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आईसीयू में जिंदगी की जंग: बच्चे दर्द से कराहे तो परिवार की आंखों में आई खुशी

खुशी और अरीबा को वेंटीलेटर पर रखा गया है। बच्चियों के सिर से पैर तक सफेद पट्टियां बंधी हैं।

Danik Bhaskar | Jan 08, 2018, 06:54 AM IST

इंदौर. डीपीएस बस हादसे में घायल मासूम अरीबा, खुशी बजाज, पार्थ बाशानी, शिवांग चावला, दैविक वाधवानी, सोमिल आहूजा और कंडक्टर बल्लू कल्याण सिंह अभी भी आईसीयू में हैं। खुशी और अरीबा को वेंटीलेटर पर रखा गया है। बच्चियों के सिर से पैर तक सफेद पट्टियां बंधी हैं। डॉक्टरों के छूते ही बच्चे दर्द से कराहने लगते हैं। आईसीयू के बाहर रिश्तेदार बेचैन हैं। कोई माता-पिता अपने बच्चों को दर्द में नहीं देखना चाहते, लेकिन यहां बच्चे का दर्द माता-पिता को उम्मीद दे रहा है। उनकी उम्मीदें इसी बात पर जिंदा हैं कि कम से कम उनका बच्चा कुछ महसूस तो कर रहा है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार दो दिन में तीन बच्चों को वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा।

खुशी : पूरे शरीर में आई सूजन, आंखें भी धंसीं
- शनिवार रात को खुशी को अचानक ओटी में लेना पड़ा। ऑपरेशन कर ब्लड क्लॉट निकाले गए। हालत ऐसी नहीं है कि उसका किसी भी तरह का ऑपरेशन किया जा सके।

- डॉक्टर्स यही कह रहे हैं कि स्थिति बेहतर है। उसके चेहरे पर कोई हाव-भाव नहीं है। आंखें अंदर धंस गई हैं। उनमें सूजन है।

अरीबा : बेहोश रखना मजबूरी, ताकि दर्द न हो
- अरीबा को कई फ्रैक्चर हैं। डॉक्टरों को ऐसी दवा देना पड़ रही है कि वह होश में नहीं रहे ताकि उसको दर्द महसूस न हो। पूरे शरीर पर प्लास्टर चढ़ाया गया है। आंखें भी नहीं खोल रही है।

- माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं, इसलिए बच्ची की हालत ज्यादा समझ पा रहे हैं। हालत ऐसी नहीं है कि ऑपरेशन किया जाए। उधर, दैविक की सर्जरी के लिए मुंबई से प्लास्टिक सर्जन को बुलवाया गया है।

शिवांग को आरटीई में मिला था प्रवेश ड्राइवर के ठीक पीछे ही बैठा था

- डीपीएस बस हादसे में घायल छात्र शिवांग चावला की अंगुली में फ्रैक्चर हुआ है। कान में चोट लगी है। हैरानी यह है कि वह ड्राइवर के ठीक पीछे की सीट पर बैठा था। बच्चा आर्थिक रूप से भी समृद्ध नहीं है। पिता छोटा-मोटा काम कर गुजारा करते हैं।

- छात्र को डीपीएस में आरटीई के तहत एडमिशन मिला था। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार शिवांग को ज्यादा चोेट नहीं आई है। सोमवार को उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार किसी के इलाज में आर्थिक मामला आड़े नहीं आ रहा है।

- बॉम्बे हॉस्पिटल प्रबंधन ने शुक्रवार को ही बच्चों का इलाज नि:शुल्क करने के निर्देश जारी किए थे। मुख्यमंत्री ने भी घायल बच्चों के इलाज का पूरा खर्च देने की बात कही है।