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पंचायत खदानों अाैर स्टाकों की शिकायत पर जांच नहीं

एक वर्ष पहले
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खनिज विभाग के पोर्टल से अवैध रेत के परिवहन करने इलेक्ट्रॉनिक परिवहन पास (ईटीपी) बनाकर रेत की अवैध सप्लाई की जा रही है। इसके लिए होशंगाबाद के रेत स्टॉकिस्टों अाैर पंचायत की अाड़ में यह काम चल रहा है। भास्कर के इन तथ्यों पर खनिज विभाग के एक वरिष्ठ अफसर ने माना कि यह सही है कि कई जगह इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कई जगह तो सिर्फ परमिट बन रहे हैं, रेत शिफ्टिंग होती ही नहीं, वहीं खपा दी जाती है और जो रेत खपती है, उसकी पूर्ति वापस अवैध खनन से ढेर पर रेत डालकर कर ली जाती है। इससे स्टॉक यथावत बना रहता है और जब सरकार रायल्टी मांगती है तो कागजों में नाममात्र रेत बेचना बताकर उतनी ही रायल्टी दी जाती है, जबकि खपत कई सौ गुना ज्यादा की जा रही है। सरकार जब जांच करती है तो स्टॉकिस्ट के पास वही मात्रा बनी रहती है, जितना उसे स्टॉक में दर्शा रखा है। खुलासे से बचने के लिए खपत दर्शाने के लिए गिने-चुने बाहरी ट्रकों की ई-रायल्टी दर्शाई जा रही है। जिला खनिज अधिकारी महेंद्र पटेल ने बताया कि शिकायतों और मामलों की जांच होगी।

रेत के स्टॉक का नहीं होता सत्यापन

रेत के स्टॉक को भौगाेलिक सत्यापन नहीं हो रहा है या लोकल स्टाफ करता है। इससे स्टॉक से सप्लाई कागजों में दर्ज हुई है, वह वाकई मौके से कम हुई या नहीं, यह पता ही नहीं चलता। सरकार ने इसके लिए कोई सख्त निर्देश भी आज तक नहीं दिए हैं। अफसर कह रहे हैं रेत स्टॉक का सत्यापन किया जाएगा।


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