परंपरा : हाेली में अर्पित करने के लिए घराें में महिलाओं ने बनाए गाेबर की गुलरिया
इटारसी | हाेली के त्याैहार काे एक दिन शेष है, समिति सदस्य झंड़ा गढ़ाकर सजावट में जुटे हैं। साेमवार की रात हाेली का दहन हाेगा अाैर मंगलवार काे रंग-गुलाल बरसेगा। वहीं महिलाअाें ने हाेली में अर्पित करने के लिए गाेबर की गुलरिया तैयार की हैं। सुदामा नगर बंगलिया में कई परिवार हैं जिनमें हाेली पर गुलरिया बनाने की परंपरा वर्षाे से चली अा रही हैं। शांति बाई अाैर कमला बाई ने बताया गाय का गाेबर लाकर गुलरिया बनाते हैं। गाेबर से छाटे-छाेटे कंडे, चंदा, सूरज, चकरी अादि बनाकर सुतली या रस्सी में पिराे लेते हैं। उन्हाेंने बताया इस तरह के दाे सेट तैयार कर एक सेट हाेली में दहन कर देते हैं अाैर दूसरा सेट घर लाकर अांगन के गेट पर या किसी काेने में टांक देते हैं। एेसी मान्यता है कि इससे भंडार भरा रहता है अाैर घर में सुख शांति के साथ ही सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है। यह परंपरा तीन पीढ़ियाें से चली अा रही है। जिसका निर्वाहन हर वर्ष किया जाता है। हालांकि अब समय में बदलाव हुअा है। लेकिन इसके बाद भी क्षेत्र की अधिकतर महिलाएं हाेली के 8 दिन पूर्व से गुलरिया बनाने का कार्य प्रारंभ कर देती है।