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तामिया, छिंदवाड़ा छोड़कर होशंगाबाद के सोहागपुर सहित 38 रेस्ट हाउस, सर्किट हाउस निजी हाथों में देने की तैयारी

Hoshangabad News - प्रदेश भर में मौजूद पीडब्ल्यूडी और जलसंसाधन विभाग के रेस्ट हाउस और सर्किट हाउस को राज्य सरकार निजी हाथों में...

Feb 15, 2020, 07:40 AM IST

प्रदेश भर में मौजूद पीडब्ल्यूडी और जलसंसाधन विभाग के रेस्ट हाउस और सर्किट हाउस को राज्य सरकार निजी हाथों में देेने जा रहा है। इसमें मौजूदा बिल्डिंग के साथ आसपास की भूमि भी 30 साल की लीज पर दी जाएगी। एेसे 38 रेस्ट हाउस और सर्किट हाउस का चयन कर लिया गया है, जिन्हें पीपीपी मोड अथवा अन्य माध्यम से दिया जाना है। सूची में से तामिया और छिंदवाड़ा के रेस्ट हाउस भवन, परिसर मौजूद दूसरी बिल्डिंग और खाली पड़ी जमीन को शामिल नहीं किया गया है। तामिया और छिंदवाड़ा को पर्यटन विभाग ही अपने हाथ में लेकर विकसित करेगा। पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने इस पर सहमति दे दी है। विभाग के प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव ने आगे की कार्यवाही भी प्रारंभ कर दी।

बताया जा रहा है कि पैसा जुटाने के लिए इस कवायद को अंजाम दिया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी के रेस्ट हाउस और सर्किट हाउस को पर्यटन के लिहाज से तैयार करने को लेकर पहली बैठक मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में 25 मई 2019 को हुई थी। इसी में तय हुआ था कि निजी निवेश के माध्यम से रेस्ट हाउस और सर्किट हाउस को विकसित किया जाए।

एक अक्टूबर 2019 को पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में फिर बैठक की गई। इसी के मद्देनजर सूची तैयार की गई। प्रारंभ में 56 रेस्ट हाउस-सर्किट हाउस को पर्यटन के लिए उपर्युक्त माना गया, लेकिन बाद में 40 को मंजूरी मिली। इसमें से भी तामिया और छिंदवाड़ा को अलग कर दिया गया। शेष 38 रेस्ट हाउस और सर्किट हाउस की भवन के साथ कुल जमीन करीब पौने चार लाख मीटर है।

ये जाएंगे निजी हाथों में

बैतूल के चोपना और शाहपुर, गुना के बम्होरी, होशंगाबाद के ढेकना, रायसेन के बरेली, औबेदुल्लागंज व उदयपुरा, अशोकनगर के चंदेरी, भिंड के मालनपुर, गुना के खटकिया व मकसूदनगढ़, मुरैना के सबलगढ़, श्योपुर के गोरस, शिवपुरी के सुभाषपुरा, राजगढ़ के रेस्ट हाउस व मोतीपुरा, बुरहानपुर के असीरगढ़, बड़वानी के सेंधवा, झाबुआ के मेघनगर व थांदला, खरगौन के बड़वाह धामनोद रोड पर दो व पिपलिया, अनूपपुर के राजेंद्र ग्राम व अमरकंटक, सतना के रामपुर बघेलान व चित्रकूट, सीधी के मझौली, उमरिया के ताला, दमोह के बंधकपुर व खर्राघाट, छतरपुर के भीमकुंड, सागर के ढाना व रेहली, देवास के सतवास, नीमच के मोरवान और होशंगाबाद के सोहागपुर शामिल हैं। इन सभी में दो से लेकर चार तक कमरे हैं। चित्रकूट में 8 और भीमकुंड में 12 कमरे हैं।

कैबिनेट में जा सकता है मामला : रेस्ट हाउस और सर्किट हाउस को पीपीपी मोड अथवा अन्य किसी तरीके से निजी निवेश कराके विकसित करने का फैसला कैबिनेट ले सकती है। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि इसी वित्तीय वर्ष में निर्णय लिया जाना है। सरकार को उम्मीद है कि इससे 100 करोड़ से अधिक राशि जुटाई जा सकेगी।

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