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50 से ज्यादा विषयों में फेल, कुछ ने परीक्षा नहीं दी, एनआईएलयू ने कर दिया पास

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ लॉ यूनिवर्सिटी में हुआ फर्जी डिग्री घोटाला भास्कर के शुरुआती खुलासे से बड़ा होता नजर आया।

Bhaskar News | Last Modified - Feb 08, 2018, 07:08 AM IST

50 से ज्यादा विषयों में फेल, कुछ ने परीक्षा नहीं दी, एनआईएलयू ने कर दिया पास

इंदौर.नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ लॉ यूनिवर्सिटी (एनआईएलयू) में हुआ फर्जी डिग्री घोटाला भास्कर के शुरुआती खुलासे से बड़ा होता नजर आ रहा है। यूनिवर्सिटी के विजिटर सुप्रीम कोर्ट जस्टिस शरद बोबडे को अप्रैल 2017 में फेल छात्रों को भी डिग्री दिए जाने की शिकायत की गई थी। इस पर गठित कमेटी द्वारा जांच में अब तक 17 छात्रों के खिलाफ शिकायतें सही पाई जा चुकी हैं। कई छात्र तो ऐसे हैं जो अलग-अलग ट्राइमेस्टर के 50 से ज्यादा विषयों में फेल हैं। इन छात्रों की रिजल्ट शीट में व्हाइटनर लगाकर फेल विषयों में नंबर बढ़ाए गए। जो परीक्षा में भी नहीं बैठे, उन्हें भी पास दिखाकर डिग्री बांट दी गई। विश्वविद्यालय के सूत्रों के मुताबिक यदि पूरे रिकॉर्ड को जब्त कर किसी सक्षम एजेंसी से जांच हो तो यह देश के किसी भी राष्ट्रीय विधि संस्थान का सबसे बड़ा घोटाला निकलेगा।

प्रभारी परीक्षा रजिस्ट्रार ने नहीं दिया पूरा रिकॉर्ड, निलंबित किए गए
- विश्वविद्यालय की आंतरिक कमेटी की रिपोर्ट से यह भी सामने आया है कि कमेटी द्वारा बार-बार मांगे जाने के बावजूद उन्हें प्रभारी परीक्षा रजिस्ट्रार रंजीत सिंह द्वारा सभी छात्रों के पूरे रिकॉर्ड मुहैया नहीं करवाए गए। रंजीत सिंह फिलहाल निलंबित हैं। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अभय गोहिल भी पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। उनकी रिपोर्ट आ जाने के बाद ही छात्रों के खिलाफ और विश्वविद्यालय के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

85 से ज्यादा पेपर का उठाते हैं फायदा
ट्राइमेस्टर सिस्टम वाले 5 वर्षीय बीए एलएलबी के कोर्स में 15 ट्राइमेस्टर के 85 से ज्यादा पेपर होते हैं। कोर्स अवधि न्यूनतम 5 व अधिकतम 8 वर्ष होती है। कई छात्र सप्लीमेंट्री एग्जाम भी नहीं निकाल पाते। उन्हें ‘एक्स स्टूडेंट’ श्रेणी में मौका मिलता है। लोगों ने इसी दौरान नंबरों में हेरफेर कर गड़बड़ी की। रिवैल्यूएशन के नाम पर भी नंबर बढ़ाने की शिकायतें हैं।

व्हाइटनर लगाकर फेल को कर देते थे पास
- रिजल्ट के चार्ट और लिस्ट में अलग-अलग नंबर दर्ज ।
- लिस्ट में कई जगह व्हाइटनर लगाकर नंबर बढ़ाए गए।
- जिन 17 की जांच हुई उनमें से कई के एक्स स्टूडेंट कैटेगरी के रूप में परीक्षा में बैठने का रिकॉर्ड नहीं मिला। सीधे कंप्यूटर में नंबर फीड कर पास कर दिया।
- टेबुलेशन चार्ट पर 4 लोगों के हस्ताक्षर होते हैं। कई टेबुलेशन चार्ट में किसी के हस्ताक्षर नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के ‌‌निर्देश पर हुई जांच
- एनआईएलयू के विजिटर जस्टिस बोबड़े को दिल्ली के अविनाश शर्मा ने 17 छात्रों की फर्जी डिग्री की शिकायत की थी। उनके निर्देश पर िववि की जांच में शिकायत सही पाई गईं। इसके बाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अभय गोहिल को जांच का जिम्मा सौंपा गया है।

2015 बैच : फेल छात्र बने जज
- मुनांशु कोष्टी - 7 प्रश्न पत्रों में फेल हुए। परीक्षा में बैठने का रिकॉर्ड नहीं। डिग्री मिल चुकी।
- हिमांशु राय- एक विषय में फेल, डिग्री भी मिली और हाई कोर्ट जबलपुर में नौकरी भी। भास्कर के खुलासे के बाद इस्तीफा दे दिया।
- अभ्युदय स्टैनली- 12 विषयों में फेल, पर डिग्री मिली। वकालत की। सनद भी।
- हेमंत शर्मा- पूरे विषयों में फेल पर डिग्री मिली। राजस्थान बार काउंसिल से सनद भी मिली।
- भानु पंडवार- परिणाम फेल या संदिग्ध। 2015 में सिविल जज के लिए चयनित। छिंदवाड़ा में पदस्थापना। खुलासे के बाद इस्तीफा।

2013 बैच : रिकॉर्ड ही नहीं मिला
-‌ सचिन नायक- 8 पेपर में फेल व 15 के परिणाम संदिग्ध, 26 परीक्षाओं और डिग्री देने का रिकॉर्ड नहीं, लेकिन बार काउंसिल में रजिस्टर्ड और भोपाल में प्रैक्टिस।
- अजय रावत- 98 पेपर में 50 में पास। 10 में फेल, 10 परिणाम संदिग्ध। 28 परिणामों पर निष्कर्ष नहीं। बाद में मिली डिग्री।
- अभिषेक मीणा- 98 प्रश्न पत्रों में से 75 में पास 4 मैसेज और 12 परिणाम संदिग्ध। परीक्षा में बैठने का भी रिकॉर्ड नहीं। छठवें में दीक्षांत समारोह में मिली डिग्री।

2014 बैच : फेल को भी डिग्री
- सौरभ अहिरवार- पांच विषयों में फेल या संदिग्ध परिणाम कुछ में अनुपस्थित होने के बावजूद पास, डिग्री भी मिली।
- आरंभ शर्मा- 90 में से 15 प्रश्न पत्रों में फेल। पूरा रिकॉर्ड भी नहीं मिला। डिग्री दीक्षांत समारोह के बाद मिली।
- अमन सूलिया - इंदौर के अमन को 13 विषयों में फेल होने के बावजूद ना सिर्फ डिग्री मिली बल्कि सिविल जज के लिए भी चुन लिया गए। अभी ट्रेनिंग ही चल रही थी कि भास्कर ने खुलासा कर दिया। इन्हें फेसबुक पर अब्राहम फ्रेंक्लिन नाम से ढूंढ़ा जा सकता है।

2012 बैच : फिर भी सनद
- कमल सिंह- यह 98 में से 54 परीक्षाओं में फेल हुए। बार काउंसिल में रजिस्टर्ड, डिग्री भी मिल गई।
- सिद्धार्थ शर्मा- तीन परीक्षाओं में फेल। गोकलेश मीणा- 86 प्रश्न पत्रों में पास 6 में फेल और 5 के परिणाम संदिग्ध। दीक्षांत समारोह में मिली डिग्री।
- सिद्धार्थ बांके- एक प्रश्न पत्र में फेल थे। दो परिणाम संदिग्ध पाए गए।
- सौरभ कुमार- 19 प्रश्न पत्र में फेल।
- 13 के परिणाम भी संदिग्ध मिले।

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Web Title: 50 se jyada visyon mein fel, kuchh ne pariksaa nahi di, enaaeeelyu ne kar diyaa pass
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