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4 मासूमों की मौत के बाद हंसता रहा ये शख्स, कहा- हादसा हुआ तो हमारी गलती कहां?

आरटीओ डॉ. एमपी सिंह का यह मुस्कराता चेहरा सिस्टम की बेशर्म हंसी को बता रहा है।

Danik Bhaskar | Jan 07, 2018, 02:31 AM IST

इंदौर. 4 मासूमों की मौत से जहां पूरा शहर गमगीन है, वहीं आरटीओ डॉ. एमपी सिंह का यह मुस्कराता चेहरा सिस्टम की बेशर्म हंसी को बता रहा है। मौके पर मौजूद ट्रैफिक एडीजी विजय कटारिया ने स्पीड गवर्नर के बावजूद स्पीड बहुत ज्यादा होने की बात की तो आरटीओ ने हंसते हुए कहा कि सॉफ्टवेयर धीरे-धीरे अपडेट हो रहे हैं। अगर इसी दौरान यह हादसा हो गया है तो हमारी कहां गलती है? आपको बता दें, शुक्रवार को शहर में देवास वायपास पर स्कूल बस और ट्रक में टक्कर हो गई थी। जिसमें ड्राइवर समेत 4 बच्चों की जान चली गई। आरटीओ, कंपनी और स्कूल की मिलीभगत एक्सपोज....

- दिल्ली पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट ने स्कूल की बसों में स्पीड गवर्नर कभी लगवाया ही नहीं और स्पीड गवर्नर लगाने वाली कंपनी से लेन-देन कर फर्जी सर्टिफिकेट ले लिए और इसी आधार पर आरटीओ ने भी बसों को बगैर जांचे फिटनेस सर्टिफिकेट भी थमा दिए।

- स्कूल प्रबंधन, स्पीड गवर्नर लगाने वाली कंपनी और आरटीओ के भ्रष्टाचार के गठजोड़ के चलते चार मासूमों की जान चली गई। इस बीच पुलिस ने स्कूल के ट्रांसपोर्ट इंचार्ज, कंपनी के डीलर सहित तीन को अरेस्ट कर लिया।

- स्कूल के ट्रांसपोर्ट इंचार्ज चैतन्य कुमावत ने शनिवार सुबह स्पीड गवर्नर लगाने वाली सुविधा ऑटो गैस प्रालि के नीरज अग्निहोत्री को फोन किया और उन्हें तत्काल स्कूल बुलाया। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने इस पूरी बातचीत का रिकाॅर्ड हासिल कर लिया है और इसमें कुमावत, मिश्रा से कह रहे हैं कि वह जल्द स्कूल आकर बसों में स्पीड गवर्नर लगा दें। जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दें।

स्कूल के बड़े अधिकारी भी जिम्मेदार

- पुलिस अधिकारियों को मानना है कि स्पीड गवर्नर का फर्जीवाड़ा करने का यह काम अकेले ट्रांसपोर्ट मैनेजर लेवल के व्यक्ति के वश का नहीं हो सकता।

- इसमें मैनेजमेंट के बड़े लेवल के लोग शामिल हैं, जिन्होंने जानबूझकर यह खेल किया। चैतन्य को स्कूल के अधिकारी विपिन बुंदेला ही बाकि स्कूल से लेकर आए थे। इसमें उनके और अन्य हाई लेवल के लोगों के भी शामिल होने की आशंका है।

सभी बसों में स्पीड गवर्नर के लिए बनी कमेटी
- पुलिस ने सभी बसों में स्पीड गवर्नर लगे हैं कि नहीं, यदि लगे हैं तो उनमें छेड़छाड़ तो नहीं की गई, इसकी जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है।

- इसमें एडिशनल एसपी प्रशांत चौबे, सीएसपी जयंत राठौर, ट्रैफिक डीएसपी के साथ ही जीएसटीआईटीएस के ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट रहेंगे।

- साथ ही पुलिस आयशर कंपनी वालों को भी पीथमपुर से बुला रही है। अधिकांश बसें इसी कंपनी की हैं। वे बताएंगे कि स्पीड गवर्नर और बस से छेड़छाड़ हुई है या नहीं।

सीधी बात...

भास्कर : स्पीड गवर्नर काम कर रहा है या नहीं, इसकी जांच क्यों नहीं की गई? सिर्फ दस्तावेज देख फिटनेस सर्टिफिकेट दे दिया?
आरटीओ : स्पीड गवर्नर काम कर रहा है या नहीं, इसकी जांच की कोई व्यवस्था नहीं होती है, ना ही ऐसा कोई नियम है। नियमानुसार जिस कंपनी ने स्पीड गवर्नर लगाया, उसे ही सर्टिफिकेट जारी करना होता है। उसी सर्टिफिकेट के आधार पर विभाग फिटनेस सर्टिफिकेट देता है।

भास्कर : क्या आपने खुद कभी अपने स्कूल की बसों को जांचा ?
प्रिंसिपल : स्कूल घटना के लिए जिम्मेदार नहीं है। अभी मामले की जांच चल रही है। यह कहकर फोन काट दिया।

अब 40 किमी की रफ्तार से ज्यादा नहीं चलेंगी प्रदेश की स्कूल बसें

- पुलिस ने डीपीएस के ट्रांसपोर्ट मैनेजर चैतन्य कुमावत, स्पीड गवर्नर डीलर कंपनी के डीलर नीरज अग्निहोत्री (सुविधा ऑटो गैस प्रािल संचालक) और उसके कर्मचारी जलज मेश्राम को गिरफ्तार किया है। तीनों पर गैर इरादतन हत्या और आपराधिक षड्यंत्र का केस दर्ज किया है। इस केस में पुलिस की विशेष टीम भी जांच कर रही है।

- जांच में और कोई दोषी मिला तो उसे भी आरोपी बनाया जाएगा। उक्त आरोपियों पर भी धाराएं बढ़ाई जाएंगी। डीपीएस बस हादसे में चार मासूूमों सहित ड्राइवर की मौत के मामले में शनिवार को पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

- इस मामले में गृह व परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने दोपहर में ही डीआईजी को स्कूल प्रबंधन और स्पीड गवर्नर कंपनी के खिलाफ एफआईआई दर्ज कर गिरफ्तारी के आदेश दिए थे।

नियम

- डीपीएस जैसे बस हादसे भविष्य में न हों, इसके लिए शासन ने सख्त कदम उठाए हैं। गृह मंत्री के निर्देश पर उनके ओएसडी राजेंद्र सिंह सेंगर ने परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव को पत्र लिखते हुए स्पष्ट किया कि प्रदेश में अब स्कूल बसें 40 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से ज्यादा नहीं चलना चाहिए।

जांच

- हादसे की मजिस्ट्रियल जांच शुरू हो गई है। अधिकारियों ने बस संबंधी सभी रिकॉर्ड सीज कर दिए। जीपीएस की डीवीआर भी अपने कब्जे में ले लिए। कलेक्टर ने बिंदु तय किए हैं कि दुर्घटना की क्या परिस्थिति रही, बस को लेकर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का और एक्ट का पालन हो रहा था या नहीं, प्रबंधन की क्या भूमिका थी?

आरटीओ डॉ. एमपी सिंह संवेदनशील मामले पर भी हंसते रहे। आरटीओ डॉ. एमपी सिंह संवेदनशील मामले पर भी हंसते रहे।
देवास वायपास पर स्कूल बस और ट्रक में टक्कर हो गई थी। जिसमें ड्राइवर समेत 4 बच्चों की जान चली गई। देवास वायपास पर स्कूल बस और ट्रक में टक्कर हो गई थी। जिसमें ड्राइवर समेत 4 बच्चों की जान चली गई।