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आईआईटी; 9 साल में 9 बड़े विवाद, खराब खाना अब तक का बड़ा मुद्दा

आईआईटी इंदौर पिछले कुछ दिनों से छात्र और स्थानीय प्रशासन के बीच टकराव को लेकर चर्चा में है।

Bhaskar News | Last Modified - Feb 03, 2018, 06:33 AM IST

  • आईआईटी; 9 साल में 9 बड़े विवाद, खराब खाना अब तक का बड़ा मुद्दा

    इंदौर. देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में शुमार आईआईटी इंदौर पिछले कुछ दिनों से छात्र और स्थानीय प्रशासन के बीच टकराव को लेकर चर्चा में है। यह पहला मामला नहीं है जब आईआईटी से जुड़ा कोई विवाद सामने आया है। करीब 9 साल पहले अस्तित्व में आए आईआईटी इंदौर में अब तक 9 बड़े विवाद हो चुके हैं। कभी फैकल्टी, कभी छात्र तो कभी आसपास के लोगों से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा छात्रों को मिलने वाले खाने की गुणवत्ता को लेकर रहा है। पेश है रिपोर्ट...

    1 . वन विभाग की जमीन को लेकर चार महीने तक चला प्रदेश सरकार से टकराव
    - 2009 में आईआईटी इंदौर की शुरुआत के साथ ही विवाद जुड़ा। सिमरोल में जो पांच सौ एकड़ जमीन मिलना थी, उसमें लगभग 225 एकड़ जमीन वन विभाग की थी, जो नियम के तहत दी नहीं जा सकती थी। इससे बिल्डिंग निर्माण में देरी हुई। चार माह तक आईआईटी प्रशासन का राज्य शासन के साथ विवाद चला।

    2. डायरेक्टर पर सवाल उठाकर संस्थान छोड़ कर चले गए डिप्टी डायरेक्टर
    आईआईटी के डिप्टी डायरेक्टर श्रीवास्तव ने डायरेक्टर डॉ. प्रदीप माथुर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाकर जिम्मा छाेड़ दिया था। वे संस्थान छोड़कर ही चले गए।

    3. डीएवीवी से किराए का भवन लिया, उसके छात्रों को रिसर्च का लाभ नहीं दिया
    बिल्डिंग के लिए जमीन मिलने में देरी के बीच आईआईटी को डीएवीवी ने 2009 में आईईटी बिल्डिंग का एक पूरा ब्लॉक किराए से दिया था। इसके बाद भी आईईटी के छात्रों को आईआईटी की रिसर्च सुविधा का लाभ नहीं मिला। तय समय पर भवन खाली नहीं किया, जिससे विवाद की स्थिति बनी। आखिर कार्यपरिषद ने अतिरिक्त समय मंजूर किया, तब विवाद थमा। भवन खाली करने के दौरान भी विवाद की स्थिति बनी।

    4. पार्ट टाइम पीएचडी में नहीं दिया प्रवेश
    - 2017 में सरकारी विभाग के एक अफसर को पात्रता के बाद भी आईआईटी प्रबंधन ने पार्ट टाइम पीएचडी में प्रवेश नहीं दिया। अफसर ने जवाब मांगा तो कोई कारण नहीं बताया। उन्होंने हाई कोर्ट इंदौर में दो याचिका लगाई। दो बार आईआईटी प्रशासन को कोर्ट से नोटिस जारी हो चुके हैं।

    5. गांव का रास्ता रोका तो मचा हंगामा
    2014-15 के दौरान आईआईटी प्रशासन ने सिमरोल के आसपास के गांवों को जोड़ने वाला मुख्य रास्ता बंद कर दिया। ग्रामीणों ने विरोध जताया। आखिरकार आईआईटी को रास्ता खाेलना पड़ा।
    6. पीएचडी नियम बदलने पर स्कॉलर ने सवाल उठाए
    पीएचडी छात्र इस बात से नाराज हुए कि बार-बार नियम बदलकर उन्हें परेशान क्यों किया जा रहा है। रिसर्च पब्लिकेशन की संख्या बढ़ाकर तनाव दिया। आईआईटी ने स्टायपंड दिए जाने के वर्ष पांच से घटाकर चार कर दिए। छात्र के लिए रिसर्च पेपर पब्लिकेशन की अनिवार्यता 3 से बढ़ाकर 4 कर दी।

    7. परेशान कर्मचारियों ने की डायरेक्टर की शिकायत
    - आईआईटी के ही कर्मचारियों ने तनाव से परेशान होकर डायरेक्टर की शिकायत एमएचआरडी से की। तब भी विवाद हुआ। कर्मचारियों ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए।
    8. गेट बंद किया, छात्र बोले जेल जैसे हालात
    छात्रों के एक आंदोलन के बाद आईआईटी प्रशासन ने मेन गेट को टीन शेड से बंद कर दिया। छात्रों ने सोशल मीडिया पर कमेंट लिखा कि जेल जैसे हालात महसूस हो रहे हैं।
    9. खाने की क्वालिटी का विवाद आज भी जारी
    खाने की गुणवत्ता पर एक साल से विवाद हो रहा है। दो बार पहले भी विरोध हुआ। इस बार छात्रों ने देर रात डायरेक्टर का घर घेर लिया। घर के बाहर तीन घंटे हंगामा किया। अगले दिन फिर कैंपस में धरना दिया। अभी भी विवाद का पटाक्षेप होना बाकी है।

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