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बेटा 10 मीटर गेंद नहीं फेंक सकता, मैनेजर पिता ने नेशनल टीम में जोड़ा नाम,

खेल में राजनीति ने कई खिलाड़ियों का कॅरियर बर्बाद कर दिया है।

Danik Bhaskar | Dec 20, 2017, 06:50 AM IST

इंदौर. खेल में राजनीति ने कई खिलाड़ियों का कॅरियर बर्बाद कर दिया है। सिलेक्टर कई बार अच्छे खिलाड़ियों को छोड़ टीम में उन खिलाड़ियों का चयन कर लेते हैं जो नौसिखिये हैं। इससे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के मन निराशा आ जाती है। राष्ट्रीय शालेय वाटर पोलो स्पर्धा 27 दिसंबर से पुणे में खेली जाएगी। स्पर्धा के लिए चुनी गई मध्यप्रदेश टीम के प्रबंधक राकेश जोशी ने मनमानी करते हुए अपने बेटे प्रणय जोशी का नाम टीम में जोड़ दिया। कोच ने उन खिलाड़ियों का नाम सूची से बाहर कर दिया है, जिन्होंने इससे पहले हुई स्पर्धा में पदक जीते थे। साथी खिलाड़ियों का कहना है कि प्रणय ने न ट्रायल भाग लिया, न ही स्टेट चैंपियनशिप खेले हैं। ऐसे में उनका नेशनल टीम में चयन समझ से परे है। प्रणय के चयन से कई खिलाड़ी अचंभित हैं, क्योंकि उनका कहना है अभ्यास के दौरान वो 10 मीटर तक गेंद थ्रो नहीं कर सकता आैर न ही खेल के हिसाब से स्वीमिंग कर सकता है।

मेरे बच्चे से सब जलते हैं

- इधर, मप्र दल प्रबंधक राकेश मिश्रा का कहना है मेरा बेटा अच्छा खेलता है आैर इंदौर के कई लोग इस बात से जलते हैं। वे लोग मेरे आैर मेरे बच्चे के साथ राजनीति कर उसे आगे बढ़ने नहीं देना चाहते हैं।

सरकारी स्कूलों में कोचेस की कमी
- सरकारी स्कूल में स्वीमिंग आैर वाटर पोलो गेम्स की सुविधा नहीं है। ऐसे में सरकारी स्कूल कोचेस की संख्या कम होती है। इस कारण निजी स्कूलों के कोचेस को चयनकर्ता बना दिया जाता है आैर ये चयनकर्ता इसका फायदा उठाते हुए अपने स्कूलों के बच्चों का सिलेक्शन टीम में करते हैं।

संभाग से जारी खिलाड़ियों की सूची में नहीं था नाम
- इंदौर संभाग से जारी 15 खिलाड़ियों की सूची में प्रणय जोशी का नाम नहीं था। लेकिन 20 दिसंबर से भोपाल में शुरू होने वाले नेशनल कैंप में प्रणय का नाम शामिल है। इसे लेकर कई खिलाड़ियों ने सवाल उठाए हैं कि जिस खिलाड़ी ने संभाग टीम में भाग नहीं लिया, उसका चयन कैसे नेशनल टीम में हो सकता है।

राजनीति के कारण कई मैच हार चुका है मप्र
- वाटर पोलो प्रमुख सीमांत द्विवेदी का कहना है कि सभी अपने-अपने स्कूलों के बच्चों को खिलाना चाहते हैं। कोचेस टीम में कई खिलाड़ी शामिल कर देते हैं जो ढंग से खेलना भी नहीं चाहते। वाटर पोलो में मप्र का हमेशा दबदबा रहा लेकिन पिछले दो-तीन बार से हम ऐसी टीमों से हार रहे हैं, जो हमारे सामने कभी टिक भी नहीं सकी।