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मास्टर प्लान में 300 एकड़ जमीन गलत जगह रिजर्व, रेलवे ने कहा- नहीं बन सकता स्टेशन

300 एकड़ जमीन अधिग्रहण के लिए प्रदेश सरकार को कम से कम 600 करोड़ से ज्यादा खर्च करने होंगे।

Danik Bhaskar | Jan 06, 2018, 01:38 AM IST

कबीरखेेड़ी. 30 लाख की आबादी पार कर चुके शहर के बीच बने पुराने स्टेशन का विकल्प बनाने की योजना दो दशक पुरानी है। एमआर-10 पर ब्रिज के पास कुमेडी गांव में भी 300 एकड़ जमीन स्टेशन के लिए आरक्षित की गई है। जमीन समतल तो है, पर रेलवे ने अपने खर्च से स्टेशन बनाने से दो टूक मना करते हुए कहा कि जमीन का अधिग्रहण मप्र सरकार करें। 300 एकड़ जमीन अधिग्रहण के लिए प्रदेश सरकार को कम से कम 600 करोड़ से ज्यादा खर्च करने होंगे।

दो नए रेलवे स्टेशन :
सुपर कारीडोर ब्रिज के पास लिंबोदा गारी और एमआर-10 पर नए रेलवे स्टेशन के लिए 300 एकड़ जमीन मास्टर प्लान में आरक्षित है।

रेलवे ने कहा अार्थिक दृष्टि से भी यह स्टेशन फिजिबल नहीं
लिंबोदा गारी में 300 एकड़ आरक्षित जमीन का रेलवे अधिकारियों ने परीक्षण किया तो पाया कि इंदौर-रतलाम ट्रैक पर स्थित जमीन पर करीब 5 मीटर ढलान है। किसी भी रेलवे स्टेशन के लिए पहली शर्त है, समतल जमीन है। रेलवे ने यह भी कहा कि आर्थिक दृष्टि से भी यह स्टेशन फिज़िबल नहीं। रेलवे का कहना था कि एमआर-10 पर जो दूसरा स्टेशन प्रस्तावित है, एक नया ट्रक डाल कर रतलाम लाइन को देवास उज्जैन लाइन से जोड़ देंगे।

कुमेड़ी के नए स्टेशन के लिए भी रेलवे मुफ्त में मांग रहा जमीन
रेलवे स्टेशन के अलावा मास्टर प्लान में चिह्नित कई जमीनंे ऐसी हैं, जिनका प्रस्तावित उपयोग नहीं हो रहा। अगला मास्टर प्लान आने तक यहां कोई दूसरा विकास भी नहीं हो सकता। 1975 के बाद नया मास्टर प्लान 2008 में आया जो 2021 तक के लिए था, यानी यह तय है कि 2021 तक यह अनुपयोगी जमीन मुक्त नहीं हो सकेगी। संशोधित मास्टर प्लान के बाद ही कोई और उपयोग हो सकेगा।

साल 1991 में आने वाला मास्टर प्लान 17 साल देरी से 2008 में आया। इसमें भीमंडी से लेकर रेलवे स्टेशन तक जमीन आरक्षित करते वक्त संबंधित विभागों से सलाह ही नहीं ली गई। नतीजा यह हुआ कि इंदौर में हजारों एकड़ जमीन आरक्षित तो कर दी गई, लेकिन संबंधित विभाग उनका उपयोग करने से मना कर रहे हैं।

ऐसा ही मामला इंदौर के मास्टर प्लान में में प्रस्तावित दो नए रेलवे स्टेशन का है।
इंदौर में नए रेलवे स्टेशन के लिए सुपर कॉरिडोर पर लिंबोदा गारी गांव में 300 एकड़ जगह आरक्षित की थी। मगर रेलवे ने उस जगह को तकनीकी रूप से अनुपयोगी बताकर नया रेलवे स्टेशन बनाने से साफ मना कर दिया है। वहीं एमआर-10 पर कुमेड़ी में 300 एकड़ जमीन नए रेलवे स्टेशन के लिए आरक्षित की गई थी। इसमें भी रेलवे का यह कहना है वह रेलवे स्टेशन तभी बनाएगा, जब मध्यप्रदेश सरकार उसे जमीन खरीद कर दे।