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फसल को सीधे कंपनियों को बेच रहे किसान, वैज्ञानिक बोले- एक बार लगाओ, 4 साल कमाओ

इलाके के किसान अब एलोवेरा की खेती से खुद उन्नति करेंगे। साथ ही लोगों की सेहत सुधारेंगे।

Bhaskar News | Last Modified - Feb 13, 2018, 06:34 AM IST

फसल को सीधे कंपनियों को बेच रहे किसान, वैज्ञानिक बोले- एक बार लगाओ, 4 साल कमाओ

जावरा (इंदौर). इलाके के किसान अब एलोवेरा की खेती से खुद उन्नति करेंगे। साथ ही लोगों की सेहत सुधारेंगे। यह फसल ऐसी है जिसे सामान्य खेतों के साथ ही अनुपयोगी पड़ी भूमि या खेत की मेढ़ों पर भी लगा सकते है। एक बार फसल लगाने के बाद चार से पांच साल तक इससे मुनाफा ले सकते है। इसके फायदे देखते हुए क्षेत्र के कई किसानों ने एलोवेरा की फसल लगा दी है।


- केरवासा गांव में कृषि मंडी उपाध्यक्ष हंसराजसिंह राठौर के बेटे लोकेंद्रसिंह राठौर ने एलोवेरा की खेती शुरू की है। अभी एक बीघे में एलोवेरा के 4500 पौधे लगाए है। प्रत्येक पौधा दो फीट की दूरी पर लगता है। सिंचाई साधन होने पर फरवरी माह में इन पौधों की बुआई अच्छी रहती है।

- वैसे इस खेती को किसी भी सीजन में शुरू किया जा सकता है। इंदौर में प्राइवेट जॉब छोड़कर गांव में खेेती शुरू करने वाले युवा कृषक लोकेंद्रसिंह राठौर ने बताया एलोवेरा पौधे लगाने के 8 से 10 महीने में पत्तियों की पहली कटाई आ जाती है। फिर हर चार महीने में कटाई कर इसे बेच सकते है।

- चार साल तक इसी तरह उत्पादन ले सकते है। पास के ही गांव बड़ायला चौरासी में सालभर सेे खेती कर रहे किसान श्याम धाकड़, भंवरलाल कसानिया व मनोहरलाल सोलंकी बताते है कि माह में दोे बार सिंचाई की जरूरत पड़ती है। ड्रिप सिंचाई ज्यादा कारगार होती है।

- इस खेती में जैविक व गोबर खाद का इस्तेमाल होता है। रासायनिक दवाइयों का छिड़काव नहीं कर सकते है। एलोवेरा सामान्यत: दो प्रकार के होते है। कड़वा एलोवेरा मेडिसिन बनाने में तथा मीठा एलोवेरा खाने या ज्यूस के रूप में उपयोग में लिया जाता है। दोनों ही औषधीय उपयोग की प्रजातियां है।

एलोवेरा की फसल के लिए मार्केट उपलब्ध करवा रही कई कंपनियां
- किसानों ने इंटरनेट के जरिए इंदौर की प्राइवेट कंपनी से संपर्क किया। ऐसी कई कंपनियां है जो एलोवेरा की खेती के लिए किसानों से अनुबंध करती है। वे पौधे उपलब्ध करवाने के बाद खेत पहुंचकर उपज की खरीदी भी करती है।

- ये कंपनियां किसानों को एलोवेरा के लिए मार्केट उपलब्ध करवा रही है। इसके अलावा किसान सरकारी उद्यानिकी विभाग या अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि कॉलेज में संपर्क कर इस खेती के बारे में जानकारी ले सकते है। किसान चाहे तो सीधे आयुर्वेद या अन्य हर्बल प्रोडक्ट बनाने वाली अन्य कंपनियों को भी चुन सकते है।

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