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किशोरी से ज्यादती करने वाले 23 साल के युवक को आखिरी सांस तक कैद

अभियोजन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक नीरज सक्सेना ने की।

Dainik Bhaskar

Jan 01, 2018, 07:05 AM IST
23-year-old man imprisoned till last breath

रतलाम. 14 वर्षीय लड़की से ज्यादती करने वाले 23 वर्षीय युवक को एट्रोसिटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश दीपक गुप्ता ने जीवन पर्यंत कैद की सजा सुनाई। फैसले में लिखा जहां नारी को देवी की तरह पूजा जाता है वहीं लड़कियां अपने ही घर में सुरक्षित नहीं हैं। अपराध से सामाजिक दुष्प्रभाव को देखते हुए न्यूनतम दंड न्यायोचित नहीं है। अभियोजन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक नीरज सक्सेना ने की।

अभियोजन के अनुसार लड़की के माता-पिता उज्जैन में मजदूरी करते हैं। छोटे भाई-बहनों को वह घर में संभालती है। पड़ोस में रहने वाले ताऊ परिवार की देखरेख करते हैं। 11 अप्रैल 2016 की शाम करीब 7 बजे लड़की भाई-बहनों के लिए भोजन बना रही थी। रामपुरिया निवासी सद्दाम पिता नसीर खां (23) अपने 17 वर्षीय दोस्त के साथ घर में घुसा। सद्दाम ने लड़की का हाथ पकड़ा और घर से बाहर ले जाने लगा। लड़की चिल्लाई तो उसने मुंह दबा दिया। लड़की को उठाकर दोनों खाल के पास ले गए और दोनों ने ज्यादती की।

जान से मारने की धमकी देकर भाग गए थे आरोपी
ज्यादती के बाद आरोपी लड़की को घर पर किसी को भी बताने और थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने पर जान से मारने की धमकी देकर भाग गए थे। लड़की ने घर लौटकर ताऊ को घटना की जानकारी दी। ताऊ ने उज्जैन जाकर माता-पिता को बताया और दोनों को रतलाम लाया। माता-पिता के साथ दीनदयाल नगर थाने में जाकर लड़की ने रिपोर्ट दर्ज कराई। सब इंस्पेक्टर धीरेश धारवाल ने 15 अप्रैल को आरोपी सद्दाम और साथी बाल अपचारी को गिरफ्तार किया। आरोपी सद्दाम के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट मामलों के विशेष न्यायालय में तथा बाल अपचारी के खिलाफ बाल न्यायालय में चालान पेश किया।

अजा/अजजा अत्याचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश गुप्ता ने अभियुक्त सद्दाम को घर में घुसने के आरोप में पांच साल कारावास और पांच हजार रुपए अर्थदंड, अपहरण के आरोप में पांच साल कारावास और पांच हजार रुपए अर्थदंड, एट्रोसिटी एक्ट में आजीवन कारावास और 15 हजार रुपए अर्थदंड, ज्यादती के आरोप में अभियुक्त के शेष प्राकृत जीवनकाल तक कारावास एवं 15 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया। अपील अवधि के पश्चात पीड़िता को अर्थदंड की राशि में से 30 हजार रुपए प्रतिकर के रूप में अदा करने के आदेश न्यायाधीश गुप्ता ने दिए।

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