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मंदसौर गोलीकांड: ​पुलिस कड़ा कदम नहीं उठाती तो फिज़ा और बिगड़ सकती थी

आंदोलनकारियों को खूब समझाया था। पुलिस कड़ा कदम नहीं उठाती तो फिज़ा और बिगड़ सकती थी।

Dainik Bhaskar

Dec 28, 2017, 06:39 AM IST
Mandsaur shootout: If the police does not take strong steps

इंदौर. मंदसौर किसान आंदोलन के दौरान हुए गोलीकांड की जांच कर रहे जस्टिस जरतकुमार जैन के समक्ष बुधवार को 22 गवाहों के बयान हुए, जिसमें उन्होंने कहा कि गोलीकांड के तीन दिन पहले से आंदोलन शुरू हो गया था और घटना के पहले पुलिस ने आंदोलनकारियों को खूब समझाया था। पुलिस कड़ा कदम नहीं उठाती तो फिज़ा और बिगड़ सकती थी।

- जस्टिस जे.के. जैन की एक सदस्यीय जांच आयोग के समक्ष मंगलवार के बाद बुधवार को भी सुनवाई हुई। जांच आयोग ने आमजनों से शपथ पत्र के साथ पक्ष रखने को कहा था। मप्र शासन द्वारा इस मामले में विशेष रूप से एंगेज हाईकोर्ट इंदौर के सीनियर एडवोकेट अविनाश सिरपुरकर, उदयप्रताप सिंह कुशवाह एवं अमीन पटेल ने सभी 22 गवाहों के क्रॉस (प्रति परीक्षण) किए।

- सभी गवाहों ने आयोग के समक्ष पूर्व में भी शपथ पत्र प्रस्तुत कर दिए थे। इसमें उन्होंने अपनी संपत्ति, धन हानि के साथ ही यह भी कहा है कि गोलीकांड 6 जून 2017 को हुआ था। उसके तीन दिन पहले 3 जून से किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया था। कमोबेश सभी शपथकर्ताओं ने कहा कि भारी भीड़ ने घटना के दिन पिपलिया मंडी थाने का घेराव और पथराव के साथ ही तोड़फोड़ की।

- कई के पास पेट्रोल की केन भी मिली थी। घटना के दौरान कई दुकानों और मकानों को भारी क्षति हुई थी। कई ट्रकों में आग लगा दी थी। सीनियर एडवोकेट सिरपुरकर के मुताबिक गवाहों ने इस बात को माना कि 6 जून को हुए गोलीकांड के पहले 3 जून से आंदोलन शुरू हुआ और पहले ही दिन से पुलिस ने आंदोलनकारियों को समझाया था। आयोग की अगली सुनवाई 8,9,10 जनवरी 2018 को होगी।

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