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तत्काल टिकट स्कैम: साइबर सेल को मिले 14 एजेंट्स के नाम, होगी कार्रवाई

साइबर सेल को प्रारंभिक तौर पर 14 एजेंट के नाम मिले हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 29, 2017, 06:24 AM IST

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    इंदौर.सीबीआई के असिस्टेंट प्रोग्रामर द्वारा बनाया गया तत्काल रेलवे टिकट बुकिंग का अवैध सॉफ्टवेयर इंदौर, भोपाल सहित प्रदेश के कई ट्रेवल एजेंट्स ने 25-50 हजार में खरीदा है। साइबर सेल को प्रारंभिक तौर पर 14 एजेंट के नाम मिले हैं। इन पर एक्शन होगा।

    (भास्कर को एजेंट्स ने ही बताया कैसे टिकट पहले हो जाती है बुक)

    आईआरसीटीसी वेबसाइट को हैक कर लेता है सॉफ्टवेयर
    - ट्रेवल एजेंट समीर (परिवर्तित नाम) ने भास्कर को बताया सॉफ्टवेयर की विंडो बिल्कुल आईआरसीटीसी जैसी होती है। इसमें वही लाॅगइन और पासवर्ड फीड करना पड़ता है, जो आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर डाला जाता है। लॉगइन होने के बाद सॉफ्टवेयर वेबसाइट को हैक कर देता है।

    एक दिन पहले ही फीड कर लेते हैं डीटेल

    - एजेंट्स एक दिन पहले या अल सुबह इस साॅफ्टवेयर में जिस व्यक्ति का टिकट बुक करना है उसकी डीटेल फीड कर लेते हैं।

    केवल 16-16 मिनट के लिए ही चलता है सॉफ्टवेयर
    - तत्काल बुकिंग की लाइन सुबह 10 बजे (एसी क्लास के लिए) और 11 बजे (स्लीपर) के लिए खुलती है। सॉफ्टवेयर 9.59 बजे और 10.59 बजे से मात्र 16-16 मिनट के लिए ही चलता है। इन 16 मिनटों में अगर एजेंट चाहे तो 100 सीटें बुक कर सकता है।

    25-50 हजार में खरीदी सिंगल इंस्टॉलेशन वाली सीडी
    - भोपाल के ट्रेवल एजेंट विनय ने बताया हमने भी इस सॉफ्टवेयर की सीडी मुंबई से 30 हजार रुपए में खरीदी। इसके रेट उपलब्धता के हिसाब से 25 से 50 हजार रु. तक पहुंच जाते हैं। सीडी पर कोई नाम नहीं होता। बस यह बताया जाता है कि इसमें सॉफ्टवेयर है। जिस सिस्टम में इसे लोड करना हो, सीडी उसमें ही लगाएं। एक बार इंस्टॉल होने के बाद सॉफ्टवेयर उसी हार्ड ड्राइव में चलेगा। सीडी किसी और सिस्टम में लगाई तो सॉफ्टवेयर इंस्टॉल नहीं होगा।

    सॉफ्टवेयर के भरोसे तत्काल टिकट के दोगुने दाम
    - एजेंट्स ने ही बताया बुकिंग में सबसे ज्यादा मुनाफा तत्काल टिकट से ही होता है। एजेंट्स दावे के साथ टिकट बुक कर देते हैं तो ऐसे लोग उनके संपर्क में आ जाते हैं, जो लगातार ट्रेवलिंग करते हैं। सुपर फास्ट ट्रेनों की तत्काल टिकटों के एवज में एजेंट ग्राहकों से दोगुनी राशि तक ले लेते हैं।

    एक क्लिक पर पूरी टिकट बन जाती
    - एजेंट्स के मुताबिक सॉफ्टवेयर पूरी टिकट एक क्लिक पर बना देता है व पेमेंट गेटवे तक ले जाता है। जो एजेंट जितना तेजी से इंटरनेट बंैकिंग से पेमेंट कर देता हैै, वह उतनी ज्यादा टिकट बुक कर लेता है।

    सेल को ट्रेवल एजेंट्स की जानकारी मिली , गहराई से चल रही है जांच
    - एसपी साइबर सेल जितेंद्र सिंह ने बताया मुखबिर से सूचना मिली थी कि इस सॉफ्टवेयर के जरिए शहर में और प्रदेश में ट्रेवल एजेंट्स टिकट बुक कर रहे हैं। साइबर सेल गहराई से जांच कर रही है।

    आईआरसीटीसी में कार्यरत था गर्ग
    - अजय गर्ग 2007 से 2011 तक आईआरसीटीसी में ही काम करता था। वहीं उसने आईआरसीटीसी के खामियों के बारे में जाना और इस सॉफ्टवेयर को बनाया। गर्ग 2012 में सीबीआई में नियुक्त हुआ था।

    अब अलग-अलग नाम से एजेंटों तक पहुंचा प्रदेश में
    - सीबीआई के असिस्टेंट प्रोग्राम अजय गर्ग ने तो इस सॉफ्टवेयर का नाम नियो रखा था, लेकिन यह सॉफ्टवेयर अलग-अलग नाम से एजेंट्स को बेचा जा रहा है। आईटी एक्सपर्ट्स ने इसकी कॉपी बनाकर भी बेचना शुरू कर दी है।

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