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18 सरकारी विभागों में बिना नक्शे पास, बन रहीं 438 करोड़ की 100 से ज्यादा बिल्डिंग

निजी क्षेत्र में अवैध निर्माण कार्यों को लेकर प्रशासन, नगर निगम और प्राधिकरण जैसी एजेंसियां कार्रवाई करती हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 30, 2017, 07:07 AM IST

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    इंदौर.निजी क्षेत्र में अवैध निर्माण कार्यों को लेकर प्रशासन, नगर निगम और प्राधिकरण जैसी एजेंसियां कार्रवाई करती हैं। लेकिन सरकार के ही कई विभागों में जनसुरक्षा और पर्यावरणीय हितों को नजरअंदाज कर बिना नक्शा मंजूर कराए करोड़ों के निर्माण कार्य चल रहे हैं। अकेले पीडब्ल्यूडी की प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट (पीआईयू) इंदौर में 18 सरकारी विभागों के लगभग 100 निर्माण प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं, जिसने 438 करोड़ के इन भवनों के निर्माण के लिए नक्शा पास कराना जरूरी नहीं समझा। जिला कोर्ट परिसर से लेकर मेडिकल कॉलेज तक में किए जा रहे निर्माण कार्यों के तहत भवन निर्माण में मापदंडों से समझौता साफ नजर आता है । पीडब्ल्यूडी के अधिकारी इस ओर ध्यान दिलाने पर अब शीघ्र ही नक्शा स्वीकृत करवाने की बात कर रहे हैं, वहीं टीएंडसीपी के अधिकारियों का कहना है कि कानून पालन के सााथ जनसुरक्षा व पर्यावरण की दृष्टि से भी नक्शा स्वीकृति जरूरी है। अन्यथा ऐसे सभी निर्माण अवैध निर्माण की श्रेणी में आते हैं।

    कई बार शासकीय धन का नुकसान
    - निजी भवन निर्माताओं को जैसे भवन निर्माण एवं विकास के पहले सरकारी एजेंसियों से अनुमति लेनी पड़ती है, वही नियम सरकारी निर्माण कार्यों पर भी लागू होते हैं। फर्क सिर्फ यह है कि यह मान लिया जाता है कि सरकारी विभाग नियमानुसार ही काम करेंगे। शहर में भी विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग या दूसरे संबंधित विभागों से विधिवत अनुमति नहीं ली जाती। इसका दुष्परिणाम बेतरतीब, नेशनल बिल्डिंग कोड के मापदंड के विरुद्ध निर्माण के रूप में भी सामने आता है। कई बार शासकीय धन की हानि तो जनहानि का खतरा मंडराता है।

    कोर्ट परिसर में निर्माण, नियम पालन नहीं
    - जिला कोर्ट की नई बिल्डिंग 250 करोड़ से ज्यादा की लागत से बनना है जिसका विधिवत नक्शा भी पास करवा लिया गया, मगर पीडब्ल्यूडी ने वर्तमान कोर्ट परिसर में करीब 10 हजार वर्ग फीट निर्माण में नियमों का पालन नहीं हुआ। परिसर में पहले ही पार्किंग व जगह की समस्या है, वहीं कमिश्नर कार्यालय की ओर के गेट के पास निर्माण कार्य आपात स्थिति में बड़ी परेशानी खड़ी कर सकते हैं।

    नियम: पूर्व लिखित सूचना, नक्शा, दस्तावेज जरूरी
    - नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 27 के मुताबिक सरकारी विभाग या प्राधिकारी, जो किसी भूमि का विकास या निर्माण चाहते हैं, काम शुरू करने से 30 दिन पूर्व लिखित सूचना देना जरूरी है। नक्शा, अन्य दस्तावेज पेश करना होंगे। संचालक नगर तथा ग्राम निवेश यदि दस्तावेजों में कमी पाते हैं तो आपत्ति ले सकते हैं।

    6 माह की सजा और जुर्माने का भी प्रावधान
    - नियम में अवैध विकास या मास्टर प्लान के उपयोग के विपरीत निर्माण करने पर 6 माह की सजा व जुर्माने का प्रावधान है। अवैध निर्माण को हटाया जा सकता है।

    मंजूरी के लिए नक्शे भेजे हैं, रिमाइंडर भेजेंगे
    - पीडब्ल्यूडी की पीआईयू शाखा के संभागीय परियोजना यंत्री के. सेनानी कहते हैं हमने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के पास नक्शे मंजूरी के लिए भेजे हैं। अब रिमाइंडर भी भेजेंगे।

    एमटीएच-40 फीट सड़क पर 24 मीटर का अस्पताल

    - शहर में अब तक 18 मीटर से ऊंचे भवनों को मंजूरी नहीं दी जाती थी। इसके लिए 12 मीटर की पहुंच सड़क जरूरी थी। पर सेंट्रल कोतवाली थाने के पास बिना नक्शा पास कराए, पुराने लाल अस्पताल की जगह हाईराइज के दायरे में आने वाला 24 मीटर (जी+5) का अस्पताल बना दिया गया। सेंट्रल कोतवाली की ओर रोड 40-50 फीट चौड़ी भी नहीं है। योजना 3 मंजिल की थी, पर 6 मंजिला कर दिया है। मेडिकल कॉलेज हॉस्टल कैंपस में 100 करोड़ से ज्यादा के निर्माण चल रहे हैं, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से अनुमति नहीं ली गई। जीपीओ के पास पीसी सेठी अस्पताल के लिए भी अनुमति नहीं ली गई।

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