--Advertisement--

पहले कहा- मायकेवालों ने मेरे दुपट्टे से पति का गला घोंटा, अब खुद सवालों के घेरे में

पुलिस ने जिन पांच लोगों को हत्या का आरोप लगाया था उन्हें कोर्ट ने रिहा तो कर दिया।

Danik Bhaskar | Dec 19, 2017, 04:18 AM IST
हेमंत डोंगरे ऑनर किलिंग मामले में पत्नी अर्चना ने अपने बयान बदल लिए हैं। हेमंत डोंगरे ऑनर किलिंग मामले में पत्नी अर्चना ने अपने बयान बदल लिए हैं।

इंदौर.  हेमेंद्र डोंगरे ऑनर किलिंग केस में पुलिस ने जिन पांच लोगों को हत्या का आरोप लगाया था उन्हें कोर्ट ने रिहा तो कर दिया। वहीं, हेमंत की पत्नी  और उसके चाचा के खिलाफ बयान पलटने पर पक्षद्रोह केस चलाने की बात कही है। इस मामले में 19 गवाह थे,जिनमें डॉक्टर और पुलिस सहित, 10 सरकारी और बाकि इंडिपेंडेंट गवाह थे। ट्रायल के दौरान सभी नौ गवाह अपने अपने बयान से पलट गए।  अर्चना ने अपने पहले बयान कहे थे कि मायकेवालों ने पति को पीटा, फिर मेरे दुपट्‌टे से गला घोंटा दिया। इसके बाद उसने बयान पलट दिए, बाद में बोली- रास्ते में बाइक सवारों  ने टक्कर के बाद पीटा, इससे मौत हो गई। जज ने सभी आरोपियों को किया बरी...

 

 

 - फैसला जज पंकज सिंह माहेश्वरी ने सोमवार शाम 4.45 बजे सुनाया। श्रद्धाश्री कॉलोनी के रहने वाले,  हेमेंद्र डोंगरे और गंगादेवी नगर  की रहने वाली अर्चना आरोलिया ने लव मैरिज की थी।

- एफआईआर के मुताबिक, 29 अगस्त 2015 को रक्षाबंधन के दिन अर्चना के मायके वालों ने उसे राखी बांधने बुलाया था। वह रात नौ बजे हेमेंद्र, पति की भांजियों दीपशिखा और युक्ता नकवाल के साथ रात नौ बजे मायके पहुंची थी।

- उनके वहां पहुंचते ही मायकेवालों ने हेमेंद्र और अर्चना पर हमला कर दिया। अर्चना के दुपट्टे से हेमेंद्र का गला कस दिया। हेमेंद्र की मौके पर ही मौत और अर्चना घायल हो गई थी। बाद में वहां पहुंचे हेमेंद्र के चाचा मुकेश डोंगरे ने रात 1.25 बजे विजय नगर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी।

- पुलिस ने अर्चना के पिता परसराम उर्फ पारस आरोलिया, मां विमला, चाचा गरसिंह, ताऊ के पुत्र शैलेंद्रसिंह व हरिसिंह उर्फ हरीश पर हेमेंद्र की हत्या और अर्चना के साथ मारपीट करने, हत्या के प्रयास का केस दर्ज कर उन्हें अरेस्ट किया था। परसराम और चाचा गरसिंह जेल में और विमला, शैलेंद्र सिंह, हरीसिंह जमानत पर बाहर थे। 

 

उम्र कैद तक का प्रावधान

अर्चना और मुकेश डोंगरे के बयान बदलने पर कोर्ट ने धारा 193 व 194 के तहत जेएमएफसी कोर्ट में पक्षद्रोही का केस चलाने के आदेश दिए। पक्षद्रोही के मामले में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान हैै।

 

 

बहन और चाचा ने भी बदल दिए थे बयान

 

अर्चना डोंगरे (मृतक की पत्नी) :

- घटना वाले दिन चीख-चीखकर माता-पिता और अन्य पर हत्या का आरोप लगाया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष 22 सितंबर 2015 को धारा 164 के तहत दिए गए बयान में भी यही बात कही थी। ट्रायल कोर्ट में उसका पलट जाना पांचों के बरी होने का प्रमुख कारण बना, जबकि कोर्ट ने भी इस केस को अॉनर किलिंग से संबंधित होकर चिह्नित केस माना।

 

पहले

- रक्षाबंधन के दिन मैं राखी बांधने के लिए पति के साथ गंगादेवी नगर स्थित मायके गई थी। वहां मेरे सामने माता-पिता, भाई सहित मायके वालों ने पति को जमकर पीटा और मेरे दुपट्टे से उनका गला घोंट दिया था। 

 

 

बाद में 

 

 

- पति की हत्या मेरे माता-पिता व मायके वालों ने नहीं की थी। मैं पति के साथ बाइक से घूमने गई थी। तब एक बाइक ने हमें टक्कर मार दी थी। इस पर विवाद हुआ और टक्कर मारने वालों ने हमारे साथ मारपीट की थी। चोट लगने से पति की मौत हो गई, जबकि मैं घायल हो गई थी। 

 

 

मुकेश डोंगरे (मृतक के चाचा)

 हत्या के बाद उन्हीं ने नामजद एफआईआर करवाई थी, लेकिन जब ट्रायल में गवाही हुई तो वह भी बयान से पलट गए कि गला दबाने से हत्या हुई। उन्होंने इस बात से भी इनकार कर दिया कि वह एफआईआर लिखवाने गए थे।

 

 

पहले

- अर्चना-हेमेंद्र के प्रेम विवाह से अर्चना के परिजन नाराज थे। अर्चना सालभर से मायके नहीं जा रही थी। अर्चना को भाई ने रक्षाबंधन के दिन 29 अगस्त 2015 को राखी बांधने बुलाया था। शाम साढ़े सात-आठ बजे के बीच वह पहुंची तो परिजन ने अर्चना के गले से दुपट्टा निकालकर हेमेंद्र का गला घोंट दिया जिससे वहीं पर उसकी मौत हो गई। बीच-बचाव में अर्चना भी घायल होकर बेहोश हो गई थी।

 

 

बाद में 

 

एक्सीडेंट की सूचना मिलने पर हम घटनास्थल पर पहुंचे तो हेमेंद्र और अर्चना सड़क पर बेहोश मिली थी। दोनों को अस्पताल ले गए, जहां हेमेंद्र को डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बाद में उन्हें अर्चना ने बताया था कि टक्कर मारने वालों ने उनके साथ मारपीट की थी।

 

कृतिका डोंगेरे  (मृतक की बहन) : ये प्रमुख गवाह थी, किंतु उसने भी बयान बदल दिए थे।

 

 

...लेकिन ये डटे रहे, पर बयान काम नहीं आए 

 

 

- आरक्षक राकेश पाठक और ओमप्रकाश कुंभकार घटना के कुछ देर बाद घटना स्थल पर पहुंचे थे। अर्चना के साथ गई दीपशिखा और युक्ता ने पांचों  की ओर इशारा करते हुए कहा था इन्होंने मारा। दोनों कांस्टेबल ने कोर्ट में भी पांचों को पहचाना था। बचाव पक्ष के एडवोकेट एलएल यादव के मुताबिक, कोर्ट ने कांस्टेेबल के बयानों को भी विश्वसनीय नहीं माना। 
 

जांच अधिकारी बोले-

इस मामले के जांच अधिकारी व विजय नगर थाने के तत्कालीन टीआई छत्रपालसिंह सोलंकी के मुताबिक, उन्होंने पूरे साक्ष्यों के साथ कोर्ट में मजबूती से केस पेश किया था। लेकिन अर्चना जो सबसे मुख्य गवाह और पीड़ित थी, वही पलट गई तो केस कमजोर हो गया।

 

 

 

इस हत्याकांड में अर्चना ने अपने माता पिता पर इस हत्या का आरोप लगाया था। इस हत्याकांड में अर्चना ने अपने माता पिता पर इस हत्या का आरोप लगाया था।
सवा दो साल बाद अब अर्चना ने अपने बयान बदल लिए, कोर्ट ने उनपर पक्षद्रोह का आरोप तय किया है। सवा दो साल बाद अब अर्चना ने अपने बयान बदल लिए, कोर्ट ने उनपर पक्षद्रोह का आरोप तय किया है।
फाइल फोटो। फाइल फोटो।
घटना के दौरान की फोटो। घटना के दौरान की फोटो।