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बेटी की डेडबॉडी उठते ही दौड़ी मां, लोग बोले- वाहे गुरु किसी को न दिखाना ऐसा दिन

हजारों लोग शहर के रीजनल पार्क पर मुक्तिधाम पर बच्चों को अंतिम विदाई देने पहुंचे।

Dainik Bhaskar

Jan 07, 2018, 04:10 AM IST
एक चार बच्चों की अंतिम यात्रा निकलते देख हर आंख नम हो गई। एक चार बच्चों की अंतिम यात्रा निकलते देख हर आंख नम हो गई।

इंदौर. एक के बाद एक चार बच्चों की अंतिम यात्रा निकलते देख हर आंख नम हो गई। हजारों लोग शहर के रीजनल पार्क पर मुक्तिधाम पर बच्चों को अंतिम विदाई देने पहुंचे। शहर के एक परिवार की 9 साल की बेटी हरमीत की जब अंतिम यात्रा निकली तो मां शव के पीछे दौड़ पड़ी। इसके बाद जैसे तैसे बेटे ने अपनी मां को संभाला। इससे पहले जैसे ही बेटी की डेडबॉडी घर आई तो मां बिलख पड़ी। सफेद चादर में लिपटी थी बेटी....

- खातीवाला टैंक के आर सेक्टर में 9 साल की हरमीत का शव सुबह जैसे ही घर लेकर पहुंचे मां जसप्रीत कौर फफक कर बेटी से लिपट गईं।

- पिता गुरजीत सिंह और बेटा सहजवीर भी लिपट गए। अपनी लाड़ली को सफेद चादर (कफन) में लिपटा देख वे फूट-फूटकर रो पड़े। इकलौती बहन के पास से भाई उठने को राजी नहीं था। रिश्तेदारों ने जैसे-तैसे उसे संभाला।

- जैसे ही शव ले जाने के पूर्व अरदास हुई तो मां, पिता और भाई की आंख से आंसू की धारा बह निकली। तीनों खुद को रोक नहीं पाए।

- जैसे ही अंतिम यात्रा के लिए शव बाहर लाए मां अर्थी के पीछे दौड़ पड़ीं। लोगों ने रोका तो सड़क पर सिर पटककर जान देने की कोशिश करने लगी।

- भाई गुरमीत ने जैसे-तैसे उन्हें संभाला। ये दृश्य देख हर शख्स रो पड़ा। सभी यही बोल रहे थे कि वाहे गुरु ये दिन किसी को न दिखाए।

ऐसे हुआ हादसा
- शुक्रवार को डीपीएस (दिल्ली पब्लिक स्कूल) में छुट्‌टी के बाद बस 12 बच्चों को घर छोड़ने जा रही थी। बायपास पर बस का स्टयरिंग फेल होने से चालक का संतुलन बस पर से हट गया।

- बस डिवायडर फादते हुए गलत दिशा में घुस गई और सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई। हादसे में बस चालक स्टेयरिंग पर फंस गया जससे उसने वहीं पर दम तोड़ दिया।

- हादसे के बाद आसपास गुजर रहे लोगों ने पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी। बच्चों की फैमिली को जैसे ही इस हादसे की जानकारी मिली जो जिस हाल में था वैसे ही घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ा।

अपने पैरेंट्स के साथ मासूम हरमीत। अपने पैरेंट्स के साथ मासूम हरमीत।
हरमीत के बर्थ डे के दौरान केक काटती। हरमीत के बर्थ डे के दौरान केक काटती।
परिवार के लोगों को क्या पता था कि ये हरमीत का आखिरी बर्थ डे था। परिवार के लोगों को क्या पता था कि ये हरमीत का आखिरी बर्थ डे था।
अंतिम यात्रा के दौरान पूरा शहर उमड़ पड़ा। अंतिम यात्रा के दौरान पूरा शहर उमड़ पड़ा।
यहां सभी बच्चों को एक साथ मुखाग्नि दी। यहां सभी बच्चों को एक साथ मुखाग्नि दी।
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एक चार बच्चों की अंतिम यात्रा निकलते देख हर आंख नम हो गई।एक चार बच्चों की अंतिम यात्रा निकलते देख हर आंख नम हो गई।
अपने पैरेंट्स के साथ मासूम हरमीत।अपने पैरेंट्स के साथ मासूम हरमीत।
हरमीत के बर्थ डे के दौरान केक काटती।हरमीत के बर्थ डे के दौरान केक काटती।
परिवार के लोगों को क्या पता था कि ये हरमीत का आखिरी बर्थ डे था।परिवार के लोगों को क्या पता था कि ये हरमीत का आखिरी बर्थ डे था।
अंतिम यात्रा के दौरान पूरा शहर उमड़ पड़ा।अंतिम यात्रा के दौरान पूरा शहर उमड़ पड़ा।
यहां सभी बच्चों को एक साथ मुखाग्नि दी।यहां सभी बच्चों को एक साथ मुखाग्नि दी।
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