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‘गवर्नर लगा है, 70 की स्पीड कैसे हो गई’ 9 विभागों से 4 हफ्ते में हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

डीपीएस बस हादसे में बच्चों की मौत को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने स्कूल प्रबंधन, आरटीओ सहित नौ को नोटिस दिया

Dainik Bhaskar

Jan 10, 2018, 06:25 AM IST
Governor has felt, how the speed  been answered

इंदौर . डीपीएस बस हादसे में बच्चों की मौत को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने स्कूल प्रबंधन, आरटीओ सहित नौ को नोटिस दिया है। इन्हें चार सप्ताह में जवाब में बताना है कि जब स्पीड गवर्नर लगा था तो बस 70 से ज्यादा की गति से कैसे चल रही थी? बस को फिटनेस सर्टिफिकेट कैसे जारी किया गया? मंगलवार को जस्टिस पीके जायसवाल, जस्टिस वीरेंदर सिंह की डिविजन बेंच के समक्ष इस याचिका की सुनवाई हुई।

- याचिकाकर्ता प्रमोद द्विवेदी की ओर से अधिवक्ता मनीष यादव ने पैरवी की। याचिका में उल्लेख किया है कि पांच साल से ज्यादा पुरानी बस को स्कूल बस के रूप में नहीं चलाया जाए। इनकी अधिकतम गति 40 से ज्यादा न हो।

- ड्राइवर के कैबिन में बच्चों को बैठाना प्रतिबंधित हो। सभी सीटों पर बेल्ट अनिवार्य किया जाए। बस को फिटनेस सर्टिफिकेट आरटीओ कार्यालय ने जारी किया था। वहीं स्पीड गवर्नर लगाने के लिए भी आरटीओ ने ही कंपनी निर्धारित की थी। इनके खिलाफ भी आपराधिक केस दर्ज किया जाए। स्कूल, आरटीओ के अलावा सीबीएसई, मानव संसाधन मंत्रालय, कलेक्टर, संभागायुक्त, जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य को जवाब पेश करना है।

एक और याचिका में आरटीओ, स्कूल प्रबंधन पर केस दर्ज करने की मांग
- इस घटना की न्यायिक जांच कराने के लिए एक याचिका अधिवक्ता सौरभ मिश्रा ने हाई कोर्ट में पेश कर दी है। इसमें कहा है कि स्कूलों में बरसों पुरानी बसें चल रही हैं। फर्जी तरीके से फिटनेस हासिल कर बच्चों की जान से खेला जा रहा है। इसमें भी स्कूल प्रबंधन, आरटीओ के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने की मांग की गई है।

बस बनाने वाली कंपनी ही स्पीड गवर्नर लगाकर दे : परिवहन मंत्री

- बस हादसे के बाद राज्य सरकार सभी स्कूल बसों की गति को नियंत्रित करने जा रही है। अब कोई भी स्कूल बस 40 किमी प्रतिघंटा से तेज नहीं चल पाएगी। यदि कोई बस ऐसा करती पाई जाती है तो स्कूल संचालकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

- 15 साल पुरानी कोई भी बस (स्कूल व यात्री) मार्च के बाद नहीं चल पाएगी। उन्हें न फिटनेस जारी होंगे और न ही परमिट। स्पीड गवर्नर को लेकर भूपेंद्र सिंह ने कहा कि 2017 के बाद वाहन निर्माता कंपनियां खुद स्पीड गवर्नर लगाकर दे रही हैं। उनसे राज्य सरकार बात करेगी कि 2017 से पहले की बसों पर भी वही कंपनी स्पीड गवर्नर, जीपीएस व सीसीटीवी लगाए।


- मार्च के बाद यदि कोई भी 15 वर्ष पुरानी गाड़ी पकड़ी जाती है तो अफसर भी कार्रवाई के दायरे में आएगा। परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने मंगलवार को सुशासन स्कूल में प्रदेश के सभी आरटीओ की बैठक में यह निर्देश दिए।

- परिवहन मंत्री ने बताया कि इन सभी प्रावधानों को लेकर मुख्यमंत्री ने सहमति दे दी है। इस दिशा में भी काम शुरू हो गया है कि स्कूलों को मान्यता देते समय बसों के साथ एग्रीमेंट की शर्त रखी जाएगी, ताकि बसों की फिटनेस और परमिट में गड़बड़ी पाई जाती है तो स्कूलों पर कार्रवाई की जा सके।

- जब स्कूलों की मान्यता देते समय जगह व अन्य चीजों को देखा जाता है तो फिर बसों के एग्रीमेंट को भी अनिवार्य किया जाए। अन्यथा मान्यता न दी जाए। अभी हादसा होता है तो स्कूल वाले पल्ला झाड़ लेते हैं कि फंला बस उनकी नहीं है। ऑटो को लेकर परिवहन मंत्री ने कहा कि इन्हें बंद नहीं किया जा सकता, क्योंकि 50 फीसदी स्कूल ऐसी गलियों में जहां बसें नहीं जा सकती।


नेताओं की गाड़ियों में भी स्पीड गवर्नर लगें
- परिवहन मंत्री ने इस बात पर सहमति जताई कि स्कूल बसों व यात्री बसों के साथ-साथ नेताओं की गाड़ियों में भी स्पीड गवर्नर लगने चाहिए। जब से सड़कें अच्छी बनी हैं, वाहनों की रफ्तार तेज हो गई है। ऐसे में हादसों से बचाव गति नियंत्रण से ही होगा।

झाबुआ आरटीओ पर बिफरे मंत्री
- बैठक के दौरान झाबुआ आरटीओ राजेश गुप्ता ने कहा कि स्कूलों में एडमिशन के दौरान यह तय कर दिया जाए कि 2 से 3 किमी के आसपास के ही बच्चों को एडमिशन दें। इस पर परिवहन मंत्री बिफर गए। कहा- यह अव्यावहारिक सुझाव है।

बस में बच्चे सुरक्षित हैं, इसका शपथ पत्र दें सभी स्कूल : इंदौर कलेक्टर

- बसों में बच्चों की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन सभी संचालकों को करना होगा। इसके लिए संचालकों को शपथ पत्र देना होगा। प्रशासन ने इसका प्रारूप बनाया है, जो एक-दो दिन में सभी को दे दिया जाएगा। इसके बाद भी कोई बस सड़क पर नियम तोड़ती मिली तो उस पर इतने नियम लगा दूंगा कि वह कबाड़ होने तक नहीं छूट पाएगी।

- यह चेतावनी मंगलवार को कलेक्टर निशांत वरवड़े ने स्कूल संचालकों की बैठक में दी। उन्होंने कहा कि कोई जिम्मेदारी से नहीं बचता। न कलेक्टर, न एसपी, न आरटीओ, लेकिन स्कूल बस की सुरक्षा के लिए पहली जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन और प्रिंसिपल की है। उन्हें हर हाल में सुरक्षा के लिए बनी गाइडलाइन का पालन करना है।

- कलेक्टर ने संचालकों से कहा कि ऐसी घटना अब नहीं हो, इसके लिए किसी भी तरह का इनकार और बहाना नहीं सुनना है। इसके लिए जितनी सख्ती हो सकती है, वह की जाएगी। गाइडलाइन का पालन करने के अलावा स्कूल प्रबंधन के पास दूसरा विकल्प नहीं है। वह सीधे नहीं मानेंगे तो धारा 144 लगाकर पालन करवाएंगे।

- कलेक्टोरेट सभाकक्ष में हुई बैठक में 150 से ज्यादा स्कूल संचालक और उनके प्रतिनिधि के साथ अपर कलेक्टर कैलाश वानखेड़े, एडीएम अजयदेव शर्मा, एसपी युसुफ कुरैशी, एएसपी ट्रैफिक प्रदीप चौहान व अन्य उपस्थित थे।


जागरूक इंदौर पोर्टल से जुड़ेंगी स्कूल बसें, आज होगी बैठक
- सभी स्कूल संचालकों को अपनी बस का जीपीएस और सीसीटीवी कैमरों का डाटा जागरूक इंदौर पोर्टल से लिंक करना है। इससे कोई भी बस ज्यादा तेज चलेगी या नियम तोड़ेगी तो इसका अलर्ट तीन सेकंड में ट्रैफिक पुलिस, प्रशासन, पुलिस के साथ बस में बैठे बच्चों के पालकों के पास पहुंच जाएगा।

- संचालकों को अपने ड्राइवर, कंडक्टर की भी सारी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करना होगी। इस संबंध में बुधवार सुबह 11 बजे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के तक्षशिला परिसर स्थित ऑडिटोरियम में एक बार फिर सभी स्कूल संचालकों को बुलाया है। इसमें उन्हें पोर्टल के बारे में जानकारी दी जाएगी।

8 लाख का यह स्पीड राडार ने संदूक से निकलवाया, 1 साल से बंद था

- पुलिस महकमे ने ओवर स्पीडिंग चालान बनाने के लिए 8 लाख रुपए में यह स्पीड राडार खरीदा था। सालभर से यह राडार बॉक्स में ही धूल खाता रहा और रखे-रखे ही खराब हो गया। अफसरों को भी नहीं पता कि इसे इस्तेमाल में क्यों नहीं लाया गया। स्कूल बसों की स्पीड पर इस राडार के जरिए नजर रखी जाती तो स्थिति कुछ और हो सकती थी। -पढ़ें भास्कर विशेष पेज 4 पर

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