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बारिश के लिए अब नाटक और रामलीला का मंचन कर रहे ग्रामीण

रोजाना किसान और नागरिक गोल डंडार में हाथों में लकड़ी पकड़ कर हर दो नारायण के भजन कर रहे हैं

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2018, 10:50 AM IST
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बैतूल। आम तौर पर रामलीला का मंचन दशहरा के समय होता है, लेकिन बारिश नहीं होने पर लोग गांवों में गोल डंढार के साथ रामलीला और नाटक का मंचन कर रहे हैं। आठनेर के शिव मठ मंदिर के समीप गोल डंढार का आयोजन किया जा रहा है। रोजाना किसान और नागरिक गोल डंडार में हाथों में लकड़ी पकड़ कर हर दो नारायण के भजन पर भगवान इंद्र देवता से भरपूर बारिश की कामना कर रहे हैं।

इस अनूठे आयोजन में किसानों के परिवार रात 9 बजे से 12 बजे तक.चौरासी माता के पूजन पाठ कर गोल डंढार का आयोजन शुरू किया जाता है। छह दिनों से रोजाना गोल डंडार हो रही है। अब गोल डंडार में नाटक और रामलीला का मंचन भी किया जा रहा है। रोजाना रात में गोल डंडार स्थल पर खुले आसमान के नीचे रामलीला में सीता हरण, अंगद रावण संवाद , और अन्य प्रसंगों का मंचन किया जा रहा है। नाटक भी हो रहे है। इसमें हास्य व्यंग्य का भी पुट मिला रहता है। लड्डू कनाठे, आशीष बर्डे ने बताया कि आयोजन में लोग बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं।

बारिश को लेकर टोटका : बारिश के लिए टोटके भी अपनाए जा रहे हैं। क्षेत्र में 18 दिनों से बारिश नहीं हुई है। बारिश के दो माह में अभी तक 358 मिमी बारिश रिकार्ड हुई है। बोई फसले. सूखने की कगार पर है। नदी, नाले सूखे हैं। सावन माह.भी सूखा जा रहा है। किसान मानसून की बेरूखी से हताश होकर भगवान की पूजा पाठ में जुटे हैं। महिलाओं ने भी बारिश के लिए भजन-कीर्तन से भगवान की आराधना शुरू कर दी है। बोई फसलों की रक्षा के लिए किसान परिवार सहित आसमान की तरफ देखकर बारिश बरसाने बादलों की रास्ता देख रहे हैं। बारिश के लिए तरह- तरह के उपाय कर रहे है।अभी फसलों को पानी की सख्त जरूरत है।

45 हजार हेक्टेयर में फसल- ब्लॉक की अधिकांश आबादी खेती पर निर्भर है और व्यापार भी अच्छी उपज पर ही चलता है। बारिश नहीं होने से किसान मजदूर व्यापारी सभी चिंतित है।ब्लाक में इस वर्ष 46 हजार हेक्टेयर मे खरीफ की फसल बोयी है।इसमे 30 हजार हेक्टेयर मे सोयाबीन का रकबा है।

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