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भगवा हुआ रतलाम, 1700 लोगों ने 800 से ज्यादा वाहनों पर सवार होकर निकाली साफा रैली

आजादी देने के साथ अग्रेजों ने एक नाजायज संतान के रूप में शैतान पैदा कर दिया, जिसका नाम पाकिस्तान है।

Dainik Bhaskar

Feb 12, 2018, 06:03 AM IST
50 thousand people reached the Hindu Samarata Sammelan

बड़वानी। जब हम गुलाम थे, तब सब एक होकर रहते थे। आजादी भी हमें एकजुटता से मिली लेकिन आजादी देने के साथ अग्रेजों ने एक नाजायज संतान के रूप में शैतान पैदा कर दिया, जिसका नाम पाकिस्तान है। अब ये हमारे ऊपर ही पत्थर फेंकता है लेकिन इसका मुंह तोड़ जबाव हम देंगे और एक होकर उन लोगों को उखाड़ फेंकेंगे जो हमें तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। अयोध्या में राम मंदिर भी बनेगा और दूसरा शैतान चीन के कब्जे से कैलाश मान सरोवर को अपना बनाएंगे। ये बात हिंदू समरसता सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय कार्यकारिणी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के इंद्रेश कुमार ने कही।


जानकारी के अनुसार हिंदुओं में एकजुटता लाने के उद्देश्य से एसबीएन पीजी कॉलेज ग्राउंड पर रविवार को हिंदू समरसता सम्मेलन का आयोजन किया गया। सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चले कार्यक्रम के दौरान महामंडलेश्वर और संतों ने हिंदू समाज का इतिहास बताया। कार्यक्रम में जिले के 716 गांवों से 50 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे। मंच पर सभी हिंदू समाजों के प्रमुख मौजूद रहे। साथ मंत्री अंतरसिंह आर्य, सांसद सुभाष पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। ग्राउंड पर प्रदर्शनी लगाई गई। इसके माध्यम से बताया कि किस तरह से वनवासी क्षेत्रों में प्रकृति का पूजन किया जाता है।


10 पीढ़ी पहले सबके पूर्वजों के नाम रामलाल व श्यामलाल थे
मुख्य वक्ता ने भारत के इतिहास को बताते हुए कहा कि 10 पीढ़ी पहले सभी के पूर्वजों के नाम रामलाल और श्यामलाल थे। अब कुछ शैतान है जो जबरन धर्म परिवर्तन करा रहे हैं। ऐसे शैतानों को रोकना होगा। उन्होंने बताया प्रकृति का नाम है ईश्वर और ईश्वर का दूसरा नाम है भगवान, जो भूमि, गगन, वायु और नीर से मिलकर बना है, जिसे हम प्रकृति कहते हैं। उन्होंने नशा मुक्ति को लेकर भी लोगों को जागरूक किया।


पीजी कॉलेज मैदान पर हिंदू समरसता सम्मेलन हुआ। दावा है कि इसमें 50 हजार से ज्यादा लोग व प्रतिनिधि और संत शामिल हुए। कार्यक्रम करीब पांच घंटे तक चला।
ये बोले वक्ता- कार्यक्रम की शुरुआत में महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 सुरेशानंद सरस्वती बोले- प्रकृति की पूजा करना हमारी परंपरा है। हमारे देश में अनादिकाल से प्रकृति और मूर्ति पूजा होती आ रही है, क्योंकि प्रकृति से ही हमें जरुरत की सभी चीजें मिलती है। इसलिए प्रकृति हमारी भगवान है। गायत्री शक्ति पीठ के डोमानिया बाबा ने निमाड़ी बोली में एकजुट रहने की बात कही। अखिलेश्वरी दीदी ने भगवान की कथाओं के उदाहरण देकर लोगों को एकजुट रहने की बात कही। पहारसिंह महाराज ने भी हिंदू समाज की परंपरा को बताया। महामंडलेश्वर स्वामी रामानंद पुरी ने बताया ईश्वर का भजन करने के लिए जात न ही कुल की जरुरत है। इसके लिए तो आत्मीय भाव होना चाहिए। जब तक ओम में बिंदू है, तब तक हिंदू है। जिस तरह से चीटियों का झुंड एक साथ चलता है, उसी तरह से हमें एक होना होगा। अंत में मुख्य वक्ता ने उद्बोधन दिया।
आयोजकों का दावा
50 हजार से ज्यादा लोग हुए शामिल।
50 से ज्यादा संत, समाज प्रमुख शामिल
05 हजार कार्यकर्ता व्यवस्थाओं में लगे रहे।
05 घंटे चला कार्यक्रम।
716 गांवों से पहुंचे लोग।
03 एलईडी लगाई ग्राउंड पर।
13 स्थानों पर खड़े हुए वाहन।
कार्यक्रम एक नजर में - व्यवस्था : सुबह से ही कार्यकर्ता व्यवस्थाओं में लग गए थे। लोगों को आयोजन स्थल तक पहुंचने में मदद की। तीन एलईडी लगाई थी, जिनके माध्यम से लोग मंच पर बैठे अतिथियों को नजदीक से देख सके। यातायात : सुबह 10 बजे कारंजा से लेकर अंजड़ नाका तक मार्ग को बंद कर दिया गया। बसों का संचालन बायपास से होकर किया गया। कॉलेज ग्राउंड के पीछे वाली सड़क को भी बंद किया था। शाम 4 बजे बाद दोनों मार्गों को चालू किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम : आदिवासी नृत्य, शिव आराधना सहित अन्य नृत्य की प्रस्तुतियां हुई। इसमें स्कूली बच्चों ने भाग लिया। सम्मान : मंचासीन सभी अतिथियों को भगवा तौलिया और तिलक लगाकर स्वागत किया गया। मुख्य वक्ता का साफा बांधकर और महामंडलेश्वर संतों को तीर कमान देकर सम्मानित किया गया। फूलों की बारिश की गई।

50 thousand people reached the Hindu Samarata Sammelan
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