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हिलेरी ने की क्लीन इंदौर की तारीफ, कहा अद्भुत रही मांडू-महेश्वर यात्रा

हिलेरी क्लिंटन ने सफाई के साथ इंदौर के मेयर मालिनी गौड़ की तारीफ की। कहा ऐसे कामों के लिए महिला नेतृत्व को बधाई।

Danik Bhaskar | Mar 13, 2018, 11:22 AM IST

इंदौर। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी व पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन मंगलवार को तीन दिनी यात्रा के बाद राजस्थान रवाना हो गईं। जोधपुर रवाना होने के पहले हिलेरी ने इंदौर की काफी तारीफ की और कहा कि यह शहर बहुत ही साफ-सुधरा है। जब उन्हें इंदौर की महिला मेयर मालिनी गौड़ के बारे में पता चला तो उन्होंने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में नाम कमा रही हैं। एक महिला के नेतृत्व में इंदौर इंडिया का सफाई में नंबर वन शहर बना है यह काफी सराहनीय है।



- राजस्थान रवाना होने से पहले चर्चा में उन्होंने महेश्वर और मांडू यात्रा को अपनी अद्भुत यात्राओं में से एक बताया। उनका कहना था कि मांडू को तो विश्व पटल पर रखना चाहिए। महेश्वर में घेरदार लांछा, महेश्वरी कुरता व कांधे पर दुपट्‌टा व डालकर अहिल्या पालकी में शामिल हुईं। वह राजगादी से 500 मीटर राजबाड़ा गेट तक पैदल चलीं। उसके बाद अहिल्या फोर्ट लौट गईं। पालकी राजराजेश्वर मंदिर व काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचीं। हिलेरी ने फोर्ट स्थित अपने कक्ष से ही नर्मदा में दीपदान देखा।


मांडू में देखा रानी रूपमती और बाज बहादुर की प्रेम कहानी
- क्लिंटन ने मांडू में रानी रूपमती और बाज बहादुर की प्रेम कहानी को जाना और यहां बने महलों को देखा। हिलेरी ने मध्यप्रदेश की अपनी यात्रा को उद्भुत बताया। मांडू का हिंडोला महल देखकर वे अभिभूत हो गईं। उन्होंने जब प्राचीन महलों में अंडरग्राउंड पानी की लाइन और टेरेस स्विमिंग पूल देखा तो हैरानी से बोल पड़ीं- वॉव, नाइस प्लेस मांडू। इस दौरान उन्होंने जहाज महल, हिंडोला महल, चंपा बावड़ी, जामा मसजिद, होशंगशाह का मकबरा देखा। गाइड विश्वनाथ तिवारी ने उन्हें मांडू के स्मारकों के इतिहास की जानकारी दी।


हमाम व जकूजी जैसी व्यवस्था देख रह गईं हैरान
- अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला हिलेरी क्लिंटन ढाई घंटे के भ्रमण में मांडू से इतनी अभिभूत हुई कि गाइड विश्वनाथ तिवारी से पूछ बैठी-इतने अच्छे स्थान का वैश्विक प्रचार क्यों नहीं हो पाया। गाइड ने कहा-शायद अब हो रहा है। क्लिंटन ने स्मारकों की सफाई देख कर सराहना की। जहाज महल में भ्रमण के दौरान गाइड विश्वनाथ तिवारी ने हिलेरी को बताया कि साइफन सिस्टम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, पानी का शुद्धीकरण और टैरेस पुल जैसी तकनीक हम आज सोचते हैं, यह 10वीं शताब्दी में यहां महलों में अपना ली गई थी। उन्होंने जहाज महल परिसर में ही हमाम में गर्म-ठंडे पानी की अंडरग्राउंड लाइनें व जकूजी स्पा (शरीप पर भाप) जैसी व्यवस्था देखी तो हैरान रह गईं। पानी के सिस्टम के साथ होशंगशाह के मकबरे में साउंड सिस्टम बताया। यहां भी हिलेरी ने आवाज लगाने पर वापस आने वाली ध्वनि पर आश्चर्य जताया।

गाइड-कैसा लगा मांडू, हिलेरी-यह विख्यात होना चाहिए
- गाइड तिवारी ने पूछा-आपको मांडू कैसा लगा। उन्होंने कहा-मैं एक ऐसी जगह आ रही थी, जो ज्यादा प्रचारित नहीं है। अंदेशा था कि न जाने कैसी जगह होगी लेकिन यहां शांत और बड़ी सी साइट देख कर बहुत अच्छा लगा। यह स्थान तो विख्यात होना चाहिए।

हिलेरी ने पूछा- मांडू बसाने के लिए पहाड़ क्यों चुना
- हिलेरी ने गाइड विश्वनाथ तिवारी से पूछा कि महलों के निर्माण के लिए पहाड़ी इलाके के मांडू को क्यों चुना गया। गाइड तिवारी ने बताया मालवा पूरा समतल है और मांडू की समुद्र तल से ऊंचाई दो हजार फीट है। सुरक्षा के लिहाज से परमारों ने 10वीं शताब्दी में इस ऊंचे स्थान को चुना। ऊंचाई के कारण पानी की समस्या न हो, इसलिए भूमिगत जल की बजाय बरसाती पानी को सहेजने पर ज्यादा ध्यान दिया गया। हिलेरी के साथ आई एक महिला ने होशंगशाह के मकबरे में पूछा कि तीन गुंबद क्यों होते हैं। तिवारी ने इस्लामी मान्यताएं बताई तो उन्होंने कहा-इतनी जानकारी तो हमें इस्लामिक देश में भ्रमण के दौरान भी कभी किसी ने नहीं बताई।