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सरकार कहे तो गांव में भी फ्री प्रस्तुति देने को तैयार, लेकिन हमें बुलाया ही नहीं जाता

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरोद के सुरों से लोगों का दिल जीतने वाले उस्ताद अमजद अली खान अपने ही आंगन में भुला दिए हैं।

Danik Bhaskar | Dec 13, 2017, 07:31 AM IST

उज्जैन (इंदौर). अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरोद के सुरों से लोगों का दिल जीतने वाले उस्ताद अमजद अली खान अपने ही आंगन में भुला दिए हैं। गंगाघाट पर एक कार्यक्रम में शामिल होने आए उस्ताद ने खुद स्वीकार किया कि प्रदेश सरकार कहे तो किसी गांव में भी नि:शुल्क प्रस्तुति देने को तैयार हैं लेकिन उन्हें बुलाया ही नहीं जा रहा है। सरकार आमंत्रण तो दें। हम विदेशी कार्यक्रम छोड़कर आएंगे। देश-विदेश से ढेरों आमंत्रण मिलते हैं लेकिन खुद के प्रदेश में उन्हें सेवा का माैका नहीं दिया जा रहा है।

- ग्वालियर में जन्म होने से उनका मप्र से गहरा लगाव है। वे इस संबंध में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से चर्चा भी करेंगे। बेटे अमान-अयान और पत्नी शुभलक्ष्मी के साथ उन्होंने पत्रकारवार्ता में अपने मन की बात कही। मंगलवार को वे यहां एक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने परिवार सहित आए थे।

खान बहुत हैं, इसलिए बंगश रखा सरनेम
- उस्ताद ने कहा- जब अमान, अयान पैदा हुए तो मैंने सोचा, देश में खान बहुत हैं। इन्हें खान सरनेम नहीं देना चाहिए।

- सोच-विचार के बाद अपने घराने बंगश का नाम इन्हें सरनेम के रूप में दिया। तब से वे इसी नाम से जाने जाते हैं।

भगवान-अल्लाह बेहरा नहीं, वे हृदय की आवाज सुनते हैं
- लाउड स्पीकर लगा देने से भगवान या अल्लाह खुश होंगे, ये सोच ही गलत है। उस्ताद का मानना है कि भगवान-अल्लाह बेहरा नहीं है, वे हृदय की आवाज सुनते हैं। फिर भी कुछ बजाएं तो केवल घर तक सीमित रहे।

हम फकीर हैं, हमें हर समय आशीर्वाद की जरूरत
महाकालेश्वर दर्शन पर पूछे एक सवाल पर उस्ताद ने कहा-हम फकीर हैं, हमें हर समय आशीर्वाद की जरूरत होती है। मैं पहले भी महाकालेश्वर दर्शन के लिए आ चुका हूं। यहां आने से बड़ा सुकून मिलता है।