...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 03:05 AM IST

अभी भी चेतने का समय...
होशंगाबाद | होशंगाबाद से 30 किमी दूर नर्मदा किनारे बसा हिरानी गांव। जलस्तर घट रहा है, लेकिन यहां नर्मदा के बीच निकले 5 एकड़ के टापू पर खेती हो रही है। मछुआरे दिनेश केवट नर्मदा के इस 5 एकड़ क्षेत्र में अनाज और सब्जियों की खेती कर जगह का उपयोग कर रहे हैं। सूखी नर्मदा के बीच टापू अब हरियाली में बदलकर लोगों को लुभा रहा है। दिनेश ने बताया अक्टूबर में 3 एकड़ जमीन निकली। दिनेश ने खेती के इरादे से हाथों से पथरीली और रेतीली जमीन को तैयार किया और गेहूं को बोया। चूहों के कारण उत्पादन केवल 15 क्विंटल ही हुआ। अप्रैल तक 2 एकड़ और जमीन और निकल आई। गेहूं को काटने के बाद इस पर सब्जियां उगाईं।

60 साल में नर्मदा में पहली बार इतना कम पानी, 5 एकड़ के पथरीले, रेतीले टापू पर उगाई सब्जियां और गेहूं

सप्लाई होगी प्रभावित

भोपाल पेय जल योजना के इंटकवेल में भी डेढ़ मीटर कम होने की बात वहां के प्लांट इंजीनियर पुनीत गुप्ता ने बताया पहली बार डेढ़ मीटर पानी कम हुआ है। तीन मीटर कम हुआ तो सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

इंटकवैल से निकली गाद से बना टापू

नर्मदासेवी रामस्वरूप साहू ने बताया नर्मदा में इंटकवैल बनने के दौरान निकली मिट्टी से टापू बना है। नर्मदा किनारे 500 मीटर में भोपाल पेयजल और कोकाकोला प्लांट के लिए इंटकवैल बनाए हैं। इसकी मिट्टी और गाद से टापू बना है।

इन बुजुर्ग आंखों ने पहली बार देखा नर्मदा का ऐसा नजारा

जहानपुर के 75 वर्ष के देवीराम टाटू ने बताया 60 सालों में नर्मदा में ऐसा टापू नहीं देखा। पहले नर्मदा का पानी इतना कम कभी नहीं हुआ। इस साल जलस्तर काफी कम हुआ है।



जहानपुर की 95 वर्ष की अजुद्दी बाई ने बताया 60 साल में पहली बार नर्मदा की बीच में खेत जैसा टापू निकला। नर्मदा का पानी भी कम है। गर्मी और पड़ेगी ऐसे में पानी का संकट और बढ़ेगा।

रिपोर्ट: रामभरोस मीणा

फाेटो: नरेंद्र कुशवाहा

ड्रोन सहयोग: शुभम चौहान

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