बैतूल / बनारस के संत नारायण दास ने 44 डिग्री तापमान में खौलते दूध से किया स्नान



बैतूल में संत ने दिखाए हैरतंगेज करतब। बैतूल में संत ने दिखाए हैरतंगेज करतब।
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बैतूल में संत ने दिखाए हैरतंगेज करतब।बैतूल में संत ने दिखाए हैरतंगेज करतब।

  • कुंड में कपूर जलाकर अग्नि से किया स्नान, कढ़ाई से हाथों से निकाली पूड़ी 
  • चिचोली के खाक चौक आश्रम में चल रही रामकथा के समापन पर की विशेष क्रियाएं, एक घंटे की आध्यात्मिक पूजा 

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2019, 02:35 PM IST

चिचोली (बैतूल). जिले के चिचोली के खाक चौक आश्रम में एक सप्ताह से जारी राम कथा के समापन अवसर पर बनारस से आए संत नारायण दास ने कपूर पर दूध डालकर अग्नि प्रज्वलित की, 44 डिग्री तापमान में खौलते दूध से स्नान किया, तेल की गर्म कढ़ाई से अपने हाथों से पूड़ी निकाली एवं जलते हवन कुंड मे अग्नि से स्नान किया। 

 

यह नजारा जिसने देखा वह दंग रह गया। रामकथा में शामिल हुए साधु-संतों ने राम कथा के दौरान कठिन से कठिन कार्य को भीषण गर्मी में अपने ध्यान और तप के बल पर बड़ी ही सहजता से किया।  भीषण गर्मी में कंडों में आग लगाकर संतों ने यज्ञ स्थल पर घंटों साधना की। खाक चौक आश्रम के बाबा जयरामदास त्यागी के नेतृत्व में हुए इस धार्मिक आयोजन में उत्तरप्रदेश, गुजरात सहित अन्य प्रदेशों से साधु-संत शामिल हुए। 

 

दोपहर के 12 बजे 44 डिग्री तापमान के बीच उत्तर प्रदेश के काशी सूरताश केशेवर महादेव आश्रम के संत नारायण दास ने अपनी आध्यात्मिक पूजा की शुरुआत करते हुए चारों दिशाओं में धर्म ध्वजा स्थापित कर अपनी चौकी स्थापित की। साथ ही अपनी आराध्य विमला देवी को स्थापित कर हाथ में कपूर थाल लेकर दूसरे हाथ से कपूर पर दूध डाला। 

 

दूध डालते ही आग प्रज्वलित हुई। एक घंटे तक आध्यात्मिक पूजा के इस क्रम में संत ने कंडों पर रखे दूध से भरे तीन मटकों में उबल रहे दूध में हाथ डालकर खोलते दूध से स्नान किया। साथ ही खोलते तेल में कढ़ाई से पूडिय़ां हाथों से निकालकर देवी की चौकी पर चढ़ाई और जलते हवन कुंड में शरीर को डालकर आग से स्नान किया। 

 

कठिन तप से असंभव संभव में बदल जाता है : नारायण दास 
कथा के समापन अवसर पर अपनी आध्यात्मिक पूजा पूरी करने के बाद नारायणदास महाराज ने बताया किसी भी कार्य को करने के लिए कठिन साधना की आवश्यकता होती है। तप और ध्यान के माध्यम से ईश्वर के स्वरूप को पहचाना जा सकता है। आध्यात्मिक पूजा के दौरान उन्होंने विमला देवी का ध्यान कर इस कठिन कार्य को बड़ी ही सहजता से किया। 

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