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DPS बस हादसा: संघर्ष, पुलिस-प्रशासन से सीएम तक को दिखाया गुस्सा

आखिरकार 38 दिन संघर्ष के बाद डीपीएस हादसे में मारे गए बच्चों और पीड़ित परिजन को न्याय मिल सका।

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2018, 05:58 AM IST
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इंदौर. आखिरकार 38 दिन संघर्ष के बाद डीपीएस हादसे में मारे गए बच्चों और पीड़ित परिजन को न्याय मिल सका। सोमवार दोपहर परिजन एक बार फिर न्याय की मांग करने कलेक्टोरेट पहुंचे। कलेक्टर के नहीं मिलने पर उन्होंने नारेबाजी की। एसडीएम और सीएसपी को भी खरी-खरी सुनाई। उधर, शाम होते-होते डीपीएस के प्रिंसिपल सुदर्शन सोनार को गिरफ्तार कर कोर्ट से सीधे जेल भेज दिया गया।

जज से गुहार: सोनार को जमानत दी तो कानून पर कौन भरोसा करेगा : परिजन

- जिला कोर्ट ने प्रिंसिपल सोनार की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि बस हादसे में जिन बच्चों की मौत हुई और घायल हुए, उनके परिजन की आपत्ति है। मजिस्ट्रियल जांच में भी प्राचार्य और स्कूल प्रबंधन पर सहयोग नहीं करने का आरोप परिजन ने लगाया है। इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती।

- सुनवाई के बाद भारी सुरक्षा के बीच पुलिस सोनार को कोर्ट से बाहर लाई। 22 फरवरी तक के लिए सोनार को जेल भेज दिया है। उससे पहले सोनार की जमानत अर्जी पर शाम 5 बजे सुनवाई शुरू हुई, जो साढ़े 6 बजे तक चली। शाम 7 बजे कोर्ट ने फैसला जारी किया। सोनार की ओर से अधिवक्ता गौरव छाबड़ा, जबकि परिजन की ओर से वैभव बंसल ने पैरवी की।

कभी आगे तो कभी हाथ पीछे रख खड़े रहे सोनार
- सख्त मिजाज प्रिंसिपल सोनार का रुख कोर्ट में पेशी के दौरान एकदम नरम था। कठघरे के समीप वह कभी हाथ आगे तो कभी पीछे रख खड़े रहे। वह किसी से भी आंख नहीं मिला पा रहे थे। जैसे ही कोर्ट द्वारा जमानत खारिज किए जाने की जानकारी मिली, उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं।

कलेक्टर को घेरा: डीआईजी ने खुद बुलाया था हमें लेकिन कोई अफसर नहीं आया

पालक : शनिवार को डीआईजी ने खुद यहां बुलाया था कि वे और आप हमसे बात करेंगे। अभी तक कोई अधिकारी नहीं आया।
कलेक्टर : उन्हें नहीं पता था कि आज आप यहां आने वाले हैं।
पालक : मजिस्ट्रियल जांच में स्कूल प्रबंधन और परिवहन निरीक्षक की गलती सामने आई है, लेकिन पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया।
कलेक्टर : हम पहले चरण में बसों पर कार्रवाई कर रहे हैं। गाइड लाइन भी तय की है और शपथ पत्र भी मांगे हैं।
पालक : परिवहन निरीक्षक रवींद्र ठाकुर को जांच में दोषी माना है, फिर भी वही अधिकारी वाहनों की फिटनेस जांच कर रहा है।
कलेक्टर : आप में से 5-6 लोग मंगलवार को जनसुनवाई के बाद 2 बजे आएं। मैं आपकी हर समस्या का समाधान करूंगा।
पालक : मेरे बेटे को हादसे में सिर में चोट आई थी। एसडीएम शृंगार श्रीवास्तव ने फोन कर तीन बार कहा कि वे बयान लेने घर आ रहे हैं, लेकिन आज तक एसडीएम बयान लेने नहीं आए।
कलेक्टर : मैं इसकी जांच करवाऊंगा।
पालक : (सीएसपी बसंत मिश्रा से) चार मौतें हुई हैं और बिकी हुई पुलिस हत्यारों को बचाने की कोशिश में जुटी है। आप चाहते हैं कि हम विरोध खत्म करें तो डीआईजी को यहां भेजो।

और प्रिंसिपल एकजुट : कुछ ही घंटे में कश्मीर से दक्षिणी राज्यों तक के प्राचार्य आ गए इंदौर

- पुलिस ने धोखे से प्रिंसिपल को थाने बुलाकर गिरफ्तार किया। उन्हें गुंडों के बीच डाल दिया, जबकि हादसे में उनका सीधा कोई दोष नहीं है। जिस ढंग से प्रिंसिपल सोनार को जेल भेजा है, उससे हमने इंदौर के लिए ये काला दिवस घोषित किया है। सोनार की गिरफ्तारी के विरोध में सोमवार रात साढ़े 9 बजे जिला जेल के बाहर एकजुट हुए प्रिंसिपल्स व शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने यह बात कही। मप्र, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और साउथ से कई बड़े स्कूलों के प्रिंसिपल इंदौर पहुंचे।
- सभी ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। कहा कि एक शिक्षक के साथ ऐसे दुर्व्यवहार ठीक नहीं है। कश्मीर से आई पुनीता नेहरू ने कहा हादसे में प्रिंसिपल को आरोपी बनाना गलत है। विद्या सागर के प्रिंसिपल डॉ. डीपी शर्मा ने कहा पूरा शिक्षा जगत पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट है।

- ग्लोबल इंडियन इंटरनेशनल स्कूल की कैप्टन दििनशा ने पुलिस कार्रवाई को हिटलरशाही बताया। मोहित यादव, देहरादून से आए मेडीकेप्स स्कूल के मनोज वाजपेयी, वैष्णव एकेडमी के एचसी तिवारी, पायोनियर कॉन्वेंट की पूनम ठाकुर, सुषमा बड़जात्या, डॉ. संगीता सिन्हा ने भी गिरफ्तारी का विरोध किया।

परिजन का आरोप सोनार को अफसर जैसा रखा

- डीपीएस बस हादसे में सोमवार शाम 4 बजे पुलिस ने सुदर्शन सोनार को गिरफ्तार किया। प्रिंसिपल की गिरफ्तारी के बाद पीड़ित परिजन ने आरोप लगाया कि पुलिस सोनार को आरोपी की तरह नहीं बल्कि किसी अधिकारी की तरह विजय नगर थाने ले गई। उन्हें हवालात में रखने के बजाय सीएसपी के कमरे में कुर्सी देकर सम्मान के साथ बैठाया गया। पीने के लिए िमनरल वाटर दिया गया।

सीएसपी का जवाब पानी मांगा, इसलिए पिलाया
- सीएसपी जयंत राठौर के मुताबिक प्रिंसिपल उनकी बेटी को मोबाइल सुधरवाने ले गए थे। हमारे बुलाने पर वे थाने आए और हमने धारा 188 में उन्हें गिरफ्तार किया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी सीबीएसई की गाइड लाइन के अनुरूप कार्य न होने पर दोषी मानते हुए गिरफ्तार किया है। पानी उन्होंने मांगा था, इसलिए पिलाया। कोई वीआईपी सुविधा नहीं दी। पुलिस के वाहन से ही कोर्ट भेजा था।

अरीबा व दैविक अब भी अस्पताल में, क्लीनर की याददाश्त चली गई
- डीपीएस हादसे में घायल अरीबा कुरैशी और दैविक वाधवानी फिलहाल बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती हैं। दोनों के साथ क्लीनर बल्लू को भी सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया जा चुका है लेकिन उसकी याददाश्त चली गई है। दोनों बच्चों को फ्रैक्चर है।

आखिर डेढ़ महीने बाद हमें मिला न्याय

- जिन पालकों ने घटना में अपने मासूमों को खोया, उन्होंने कहा हादसे के डेढ़ महीने बाद अब जाकर हमें ऐसा लगा कि थोड़ा न्याय मिला है। हम लगातार प्राचार्य पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे, लेकिन हमारी सुनवाई नहीं हो रही थी।

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