होशंगाबाद / बांद्राभान में तवा ब्रिज के नीचे मरी मिलीं हजाराें मछलियां, तवा नदी में जहर डालने की आशंका



Thousands of fish found dead under Tawa Bridge in Bandra Bhavan, feared to poison the river Tawa
Thousands of fish found dead under Tawa Bridge in Bandra Bhavan, feared to poison the river Tawa
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Thousands of fish found dead under Tawa Bridge in Bandra Bhavan, feared to poison the river Tawa
Thousands of fish found dead under Tawa Bridge in Bandra Bhavan, feared to poison the river Tawa

  • तवा नदी में इतनी मछलियाें के एक साथ मरने की पहली बार घटना
  • 15 जून से प्रशासन ने लगाई है मछलियों को मारने पर राेक 

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2019, 01:40 PM IST

होशंगाबाद. बांद्राभान में सांगाखेड़ा राेड पर तवा ब्रिज के नीचे शुक्रवार काे हजाराें मछलियां तवा नदी किनारे मरी मिली। छाेटी-बड़ी हजाराें मछलियाें के मृत मिलने से प्रशासन और मत्स्य विभाग में हडकंप है। बारिश में मछली मारने पर राेक लगी है। आशंका है कि शिकारियाें ने पानी में जहर डालकर मछलियां मारी हाें। मत्स्य विभाग पानी की जांच करने की बात कह रहा है। प्रशासन और मत्स्य विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही तथ्य सामने आएंगे। 

 

तवा नदी किनारे सुबह मछलियाें के मरे हाेने की जानकारी लाेगाें काे लगी। युवा महेंद्र पचलानिया काे मछलियां मृत दिखीं ताे उन्हाेंने लाेगाें काे इसकी जानकारी दी। तवा नदी किनारे पहली बार इतनी बड़ी संख्या में मछलियाें के मरने की घटना हुई है। तहसीलदार शैलेंद्र बड़ाेनिया ने बताया मत्स्य विभाग काे इस संबंध में जानकारी दी है।


इधर मत्स्य अधिकारी एके दांगीवाल ने बताया इतनी मछलियां क्याें और कैसे मरी इसकी जांच की जा रही है। यदि किसी ने पानी में जहर डाला है ताे इसकी भी पानी की जांच से साफ हाे जाएगा। मामले की जांच हाे रही है। 

 

प्रशासन के सामने चुनाैती बने मछलियों के शिकारी 
प्रशासन ने 15 जून से मछलियाें के शिकार पर राेक लगाई है। इसके बाद इतनी बड़ी संख्या में मछलियाें के मरने की घटना हुई। अभी भी आए दिन नर्मदा और तवा नदी किनारे लाेग मछली मार रहे हैं। मत्स्य विभाग उन्हें पकड़ता नहीं है। 


शिकार की आशंका इसलिए 
आशंका है कि किसी ने जाल बिछाया हाे और वहां पानी में जहर भी डाल दिया हाे। जहां मछलियां मृत मिलीं वहां का पानी काफी बदबूदार और काला था। नर्मदा-तवा में राेहू, कतला, महाशीर, समल, बाम, पड़न, बेकड़ी, ननेन, काराेट, सूजा, गेगरा प्रजाति की मछलियां हैं।

 

बाजार में धड़ल्ले से बिक रहीं मछलियां 
बारिश में मछलियाें का प्रजननकाल हाेता है। इस कारण मछलियाें काे मारने और बिक्री पर राेक रहती है। मछलियां महंगी भी बिकती है। अभी भी शहर में राेज जगह-जगह मछलियाें की दुकानें लग रही हैं। प्रशासन और मत्स्य विभाग कार्रवाई नहीं करता है। नारायण नगर पुलिया, ओवर ब्रिज के पास बंगाली काॅलाेनी, सब्जी मंडी क्षेत्र सहित अन्य जगह धड़ल्ले से मछलियां बिक रही हैं। 


शिकार होने या ऑक्सीजन की कमी हो सकता कारण 

 

इतनी बड़ी संख्या में मछलियाें के अचानक मरने के तीन प्रमुख कारण हाेते हैं। पहला यह कि पानी में जहरीला लिक्वड मिलाया जाता है, ताे मछली मर जाती हैं। वहीं कई बार पानी इतना मटमैला हाे जाता है कि उसमें ऑक्सीजन कम हाे जाती है। इससे भी मछलियाें काे पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है। इससे भी उनकी माैत हाेती है। इसके अलावा अचानक किनारे से पानी हाेने से ऐसी घटनाएं हाेती हैं। 

आईबी अवस्थी, पर्यावरणविद् 
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