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बेटी को आखिरी बार ऐसे दुलारती रही मां, PM के बाद रातभर डेडबॉडी पर फेरती रही हाथ

शनिवार का दिन इंदौर के लिए शायद सबसे दुखद रहा। बायपास पर शुक्रवार को हुए बस एक्सीडेंट में चारों बच्चों की अंतिम यात्रा ख

Dainik Bhaskar

Jan 07, 2018, 03:03 AM IST
6 साल की मासूम के श्रुति की डेडबॉडी को पोस्टमार्टम के बाद परिवार के लोग रात में घर ले आए थे । मां बेटी की डेडबॉडी पर रातभर हाथ फेरती रहीं। 6 साल की मासूम के श्रुति की डेडबॉडी को पोस्टमार्टम के बाद परिवार के लोग रात में घर ले आए थे । मां बेटी की डेडबॉडी पर रातभर हाथ फेरती रहीं।

इंदौर. शनिवार का दिन इंदौर के लिए शायद सबसे दुखद रहा। बायपास पर शुक्रवार को हुए बस एक्सीडेंट में चारों बच्चों की अंतिम यात्रा खातीवाला इलाके से निकाली गई। इस दौरान हाजारों के संख्या में लोग मौजूद रहा। वहीं 6 साल की मासूम के श्रुति की डेडबॉडी को पोस्टमार्टम के बाद परिवार के लोग रात में घर ले आए थे । मां बेटी की डेडबॉडी पर रातभर हाथ फेरती रहीं। बेटी को ऐसे चुप देख फूट पड़े मां के आंसू....

- 20 साल की मन्नत के बाद लुधियानी परिवार में आई साढ़े 6 साल की श्रुति के डेडबॉडी को पोस्टमार्टम के बाद परिवार के लोग रात में ही घर ले आए थे।

- इकलौती बेटी को कफन में लिपटा देख मां राधा मानो पत्थर सी हो गई। न तो उनकी आवाज निकली और न ही आंसू। परिवार ने झकझोरा तो वह डेडबॉडी से लिपटकर रोने लगी।

- हालत गंभीर हुई तो रात में ही डॉक्टर बुलाकर उनका इलाज करवाया। रातभर वह बेटी के डेडबॉडी पर हाथ फेरती रहीं।

- सुबह जब बेटी को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने की बारी आई तो पूरे परिवार की लाड़ली रही श्रुति के लिए एक विशेष कार को फूलों से सजाया गया।

- चाचा मोहन लुधियानी ने बताया बेटी के जाने से हमारा पूरा परिवार सूना हो गया है। वही अकेली लड़की पूरे परिवार में थी।

- स्कूल से आने के बाद या छुट्टी के दिन उसे कार में घूमने का शौक था, इसीलिए कार से ही उसकी अंतिम यात्रा निकाली।

- श्रुति की मां के साथ सत्संग करने वाली रेखा दरियानी ने बताया 20 साल की मन्नत के बाद हुई बेटी को एक झटके में अचानक खो देने से मां सदमे में है।

ऐसे हुआ हादसा...

- शुक्रवार को डीपीएस (दिल्ली पब्लिक स्कूल) में छुट्‌टी के बाद बस 12 बच्चों को घर छोड़ने जा रही थी। बायपास पर बस का स्टयरिंग फेल होने से चालक का संतुलन बस पर से हट गया।

- बस डिवायडर फादते हुए गलत दिशा में घुस गई और सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई। हादसे में बस चालक स्टेयरिंग पर फंस गया जससे उसने वहीं पर दम तोड़ दिया।

- हादसे के बाद आसपास गुजर रहे लोगों ने पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी। बच्चों की फैमिली को जैसे ही इस हादसे की जानकारी मिली जो जिस हाल में था वैसे ही घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ा।

20 साल की मन्नत के बाद लुधियानी परिवार जन्म हुआ था श्रुति का। 20 साल की मन्नत के बाद लुधियानी परिवार जन्म हुआ था श्रुति का।
इकलौती बेटी को कफन में लिपटा देख मां  के आंसू नहीं थम रहे थे। इकलौती बेटी को कफन में लिपटा देख मां के आंसू नहीं थम रहे थे।
स्कूल से आने के बाद या छुट्टी के दिन उसे कार में घूमने का शौक था, इसीलिए कार से ही उसकी अंतिम यात्रा निकाली। स्कूल से आने के बाद या छुट्टी के दिन उसे कार में घूमने का शौक था, इसीलिए कार से ही उसकी अंतिम यात्रा निकाली।
पिता ने बेटी को अपने हाथों से मुखाग्नि दी। पिता ने बेटी को अपने हाथों से मुखाग्नि दी।
हजारों लोग मासूमों की अंतिम यात्रा में उमड़ पड़े। हजारों लोग मासूमों की अंतिम यात्रा में उमड़ पड़े।
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6 साल की मासूम के श्रुति की डेडबॉडी को पोस्टमार्टम के बाद परिवार के लोग रात में घर ले आए थे । मां बेटी की डेडबॉडी पर रातभर हाथ फेरती रहीं।6 साल की मासूम के श्रुति की डेडबॉडी को पोस्टमार्टम के बाद परिवार के लोग रात में घर ले आए थे । मां बेटी की डेडबॉडी पर रातभर हाथ फेरती रहीं।
20 साल की मन्नत के बाद लुधियानी परिवार जन्म हुआ था श्रुति का।20 साल की मन्नत के बाद लुधियानी परिवार जन्म हुआ था श्रुति का।
इकलौती बेटी को कफन में लिपटा देख मां  के आंसू नहीं थम रहे थे।इकलौती बेटी को कफन में लिपटा देख मां के आंसू नहीं थम रहे थे।
स्कूल से आने के बाद या छुट्टी के दिन उसे कार में घूमने का शौक था, इसीलिए कार से ही उसकी अंतिम यात्रा निकाली।स्कूल से आने के बाद या छुट्टी के दिन उसे कार में घूमने का शौक था, इसीलिए कार से ही उसकी अंतिम यात्रा निकाली।
पिता ने बेटी को अपने हाथों से मुखाग्नि दी।पिता ने बेटी को अपने हाथों से मुखाग्नि दी।
हजारों लोग मासूमों की अंतिम यात्रा में उमड़ पड़े।हजारों लोग मासूमों की अंतिम यात्रा में उमड़ पड़े।
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