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मध्यप्रदेश में 12.71 लाख गर्भवती, 3.73 लाख प्रसव का रिकॉर्ड नहीं

सिर्फ 9 लाख की डिलीवरी का रिकॉर्ड की सरकार के पास है।

Danik Bhaskar | Jan 28, 2018, 08:35 AM IST
डेमोफोटो डेमोफोटो

इंदौर. मध्यप्रदेश में पिछले 8 माह में तीन लाख से ज्यादा प्रसव लापता है, जो सरकारी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों में रजिस्टर्ड हुई कुल गर्भवती महिलाओं का 30% है। इसका खुलासा एनएचएम द्वारा जारी हेल्थ बुलेटिन से हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक 1 अप्रैल से 30 नवंबर तक पूरे प्रदेश में 12 लाख 71 हजार गर्भवती महिलाएं रजिस्टर्ड हुईं। इनमें सिर्फ 9 लाख की डिलीवरी का रिकॉर्ड की सरकार के पास है।

इंदौर में भी 14% से ज्यादा प्रसव लापता है। गौरतलब है राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मापदंडों के अनुसार आशा कार्यकर्ताओं सरकारी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए गर्भवती महिला का प्रसव होने तक रिकॉर्ड रखा जाता है। इसका एक उद्देश्य मातृ-शिशु मृत्यु दर, कुपोषण व घटते लिंगानुपात पर निगरानी रखना भी है।


सीएजी भी अपनी ऑडिट रिपोर्ट में पिछले सालों में लापता हुए प्रसव पर सवाल उठा चुका है। इसके पीछे आशा कार्यकर्ताओं डॉक्टरों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली को जिम्मेदार ठहराया था। रिपोर्ट आने के 2 साल बाद भी सरकार कोई सबक लेती नहीं दिख रही। पिछले 8 माह में प्रदेश में रजिस्टर्ड इन 3 लाख 73 हजार गर्भवती का क्या हुआ? डिलीवरी हुई थी या नहीं, इसका कोई रिकॉर्ड सरकार के पास नहीं है। आशा कार्यकर्ताओं के जरिए यदि गर्भवती किसी अन्य शहर में जाती है, गर्भपात या घर में डिलीवरी होती है तो भी पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है।

इंदौर में 43 हजार का हुआ रजिस्ट्रेशन

इंदौर के 200 से ज्यादा नर्सिंग होम और अस्पतालों में अप्रैल से नवंबर के बीच करीब 43 हजार गर्भवती का रजिस्ट्रेशन हुआ। लेकिन करीब 37 हजार महिलाओं की डिलीवरी का ही रिकॉर्ड सरकार के पास है। गौरतलब है इसमें निजी अस्पतालों और घर में हुई डिलीवरी का आंकड़ा भी शामिल है। यानी करीब 6 हजार गर्भवती का क्या हुआ इसकी कोई खबर सरकार के पास नहीं है। यह हालत तब है जब फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक इंदौर जिले में सेक्स रेश्यो प्रदेश के औसत 918 से कम होकर 890 तक पहुंच चुका है। जिले के कुछ गांव में तो यह 750 से भी नीचे पहुंच चुका है। जो साफ तौर पर लिंग परीक्षण भ्रूण हत्या की और इशारा कर रहा है।

बड़े शहरों में सबसे बुरे हालात रीवा और ग्वालियर के
देश के दूसरे बड़े शहरों के लिहाज से देखें तो इंदौर में हालात फिर भी ठीक हैं। मगर जबलपुर में हर तीसरी गर्भवती का क्या हुआ इसकी कोई खबर नहीं है। रीवा और ग्वालियर में तो 10 में से 4 प्रसव लापता है।