--Advertisement--

जहां खेलता था मासूम वहीं सजाई गई उसकी अर्थी, मौत से पहले पिता से की ये बात

विदिशा बाइपास पर शुक्रवार को हुए हादसे में चारों बच्चों श्रुति, कृति, स्वास्तिक और हरमीत कौर की एकसाथ अंतिम संस्कार हुआ।

Dainik Bhaskar

Jan 07, 2018, 03:24 AM IST
स्वस्तिक की डेडबॉडी लाए तो सबकी आंखें भर आईं। स्वस्तिक की डेडबॉडी लाए तो सबकी आंखें भर आईं।

इंदौर. विदिशा बाइपास पर शुक्रवार को हुए हादसे में चारों बच्चों श्रुति, कृति, स्वास्तिक और हरमीत कौर की एकसाथ अंतिम संस्कार हुआ। बच्चों की अंतिम यात्रा में मानो पूरा शहर उमड़ पड़ा। हादसे का शिकार हुए स्वास्तिक की अर्थी सजाई जा रही थी तो किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि वो नहीं दिखेगा। मां और बहन तो डेडबॉडी देख रोने लगीं। अपने बेटे को विदा करने मां और बहन आधा किलोमीटर पैदल चलकर विदाई देने पहुंचे। जहां खेलता था वहीं उसकी अर्थी सजाई गई...

- खातीवाला टैंक के श्रीजी टॉवर में स्वस्तिक दोस्तों के साथ जहां खेलता था आज वहीं उसकी अर्थी सजाई जा रही थी। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि स्वस्तिक अब उन्हें कभी खेलता नहीं दिखेगा।

- पिता, स्वस्तिक की डेडबॉडी लाए तो सबकी आंखें भर आईं। मां और बहन फूट-फूटकर रोने लगीं। फिर बेटे का शव अर्थी पर रख पिता हाथ में मटकी लेकर आगे चल रहे थे। घर से करीब आधा किमी दूर तक मां मंजुला और बहन श्रेया, स्वस्तिक को अंतिम विदाई देने पहुंचे।

- मुखाग्नि देने के पहले पिता स्वस्तिक का चेहरा निहारते रहे। जैसे-तैसे खुद को संभाल उन्होंने बेटे को मुखाग्नि दी। रुंधे गले से बोले इस सेशन के बाद परिवार को उनके साथ उड़ीसा ले जाने वाले थे।

- स्वस्तिक रोजाना उनसे वाट्सएप पर बात करता था। हादसे से एक दिन पहले भी बेटे ने वाट्सएप पर बात की थी। वह कम्प्यूटर इंजीनियर बनना चाहता था।

मुखाग्नि देने के पहले पिता स्वस्तिक का चेहरा निहारते रहे मुखाग्नि देने के पहले पिता स्वस्तिक का चेहरा निहारते रहे
घर से करीब आधा किमी दूर तक मां मंजुला और बहन श्रेया, स्वस्तिक को अंतिम विदाई देने पहुंचे। घर से करीब आधा किमी दूर तक मां मंजुला और बहन श्रेया, स्वस्तिक को अंतिम विदाई देने पहुंचे।
पिता इमोशनल होकर बोलते रहे इस सेशन के बाद परिवार को उनके साथ उड़ीसा ले जाने वाले थे। पिता इमोशनल होकर बोलते रहे इस सेशन के बाद परिवार को उनके साथ उड़ीसा ले जाने वाले थे।
X
स्वस्तिक की डेडबॉडी लाए तो सबकी आंखें भर आईं।स्वस्तिक की डेडबॉडी लाए तो सबकी आंखें भर आईं।
मुखाग्नि देने के पहले पिता स्वस्तिक का चेहरा निहारते रहेमुखाग्नि देने के पहले पिता स्वस्तिक का चेहरा निहारते रहे
घर से करीब आधा किमी दूर तक मां मंजुला और बहन श्रेया, स्वस्तिक को अंतिम विदाई देने पहुंचे।घर से करीब आधा किमी दूर तक मां मंजुला और बहन श्रेया, स्वस्तिक को अंतिम विदाई देने पहुंचे।
पिता इमोशनल होकर बोलते रहे इस सेशन के बाद परिवार को उनके साथ उड़ीसा ले जाने वाले थे।पिता इमोशनल होकर बोलते रहे इस सेशन के बाद परिवार को उनके साथ उड़ीसा ले जाने वाले थे।
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..