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बदले हुए नाम और फर्जी आईडी से इंदौर में 400 वेबसाइट दे रही एस्कॉर्ट सर्विसेस

साइबर सेल ने दो माह पहले एस्कॉर्ट सर्विस देने वाली तीन वेबसाइट के दलालों को पकड़ा तो इनसे कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

Danik Bhaskar | Jan 03, 2018, 07:40 AM IST

इंदौर. साइबर सेल ने दो माह पहले एस्कॉर्ट सर्विस देने वाली तीन वेबसाइट के दलालों को पकड़ा तो इनसे कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पूछताछ और जांच में यह खुलासा हुआ कि ऐसी ही एस्कॉर्ट सर्विस ऑफर करने वाली 400 से ज्यादा वेबसाइट संचालित हो रही हैं। इनमें इंदौर से जुड़ी 20 से 30 साल की युवतियों के फोटो का इस्तेमाल कर 25000 से ज्यादा का डाटाबेस फीड किया गया है। पुलिस और जांच एजेंसियों के पास इतना फोर्स ही नहीं कि इतने बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध रैकेट पर कार्रवाई हो सके। साइबर सेल का ही दावा है कि इंदौर की लगभग सभी नामी बड़ी होटलों में प्रतिदिन इन्हीं वेबसाइट्स से युवतियां दूसरे शहरों से फ्लाइट्स से आ रही हंै और यहां की युवतियों को ऐसे ही दूसरे शहरों में भेजा जा रहा है।

सेल ने इंदौर पुलिस से शेयर की जानकारी
- साइबर सेल ने ऐसी तीन वेब साइट से जुड़े दो दलाल व वेबसाइट के डिजाइनर को गिरफ्तार किया था। इनमें से मुख्य आरोपी हर्षल ने गहन पूछताछ में बताया था कि उसके द्वारा ऐसी ही सात और वेबसाइट्स का संचालन भी किया जा रहा है।

- साइबर सेल ने एजेंट्स की पूरी जानकारी इंदौर पुलिस से शेयर की ताकि स्थानीय पुलिस कार्रवाई कर सके। पुलिस की कार्रवाई और आईपीसी की धाराओं में आरोपी हाथोहाथ जमानत ले लेते हैं, मगर साइबर सेल द्वारा गिरफ्तार आरोपियों पर आईटी एक्ट की धारा लगी है।

- इसमें 7 साल तक सजा का प्रावधान है। पुलिस द्वारा ऐसी एस्कॉर्ट सर्विस में शामिल रही युवतियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस की यह पहली कार्रवाई है जबकि प्रतिदिन युवतियां ऐसे गिरोह में शामिल होती जा रही हैं।

तीनों एस्कॉर्ट वेबसाइट बंद करवाई
- साइबर सेल द्वारा पकड़ी गई तीनों वेबसाइट को पोर्टल से हटा दिया गया है। इस संबंध में सेल ने वेबसाइट को होस्ट करने वाली कंपनियों को ई-मेल भेजा था। तीनों वेबसाइट का एड भी जिन वेबसाइट पर किया गया था उन्हें भी हटाया गया है। इन वेबसाइट्स पर जिन युवतियों के नंबर जारी किए गए थे, उनसे भी पुलिस की टीम पूछताछ करेगी। कुछ युवतियां तो संभ्रांत घरों की निकली हैं। वहीं किसी ने मंहगे शौक पूरा करने के लिए, तो किसी युवती ने दोस्त के कहने पर यह काम किया।

मोबाइल व फर्जी सिम एजेंट की, पहचान उजागर नहीं

- युवतियों ने बताया एसकॉर्ट सर्विस चलाने वाले गिरोह का टारगेट होस्टलों में रह रही युवतियां और वर्किंग वुमेन हैं। युवतियों को परिवर्तित नाम से भेजा जाता है। इतना ही नहीं मोबाइल और सिम भी एजेंट का रहता है। काम होने के बाद युवतियां मोबाइल लौटा देती हैं। एजेंट फर्जी नाम-पते से ली गई सिम से ऑपरेट करते हैं। युवतियों का सिर्फ फोटो पहले क्लाइंट को भेजा जाता है उसके बाद रेट फिक्स हो जाता है।

पत्नी को कॉल गर्ल और एजेंट पति को बता दिया
- अलग-अलग नामों से 400 से ज्यादा वेबसाइट्स शहर में एस्कॉर्ट सर्विस ऑफर कर रही हैं। 25 हजार से ज्यादा मॉडल्स और युवतियों के फोटो डिस्प्ले कर रखे हैं। इनमें कई फोटो फर्जी हैं। इसका खुलासा जांच में ही हुआ, जब पुलिस ने युवतियों को कॉल किया। पता चला यह फोटो उनके द्वारा पोस्ट नहीं किए गए, जिसकी शिकायत भी क्राइम ब्रांच में हुई। एक व्यक्ति की प्रोफाइल तो ऐसी निकली जिसमें पति के नाम से एजेंट बनाकर उसी के द्वारा पत्नी से एसकॉर्ट सर्विस करवाने का विज्ञापन दिया गया। जांच में सब फर्जी निकला। लोगों को झांसे में लेने के लिए ऐसी तरह के अलग-अलग हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।

होटलों की जानकारी में चलती है सर्विस
एजेंट्स ने एक और खुलासा में यह भी बताया कि दूसरे शहरों व प्रदेशों के एजेंट्स ने अपने-अपने 40 से ज्यादा वाट्सएप ग्रुप बना रखे हैं। इनमें क्लाइंट व सर्विस प्रोवाइडर के ग्रुप अलग-अलग हैं। ग्रुप पर हर 2-3 घंटे या 24 घंटे में डीपी बदल दी जाती है। यह डीपी युवतियों की ही होती हैं। क्लाइंट यदि दूसरे शहर में जाते हैं तो एजेंट बड़ी होटलों में कमरे बुक कर देते हैं। होटलों की भी जानकारी में होता है कि कमरे किस उद्देश्य से बुक किए जा रहे हैं, लेकिन रोज मिलने वाले बिजनेस के लालच में वे भी आंख मूंदे रहते हैं।

पुलिस को सौंपी सक्रिय एजेंट्स की सूची
एस्कॉर्ट सर्विस चलाने वाले एजेंट्स वे ही लोग हैं, जो देह व्यापार मामलों में किसी न किसी थाने में पकड़े जा चुके हैं। साइबर सेल को जांच में ऐसे कई एजेंट्स के नाम भी मिले हैं। इसकी पूरी जानकारी इंदौर पुलिस को सौंपी है। इससे पहले क्राइम ब्रांच ने भी स्पा सेंटर की आड़ में देह व्यापार के अड्‌डों पर छापे मारे थे। अब नए सिरे से कार्रवाई प्लान की जा रही है।

सोशल मीडिया बना पब्लिसिटी टूल
एसपी साइबर सेल जितेंद्र सिंह ने बताया एस्कॉर्ट सर्विस द्वारा सोशल मीडिया को पब्लिसिटी का टूल बनाया गया है। ऑन लाइन किए जा रहे अनैतिक क्रिया-कलापों पर सेल की निगाह है और कार्रवाई लगातार चलती रहेगी। जांच में काफी इनपुट इंदौर पुलिस को भी दिया है।