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आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी तो छोड़ी पढ़ाई, अब बनीं कुश्ती की स्टेट प्लेयर

कौन कहता है कि कड़े संघर्षों में जिंदगी में मुकाम हासिल नहीं किया जाता है। इसी का ताजा उदाहरण है 14 साल की ये बच्ची।

Danik Bhaskar | Jan 29, 2018, 02:26 AM IST

उज्जैन (इंदौर). कौन कहता है कि कड़े संघर्षों में जिंदगी में मुकाम हासिल नहीं किया जाता है। इसी का ताजा उदाहरण है 14 साल की ये बच्ची। जिसने गरीबी के आगे अपने सपनों को मिटने नहीं दिया। परिवार की आर्थिक स्थिती ठीक नहीं होने के बाद भी उसने परिवार का खर्च चलाने के लिए घर घर जाकर झाड़ू- बर्तन किए। वहीं बचे समय में कुश्ती के लिए अपने आप को तैयार किया। आज ये बच्ची स्टेट प्लेयर बन गई। क्या है मामला...

- दरअसल, 14 साल की नंदिनी तिवारी ने जिंदगी का असली दंगल जीता है। कुश्ती के मैदान पर भी और मैदान से बाहर भी।

- एक साल पहले परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर उन्हें पढ़ाई छोड़ना पड़ी। वह मां आरती तिवारी के साथ दूसरों के घर में झाडू और बर्तन साफ करने पड़े।

- वह जिला खेल अधिकारी रुबिका देवान के घर भी काम करने जाती थीं। उनकी खेल में रुचि को देखते हुए खेल अधिकारी ने उनकी डाइट का खर्च खुद उठाया।

- आर्थिक मदद की तो एक साल में ही नंदिनी कुश्ती खिलाड़ी बन गई। हाल ही में उन्होंने संभागीय कुश्ती चैंपियनशिप में मेडल जीता। नंदिनी स्टेट चैंपियनशिप में शामिल हो गई।

खेल अधिकारी ने बदल दी जिंदगी

- नंदिनी के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से वो पढ़ाई छोड़ मां की मदद करने लगी थी। इस बात का जब खेल अधिकारी को पता चला तो उन्होंने न केवल उसकी पढ़ाई वापस शुरू कराई बल्कि पढ़ाई सहित उसकी डाइट और अन्य खर्चे भी उठाना शुरू किया।

- एक साल की मेहनत में नंदिनी कुश्ती खिलाड़ी के रूप में उभरी आैर चैंपियनशिप में पदक जीता। नंदिनी की मां आरती तिवारी खेल अधिकारी सहित अन्य लोगों के घर पर काम कर परिवार का पालन पोषण करती हैं। पिता से विवाद के चलते वे लोग नानी के घर के पास किराए से रहते हैं। अब नंदिनी पढ़ाई भी करती है और अपने वजन वर्ग में उज्जैन जिले की कुश्ती टीम में शामिल है।