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पिपरिया अस्पताल में डॉक्टरों की कमी, इलाज नहीं मिलने से मरीज परेशान

एक वर्ष पहले
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शासकीय अस्पताल पिपरिया में डॉक्टर की कमी से लोगों को हो रही परेशानी बढ़ती जा रही है। शासन स्तर से डॉक्टरों की उपलब्धता नहीं कराए जाने के कारण यह अस्पताल रेफरल सेंटर में बदलता जा रहा है। शहर ही नहीं आसपास के इलाकों से यहां इलाज के लिए आने वाले लोग परेशान हो रहे हैं। भाजपा नेत्री अरुणा जोशी और कांग्रेस नेत्री नीलम पचौरी ने बताया जब भी अस्पताल आना होता है हमेशा ही डॉक्टरों की कमी एक समस्या के रूप में सामने आती है। जोशी ने बताया पूर्व में हमारे द्वारा काफी प्रयास किया गया, लेकिन हमें कहने में कोई संकोच नहीं है कि हमारे भी प्रयास सफल नहीं हो सके।

यहां कई बार डॉक्टरों को भेजा गया, लेकिन वे यहां काम करने के लिए तैयार नहीं और ज्वांइन तक नहीं करते हैं। कांग्रेस नेत्री नीलम पचौरी ने बताया कि हाल ही में स्थानीय कांग्रेसजनों के द्वारा किए गए प्रयास के चलते तीन डॉक्टर के तबादले पिपरिया किए गए थे, लेकिन एक भी डॉक्टर पिपरिया नहीं आया। यहां अस्पताल में अगर प्रसव प्रकरणों को छोड़ दिया जाए तो बीएमओ डॉ. एके अग्रवाल और डॉ. एससी साहू ही ऐसे हैं जो मरीजों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

रोजाना आते हैं 500 से ज्यादा मरीज

शासकीय अस्पताल पिपरिया में अकेले पिपरिया क्षेत्र ही नहीं छिंदवाड़ा जिले के देलाखारी, पचमढ़ी, सांडिया, बरेली, शोभापुर सहित आसपास के सैकड़ों ग्रामों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल के इनडोर सेक्शन में 50 से ज्यादा मरीज भर्ती रहते हैं।

वहीं आउटडोर सेक्शन में 400 से 550 के आसपास मरीज रोजाना इलाज के लिए आते हैं। डॉक्टर एससी साहू ने बताया कि कई बार खाना भी नहीं ले पाते हैं। बीएमओ डॉक्टर एके अग्रवाल स्वयं बीमार हैं। उन्हें आराम करने के लिए कहा गया है, लेकिन अस्पताल में काम का बोझ अधिक होने के कारण वे लगातार काम कर रहे हैं। स्थानीय नागरिक हमेशा ही डॉक्टर की मांग करते हैं। डॉक्टरों के तबादले भी पिपरिया के लिए किए जाते हैं, लेकिन पिछले कई साल से डॉक्टर आए नहीं हैं।

- डाॅ. एके अग्रवाल, बीएमओ

पिपरिया। शासकीय अस्पताल मे डाक्टरों की कमी के चलते लोग पिछले कई साल से परेशान हैं।
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