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खुद को खुदा की राह में समर्पित कर देने का प्रतीक है रमजान : अंसारी

मस्जिदों में अदा हुई तरावीह की विशेष नमाज भास्कर संवाददाता| खिरकिया “खुद को खुदा की राह में समर्पित कर देने का...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 05:05 AM IST
खुद को खुदा की राह में समर्पित कर देने का प्रतीक है रमजान : अंसारी
मस्जिदों में अदा हुई तरावीह की विशेष नमाज

भास्कर संवाददाता| खिरकिया

“खुद को खुदा की राह में समर्पित कर देने का प्रतीक पाक महीना माह-ए-रमजान न सिर्फ रहमतों और बरकतों की बारिश का वकफा है, बल्कि समूची मानव जाति को प्रेम, भाईचारे और इंसानियत का संदेश भी देता है।

यह बात स्थानीय बिलाल मस्जिद के पेश इमाम मोहम्मद आलिम कलीम अंसारी ने रमजान की पूर्व संध्या पर कही। उन्होंने कहा इस पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों का खजाना लुटाता है और भूखे-प्यासे रहकर खुदा की इबादत करने वालों के गुनाह माफ हो जाते हैं। इस माह में दोजख (नरक) के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और जन्नत की राह खुल जाती है। इमाम साहब ने फरमाया रोजा अच्छी जिंदगी जीने का प्रशिक्षण है। जिसमें इबादत कर खुदा की राह पर चलने वाले इंसान का जमीर रोजेदार को एक नेक इंसान के व्यक्तित्व के लिए जरूरी हर बात की तरबियत देता है।

उन्होंने कहा पूरी दुनिया की कहानी भूख, प्यास और इंसानी ख्वाहिशों के इर्द गिर्द घूमती है और रोजा इन तीनों चीजों पर नियंत्रण रखने की साधना है। रमजान का महीना तमाम इंसानों के दुख-दर्द और भूख-प्यास को समझने का महीना है, ताकि रोजेदारों में भले-बुरे को समझने की सलाहियत पैदा हो। उन्होंने कहा बुराई से घिरी इस दुनिया में रमजान का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है।

रमजान की विशेषता बताते हुए इमाम ने कहा इस मास की विशेषताएं महीने भर के रोजे रखना, रात में तरहबीह की नमाज पढ़ना, क़ुरान तिलावत (पारायण) करना, एतेकाफ़ में बैठना यानी गांव और लोगों की अभ्युन्नती व कल्याण के लिए अल्लाह से दुआ (प्रार्थना) करते हुए मौन व्रत रखना।

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