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इंदौर : इस वजह से ट्रक में टकराई थी स्कूल बस, स्टेयरिंग भी हुआ था फेल

बस ट्रक की भिड़ंत में 4 बच्चों सहित ड्राइवर की हुई मौत।

Dainik Bhaskar

Jan 06, 2018, 07:09 AM IST
स्टेयरिंग हुआ फेल, नहीं संभली बस और ट्रक से जा टकराई स्टेयरिंग हुआ फेल, नहीं संभली बस और ट्रक से जा टकराई

इंदौर. डीपीएस की जिस बस में हादसा हुआ, उसमें स्पीड गवर्नर भी लगा था। यह इसलिए ताकि उसकी स्पीड 40 किमी से ज्यादा नहीं हो। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बस की स्पीड 60 किमी से ज्यादा थी। तेज रफ्तार के कारण ही वह अनियंत्रित होकर दूसरी लेन में ट्रक से जा टकराई।

10 से 12 दिन पहले से मिलने लगते हैं स्टेयरिंग फेल होने के संकेत

ऑटो एक्सपर्ट्स की मानें तो स्टेयरिंग फेल होने के संकेत 10-12 दिन पहले मिलने लगते हैं। ऑटो एक्सपर्ट और महिंद्रा एंड महिंद्रा के डिप्टी जनरल मैनेजर मुकेश कुमार तिवारी ने बताया कि स्टेयरिंग की रॉड (शॉफ्ट) एक गियर बॉक्स से जुड़ी होती है। यह पीनीयन और रैक के माध्यम से टाइ-रॉड से जुड़ती है, जो पहियों को नियंत्रित करने में मदद करता है। शाॅफ्ट का गियर बाॅक्स से कनेक्शन टूटने या पीनीयन का टाइ-रॉड से कनेक्शन टूटने से स्टेयरिंग फेल होता है। स्टेयरिंग दो तरह से फेल होता है। पहले को लीडिंग कहते हैं, जिसमें जितना स्टेयरिंग घुमाया जाता है, उससे ज्यादा पहिए घूमते हैं।

दूसरा लेगिंग है, इसमें जितना स्टेयरिंग घुमाते हैं, पहिए उतने नहीं घूमते। दोनों ही दशा में संकेत 10 से 12 दिन पहले मिलने लगते हैं। इस मामले में ड्राइवर संकेत ना समझ पाया हो या इस ओर ध्यान ना दिया गया हो तो ही ऐसी घटना होती है। स्टेयरिंग फेल होने के समय ड्राइवर को तुरंत एक्सेलरेटर छोड़ते हुए ब्रेक लगाना चाहिए। साथ ही गियर को नीचे की ओर 3 से 2 और 1 की ओर लाते हुए गति को नियंत्रित कर सुरक्षित रूप से पार्क करना चाहिए।

10 दिन पहले फिट घोषित की बस, तब क्यों नहीं देखी स्टेयरिंग में खामी

बस को 10 दिन पहले ही परिवहन विभाग ने फिटनेस टेस्ट में पास करते हुए सर्टिफिकेट जारी किया था। एक्सपर्ट्स की मानें तो स्टेयरिंग फेल होने के संकेत 10 से 12 दिन पहले मिलने लगते हैं तो फिटनेस टेस्ट के दौरान अधिकारियों ने क्या इसे नहीं देखा था या बिना टेस्ट के ही बस को फिटनेस जारी कर दिया था। इस संबंध में आरटीओ ने बताया कि फिट पाए जाने पर ही सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। इस बस के फिटनेस टेस्ट के संबंध में पूरी जानकारी निकाली जा रही है।

रिलेटिव बोले- स्टेयरिंग में खराबी की शिकायत की, लेकिन हुआ कुछ नहीं

दिल्ली पब्लिक स्कूल की बसों के खटारा होने की शिकायत पालक पहले भी कर चुके हैं, लेकिन प्रबंधन ने न बसों में सुधार किया और न पालकों को जवाब देना उचित समझा। एक निजी बैंक के वाइस प्रेसीडेंट अनीश माहेश्वरी ने बताया उनके दो बेटे डीपीएस में सातवीं और तीसरी में पढ़ते हैं। बच्चे बताते थे कि बस अकसर खराब हो जाती है। उसमें शाॅर्ट सर्किट हो जाता है। यहां तक कि स्टेयरिंग निकलकर ड्राइवर के हाथ में आ जाता है। इस पर उन्होंने 15 जुलाई 2016 को स्कूल प्रबंधन को ई-मेल के जरिए शिकायत की थी। यह भी लिखा था कि 20 बच्चों की क्षमता वाली बस में 32 बच्चों को बैठाकर ले जाया जाता है। कई बार शिकायत के लिए फोन करने पर जवाब तक नहीं दिया जाता है। वहीं, स्कूल प्रबंधन लगातार बसों की फीस में बढ़ोतरी कर रहा है। माहेश्वरी ने बताया कि इस ई-मेल का भी स्कूल ने कोई जवाब नहीं दिया। स्कूल प्रबंधन ध्यान दे देता तो ये घटना नहीं होती।

आगे की स्लाइड्स में जानें कि किस कारण टकराई थी स्कूल बस...

कारण-1 कारण-1

1. बस जिस ट्रक से टकराई, वह माल से लोड था। वह भी बस की टक्कर से ब्रिज की बाउंड्रीवाॅल तक घिसट गया। ट्रक नहीं होता तो बस ब्रिज से 13 फीट नीचे जा गिरती।

 

कारण-2 कारण-2

2.  हादसे के बाद कुछ बच्चे घबराहट में बेहोश हो गए थे, कई लोगों ने उन्हें सीने में पंपिंग कर प्राथमिक इलाज दिया तो शिक्षिकाओं ने उनके घाव पर रूमाल लपेट दिया था।

कारण-3 कारण-3

3. कई बच्चे सीटों के बीच में दबे थे। उनके पीछे आ रही स्कूल की दूसरी बस के स्टाफ ने उन्हें निकाला और फुटपाथ पर लिटाकर प्राथमिक इलाज दिया। इस दौरान दूसरी बस के बच्चे साथियों को देखकर घबरा गए।

 

कारण-4 कारण-4

4. ट्रक से भिड़ने के बाद बस का अगला हिस्सा गेट तक क्षतिग्रस्त हो गया। सीटें भी टूटकर एक-दूसरे में घुस गईं। 

कारण-5 कारण-5

5. जिस हिसाब से बस डिवाइडर क्रॉस कर रांग साइड में जाकर ट्रक से टकराई, उससे उसकी रफ्तार 60 से ज्यादा लग रही है।

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