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शहडोल, शिवपुरी जैसे छोटे जिला अस्पतालों को मिली मान्यता, लेकिन जेपी निरीक्षण तक को भी तैयार नहीं

Hoshangabad News - एक तरफ जहां प्रदेश के छोटे-छोटे जिलों के अस्पताल प्रसव के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के चलते केंद्र सरकार से...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 09:20 AM IST
SHIVPUR News - mp news small district hospitals like shahdol shivpuri get recognition but jp inspection is not ready till
एक तरफ जहां प्रदेश के छोटे-छोटे जिलों के अस्पताल प्रसव के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के चलते केंद्र सरकार से लक्ष्य की मान्यता प्राप्त कर चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ राजधानी का जेपी अस्पताल लक्ष्य के लिए होने वाले पहले निरीक्षण तक के लिए तैयार नहीं है। एनएचएम बीते 15 माह में अस्पताल प्रबंधन को इस बारे में कई बार पत्र लिख चुका है, लेकिन अस्पताल की व्यवस्थाओं में कोई बदलाव नहीं आया है। इस मामले में एनएचएम के अधिकारियों का कहना है कि जेपी अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों का रवैया बहुत ही गैर जिम्मेदाराना है। वे किसी भी नए सुधार और बदलाव के लिए कोई पहल ही नहीं करना चाहते। यही वजह है कि राजधानी का यह क्वालिटी अस्पताल हेल्थ प्रोसीजर, रिकॉर्ड मेनटेन और मरीजों के फीडबैक के मामले में प्रदेश के छोटे-छोटे अस्पतालों से काफी पीछे छूट गया है। एनएचएम ने मार्च 2018 में प्रदेश के 19 जिलों को लक्ष्य के लिए चुना था। इन जिलों को पांच-पांच लाख का बजट भी दिया गया था। सभी जिलों को अपनी व्यवस्थाएं सुधारकर जल्द से जल्द लक्ष्य का सर्टिफिकेट लेने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए अधिकतम 18 माह का समय दिया गया था। एनएचएम द्वारा चुने गए 18 में से 5 जिला अस्पतालों को लक्ष्य का सर्टिफिकेट मिल चुका है, जबकि अन्य पांच जिलों में निरीक्षण हो चुका है। इसी प्रकार छह जिलों में मप्र एनएचएम की टीम निरीक्षण कर चुकी है, लेकिन तीन जिला अस्पतालों ने अभी तक अपना सेल्फ असेसमेंट पूरा नहीं किया है। इनमें छतरपुर और सिंगरोली के साथ भोपाल का जिला अस्पताल भी है। एनएचएम की टीम कायाकल्प के साथ-साथ जिला अस्पतालों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट (एनक्यूएस) के लिए भी काम कर रही है। एक तरफ जहां भिंड, सतना जिला अस्पताल को यह सर्टिफिकेट मिल चुका है। वहीं जेपी में दो साल बाद भी एनक्यूएस का निरीक्षण ही नहीं हो पाया है। जेपी को बीते दो साल से सांत्वना पुरस्कार से ही संतोष करना पड़ रहा है।

15 माह पहले एनएचएम ने दिया था बजट, बार-बार पत्र लिखने के बाद भी नहीं सुधरीं व्यवस्थाएं

क्या है केंद्र सरकार की योजना

केंद्र सरकार ने मातृ और शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए पिछले वर्ष इसकी शुरुआत की थी। इसके तहत सभी सरकार अस्पतालों के लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर की व्यवस्थाओं को सुधारते हुए एक निश्चित मापदंड पर लाना है। इसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ ओटी और लेबर रूम में काम करने वाले स्टाफ के तौर-तरीकों में बदलाव भी शामिल है। इस योजना के तहत एनएचएम द्वारा लेबर रूम और ओटी को अपग्रेड करने के लिए पर्याप्त बजट भी प्रदान किया जाता है।


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