मप्र / अयोध्या में राम मंदिर बन ही जाएगा, अब काशी-मथुरा पर विवाद उपजाने की बजाय हम मॉडल इंडिया पर सोचें, पद्मश्री केके. मोहम्मद

पद्मश्री डॉ. केके मोहम्मद पद्मश्री डॉ. केके मोहम्मद
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  • अयोध्या में बाबरी मस्जिद के पहले राम मंदिर था, यह सिद्ध करने वाले पुरातत्वविद पद्मश्री डॉ. केके मोहम्मद पहुंचे इटारसी

Dainik Bhaskar

Dec 23, 2019, 02:51 PM IST

इटारसी। अयोध्या में मंदिर और मस्जिद का विवाद तो सुलझ गया। राम मंदिर अब बन ही जाएगा। जहां तक काशी और मथुरा का मुद्दा है उस पर 1947 की यथावत स्थिति लागू होनी चाहिए। पुरातत्व अध्ययन में यह बात गलत साबित हुई है कि ताजमहल शिव मंदिर है। अगर हम मंदिर-मस्जिद के मुद्दे में ही पड़े रहेंगे तो अन्य देशों से पीछे रह जाएंगे। हमें मॉडल इंडिया बनाने के बारे में सोचना चाहिए। मैं वो मोहम्मद गौरी या गजनवी नहीं हूं जिन्होंने हिंदुस्तान के मंदिर तोड़े, मैं ऐसा मोहम्मद हूं जो मंदिर जोड़ने का काम करता है। ये कहना है पुरातत्वविद पद्मश्री डॉ. केके मोहम्मद का वे एक दिन के प्रवास पर इटारसी आए थे।

उन्होंने कहा कि राममंदिर की बात करें तो अयोध्या भूमि मसले की पुरातत्व जांच और सर्वे के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तत्कालीन महानिदेशक प्रो. बीबी लाल की अगुवाई वाले दल में मैं भी था। वह 1976-77 की बात थी। तब इस मसले पर कोई विवाद नहीं था। उसी समय हमने यह पता कर लिया था कि बारहवीं शताब्दी के जिन खंभों पर मस्जिद बनी थी, वे मंदिर के थे। खुदाई में ब्रह्मा, विष्णु व अन्य प्रतिमाएं भी मिलीं थीं।


1976-77 में ही मिल गए थे राम मंदिर के प्रमाण, खुदाई में खंभे पर जो आकृतियां मिलीं वे मस्जिदों में नहीं होतीं
1976-77 में ही हमने पता कर लिया था कि बारहवीं शताब्दी के जिन खंभों पर मस्जिद बनी थी, वे मंदिर के थे। खुदाई में ब्रह्मा, विष्णु व अन्य प्रतिमाएं भी मिलीं। सर्प, मगर, श्वान, शूकर जैसे जानवरों की आकृतियां निकलीं जो मस्जिदों में नहीं होतीं। यह बात सरकार ने विवाद होने के डर से तब उजागर नहीं की थी। मैंने 1999 में राम जन्मभूमि के प्रमाण मिलने का बयान दिया जिस पर मचे बबाल से मेरे सस्पेंड होने की नौबत आ गई। मैंने पूरी ईमानदारी से अपनी बात रखी अगर मस्जिद होने का एक भी प्रमाण मिलता तो मैं ऐसा नहीं कहता। देश में पहले जो मंदिर टूटे, उन्हें गलत मानता हूं। अयोध्या में रामजन्म भूमि स्थल पर खुदाई कर उस भूमि पर मंदिर होने के तथ्य और प्रमाण साबित हुए हैं। पुरातत्व सर्वे तथ्यों पर होता है, किसी समुदाय की भावना पर नहीं।

दिल्ली में जब धर्म-संस्कृति का म्यूजियम बनाया, एक मंत्री भी देखने नहीं आया, कुछ लोग विरोध करने जरूर आ गए

  1. दिल्ली में हिंदुस्तानी धर्म व संस्कृति का म्यूजियम इसलिए बनाया कि बाहर के देशों से आने वाले नेता व अन्य लोग कुतुबमीनार, लालकिला व आगरा का ताजमहल देखते जाते थे। जब म्यूजिम बनवाया तो कुछ लोग विरोध करने आ गए। अफसोस की बात है कि बीजेपी सरकार के एक भी मंत्री उस म्यूजियम को देखने नहीं आया।
  2. मोहम्मद ने रविवार को इटारसी में यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव में परदे पर वह तस्वीरें भी दिखाई जब मप्र में पुरातत्व विभाग में रहते हुए ग्वालियर के दस्यु प्रभावित वाले क्षेत्र में बटेश्वर महादेव सहित 60 मंदिरों को भी पुनर्जीवित करने का काम किया जो टूटकर बिखर गए थे। ऐसे ही मंदिरों काे संरक्षित करने का काम उन्होंने दंतेवाड़ा में भी किया।
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