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डिप्रेशन के लक्षण समझ में आ जाएं तो कर्मचारी की जरूरतें भी समझेंगे**

एक वर्ष पहले
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डिप्रेशन के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी होना क्यों जरूरी है जानिए हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू से। यह भी जानिए कि छोटी आदतें कैसे आपका व्यवहार बदल देती हैं...

लगातार डेडलाइन्स छोड़ने वाले कर्मचारी की कैसे करें मदद?

जब कोई कर्मचारी लगातार अपनी डेडलाइन्स छोड़ रहा है या अपने काम के प्रति प्रतिबद्ध नहीं है, तो वो जानबूझकर ऐसा नहीं कर रहा है। असल समस्या जानने के लिए कर्मचारी से बात करके उनका नजरिया जानने की कोशिश भी कर सकते हैं। जैसे-यदि व्यक्ति लगातार डेडलाइन्स छोड़ रहा है, तो आप कह सकते हैं कि - ‘आपको काम पूरा करने के लिए इन दिनों ज्यादा समय की जरूरत पड़ रही है। हम क्या मदद कर सकते हैं कि आप पहले की तरह समय पर काम पूरा कर सकें।’ जब टीम के सदस्य भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस करते हैं तो वे आपके साथ काम करके अपनी समस्या को सुलझाना भी चाहेंगे।

(डज यॉर टीम हैव अकाउंटेबिलिटी प्रॉब्लम, मेलिसा रेफोनी)

छोटी आदतें बड़े बदलाव के लिए कैसे जिम्मेदार होती हैं?

बड़े लक्ष्य जैसे-रोज एक घंटा ध्यान करना या पढ़ने के लिए समय निकालना भारी लगते हैं। इसलिए छोटी-छोटी आदतों पर ध्यान देकर शुरुआत कर सकते हैं। जैसे कुछ सेकंड के लिए मेडिटेट करना या सोने से पहले रोज रात को 30-40 लाइनें पढ़ना। चीजें आसान बनाने के लिए इन कामों को भी उसी समय पर कर सकते हैं जिस समय आप अपने अन्य काम करते हैं। जैसे-दांतों को ब्रश करने के दौरान ही किताब की 30-40 लाइनें पढ़ सकते हैं। अपनी ‘यस’ लिस्ट भी बना सकते हैं। इसमें हर काम के आगे ‘हां’ या ‘ना’ लिखते जाएं जिससे आपको यह पता रहे कि आपने कौन-से काम कर लिए हैं। कई महीनोें तक ‘हां’ देखने के बाद अपनी छोटी आदतें बढ़ा लें। (टू अचीव बिग गोल्स स्टार्ट विद स्मॉल हैबिट्स, सबीना नवाज)

कर्मचारी डिप्रेशन में है तो किस तरह मदद कर सकते हैं आप?

दुनियाभर में लोग तेजी से डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। हो सकता है आपको भी कोई ऐसा मिल जाए जो इस बीमारी से जूझ रहा है। यदि आप इसके लक्षण समझ लेते हैं तो कर्मचारियों की जरूरतों को भी समझेंगे और कई तरह से उनकी मदद कर सकेंगे। उनपर समय की पाबंदी ना करते हुए फ्लेग्जिबल टाइमिंग देंगे। शोध बताते हैं कि फ्लेग्जिबल टाइमिंग होने से कमिटमेंट और प्रोडक्विटी दोनों ही बढ़ जाते हंै। बड़े कामों को छोटे-छोटे कामों में बांट दें। छोटी डेडलाइन्स होने से कर्मचारी बड़े कामों को भी छोटे काम की तरह ही देखते हैं। अगर किसी को लगता है कि कोई काम उनके लिए बना है तो वे उसे महत्व देंगे और जल्दी पूरा करेंगे। लगातार जीत कर्मचारियों का आत्मविश्वास बढ़ाएगी और तजुर्बे देगी। (हाउ टू मैनेज एन एंप्लॉइ विद डिप्रेशन, क्रिस्टन बेल)

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होशंगाबाद, रविवार, 15 मार्च, 2020
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