बैतूल / जाॅन के सिग्नल के बाद ही काॅमनवेल्थ गेम्स एक्सप्रेस में होती थी आईजी की एंट्री, 9 साल 10 महीने की सेवा के बाद विदाई

बैतूल आरपीएफ में 9 साल 10 महीने सेवा देने के बाद सोमवार को रिटायर हो गया। बैतूल आरपीएफ में 9 साल 10 महीने सेवा देने के बाद सोमवार को रिटायर हो गया।
स्निफर डॉग अपने हैंडलर के साथ। स्निफर डॉग अपने हैंडलर के साथ।
Sniffer Dog John retires after serving 9 years 10 months; Farewell due to ill two months ago
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बैतूल आरपीएफ में 9 साल 10 महीने सेवा देने के बाद सोमवार को रिटायर हो गया।बैतूल आरपीएफ में 9 साल 10 महीने सेवा देने के बाद सोमवार को रिटायर हो गया।
स्निफर डॉग अपने हैंडलर के साथ।स्निफर डॉग अपने हैंडलर के साथ।
Sniffer Dog John retires after serving 9 years 10 months; Farewell due to ill two months ago

  • स्निफर डॉग जॉन हुआ रिटायर, तबियत खराब होने पर 2 महीने पहले ही कर दी गई विदाई 
  • रिटायर होने पर हैंडलर अपने खर्च पर रखने को तैयार, सेवा के दौरान कई अवार्ड और सराहना पा चुका है जॉन
  • स्निफर डॉग जॉन 2015 में रेलमंत्री की परेड में शामिल हो चुका है 

दैनिक भास्कर

Aug 12, 2019, 08:08 PM IST

बैतूल. आरपीएफ में एसआई जॉन (डॉग) सोमवार को रिटायर हो गया। आरपीएफ व रेलकर्मियों ने सोमवार को विदाई समारोह आयोजित किया। जॉन के बिदाई समारोह में पूरा स्टाफ भावुक हो गया। जॉन जब सिर्फ 2 महीने का था, तब से आरपीएफ बैतूल के साथ है। इसीलिए स्टाफ के सभी सदस्यों को बच्चे की तरह लगाव हो गया था।

 

डॉग जॉन ने 9 साल 10 महीने तक सेवा दी। अनफिट होने के कारण दो माह पहले रिटायर कर दिया गया। 6 माह पहले आरपीएफ डॉग टाइगर भी रिटायर हुआ था। जॉन को नागपुर के एक एनजीओ को सौंप दिया गया है। उसके बिदाई समारोह में स्टेशन प्रबंधक वीके पालीवाल, आरपीएफ थाना प्रभारी विजय हड़के, एसएम एके कटारे सहित आरपीएफ व रेलकर्मी मौजूद थे।

 

यह भी थी जॉन की खूबी- जॉन के हैंडलर एएसआई पीएस सल्लाम ने बताया दिल्ली में 18 सितंबर से 31 अक्टूबर 2010 तक कॉमनवेल्थ गेम्स में आए खिलाड़ियों एवं अधिकारियों को आगरा घूमने के लिए रेलवे कॉमनवेल्थ गेम्स एक्सप्रेस चला रही थी। इस ट्रेन की सुरक्षा के लिए जॉन के साथ बैतूल के एएसआई पीएस सल्लाम, सीटी कपिल देव झरबड़े की ड्यूटी लगाई गई थी। खिलाड़ी व आईजी तक बिना जॉन की हरीझंडी के ट्रेन में प्रवेश नहीं कर सकते थे। 

 

जॉन को देखकर स्टेशन से भाग जाते थे बदमाश- जॉन का बैतूल से लेकर दिल्ली तक दबदबा था। जॉन आरपीएफ का एक जांबाज़ सिपाही था। उसने इलाहाबाद कुंभ से लेकर दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स तक में अपनी क्षमता का लोहा मनवाया था। जब जॉन स्टेशन पर राउंड पर निकलता था तो इसे आता देख बड़े से बड़े बदमाश भी दबे पांव वहां से भाग जाते थे। आरपीएफ के बम निरोधक दस्ते में शामिल था। जॉन ने बैतूल स्टेशन पर दो बार 21 किलो गांजा पकड़ा। तीन बार रेलमंत्री के परेड में शामिल हो चुका है। जॉन को बेहतरीन सेवा के लिए सम्मान व रिवार्ड मिला है।

 

मैं जॉन को अपने खर्च पर पालने को तैयार हूं- जॉन के हेडलर एएसआई पीएस सल्लाम ने कहा कि जॉन से एक अपनों जैसा लगाव हो गया है। जॉन मेरी हर बात मानता है। मैं उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर जॉन को अपने पास रखने की मांग करूंगा। जॉन को मैं जब तक जीवित हूं। अपने खर्च पर पालने को तैयार हूं।

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