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यहां दहकते अंगारे पर नंगे पैर चलती हैं लड़कियां, ये है इसके पीछे सदियों पुरानी मान्यता

गड्ढे में भरे अंगारों पर नंगे पैर चले, सदियों से चली आ रही ये मान्यता।

Dainik Bhaskar

Mar 04, 2018, 02:05 AM IST
अंगारों पर चलकर बच्चे की मान उतारता पिता और अंगारों पर चलती हुई लड़की । अंगारों पर चलकर बच्चे की मान उतारता पिता और अंगारों पर चलती हुई लड़की ।

झाबुआ. मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के पास होली पर कुछ अजीब रस्में निभाई जाती हैं। इस में एक रस्म में करीब 30 फीट ऊंचे गल (लकड़ी की चौकी पर ) पर कमर के बल झूलते हुए देवता के नाम के नारे लगाए जाते हैं तो एक ओर दहकते अंगारों पर चलकर श्रद्धालुओं ने अपनी मन्नत उतारते हैं। इस कार्यक्रम में आसपास के जिलों से भी लोग शाामिल होते हैंए। धुलेंडी पर बिलीडोज गांव में गल पर्व के दौरान यह नजारा देखने को मिला। दो दर्जन से अधिक ग्रामीण यहां अपनी मन्नतपूरी करने पहुंचे थे। किसी के यहां गल देवता की मन्नत के बाद संतान हुई थी तो कोई बीमारी से ठीक हुआ था।

गड्ढे में भरे अंगारों पर नंगे पैर चले

- धुलेंडी पर पेटलावद, करड़ावद, बावड़ी, करवड़, अनंतखेड़ी, टेमरिया आदि स्थानों पर गल-चूल पर्व पारंपरिक रूप से मनाया गया।

- ग्रामीण मन्नतधारियों ने दहकते अंगारों से भरे गड्ढे के बीच नंगे पैर गुजरते हुए अपनी मन्नत पूरी की। साथ ही अपने आराध्य भगवान को शीश झुकाया।

- आस्था के इस अनूठे आयोजन को देखने के लिए न केवल स्थानीय बल्कि पड़ोसी रतलाम व धार जिले के ग्रामीण भी बड़ी तादाद में पहुंचे।

क्या है चूल परंपरा

- करीब तीन-चार फूट लंबे तथा एक फीट गहरे गड्ढ़े में दहकते हुए अंगारे रखे जाते हैं।

- माता के प्रकोप से बचने और अपनी मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु माता का स्मरण करते हुए जलती हुई आग में से निकल जाते हैं।

दशकों से निभाई जा रही परंपरा

- इस पौराणिक परंपरा को निभाने का क्रम दशकों से चला आ रहा है।

- चूल वाले स्थान में अंगारों के रूप लगाई जाने वाली लकड़ियां और मन्नतधारी के आगे-आगे डाले जाने वाला घी गांव के अनेक घरों से श्रद्धानुरूप आता है।

- इस बार करीब 25 किलो घी की आहुति चूल में दी गई।

हवा में झूलते हुए 5 से 7 परिक्रमा करते हैं

- मान्यता है कि मन्नत विवाहित व्यक्ति ही उतार सकता है, इसलिए बहुत से मन्नतधारियों के परिजन ने इस परंपरा का निर्वहन किया। तड़वी ने मन्नतधारियों को गल पर घूमाया।

- शहर से लगे ग्राम बिलीडोज में हर साल परंपरागत रूप से मनाते हैं गल पर्व। इस दौरान यहां मेले जैसा माहौल हो जाता है।

- आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं।

- मन्नतधारी को कमर के बल रस्सी से बांधा जाता है। फिर मन्नत के अनुसार वह गल देवरा की जय करते हुए हवा में झूलते हुए 5 से 7 परिक्रमा करता है।

महिला भी साड़ी पहनकर अंगारों पर चली। महिला भी साड़ी पहनकर अंगारों पर चली।
इस गड्डे में जलाए जाते हैं अंगारे। इस गड्डे में जलाए जाते हैं अंगारे।
लोगों के मुताबिक वे यहां मन्नत उतारने अंगारे पर चलते हैं। लोगों के मुताबिक वे यहां मन्नत उतारने अंगारे पर चलते हैं।
30 फीट ऊंचे मचान पर कमर के बल झूले। 30 फीट ऊंचे मचान पर कमर के बल झूले।
बच्चे को कंधे पर बैठा आग पर चलता पिता। बच्चे को कंधे पर बैठा आग पर चलता पिता।
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अंगारों पर चलकर बच्चे की मान उतारता पिता और अंगारों पर चलती हुई लड़की ।अंगारों पर चलकर बच्चे की मान उतारता पिता और अंगारों पर चलती हुई लड़की ।
महिला भी साड़ी पहनकर अंगारों पर चली।महिला भी साड़ी पहनकर अंगारों पर चली।
इस गड्डे में जलाए जाते हैं अंगारे।इस गड्डे में जलाए जाते हैं अंगारे।
लोगों के मुताबिक वे यहां मन्नत उतारने अंगारे पर चलते हैं।लोगों के मुताबिक वे यहां मन्नत उतारने अंगारे पर चलते हैं।
30 फीट ऊंचे मचान पर कमर के बल झूले।30 फीट ऊंचे मचान पर कमर के बल झूले।
बच्चे को कंधे पर बैठा आग पर चलता पिता।बच्चे को कंधे पर बैठा आग पर चलता पिता।
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