Hindi News »Madhya Pradesh »Indore »News» No Cabinet Seal, Yet Not Found National Park Palpur Koono

कैबिनेट की मुहर नहीं लगनी , अब तक नहींं मिल पाया नेशनल पार्क पालपुर कूनो

श्योपुर जिले के पालपुर-कूनो अभ्यारण के गेट पर लगी यह तस्वीर कह तो यह रही है कि ‘हमें नई शुरुआत का इंतजार है’।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 20, 2017, 07:19 AM IST

कैबिनेट की मुहर नहीं लगनी , अब तक नहींं मिल पाया नेशनल पार्क पालपुर कूनो

इंदौर.श्योपुर जिले के पालपुर-कूनो अभ्यारण के गेट पर लगी यह तस्वीर कह तो यह रही है कि ‘हमें नई शुरुआत का इंतजार है’। लेकिन प्रदेश सरकार के ढुलमुल रवैए से लगता है कि यह इंतजार जल्द खत्म नहीं होने वाला। मप्र सरकार शेर लाने के पहले जरूरी कार्रवाइयों को टालकर गुजरात सरकार के अड़ियल रुख को और हवा दे रही है।

- पालपुर कुनो को 4 साल पहले ही राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया जाना था। लेकिन प्रदेश सरकार अभी तक इसे नोटिफाई ही नहीं कर पाई है।

- गुजरात इसे शेरों की सुरक्षा और रहवास से जोड़कर मुद्दा बना रहा है। वर्तमान में पालपुर कूनो अभ्यारण लगभग 350 सौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में है। राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर देने के बाद इसका क्षेत्रफल लगभग 750 वर्ग किलोमीटर हो जाएगा।

कैबिनेट के सामने प्रस्ताव ही नहीं रखा
- अप्रैल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के विरोध के बावजूद मध्यप्रदेश के पालपुर कूनो उद्यान में गुजरात के सिंहों को बसाने के आदेश दिए थे। तब ही मध्यप्रदेश सरकार ने पालपुर कूनो को नेशनल पार्क का दर्जा देने की बात सैद्धांतिक रूप से मान भी ली थी।

- सर्वे के बाद पार्क घोषित करने के लिए जरूरी जमीनी औपचारिकताएं पूरी किए हुए अरसा बीत गया है। मध्यप्रदेश कैबिनेट को इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने की औपचारिक स्वीकृति देनी थी। लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक कैबिनेट के सामने यह प्रस्ताव कभी रखा ही नहीं गया। होना तो यह था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद गुजरात सरकार के शेर नहीं देने के रवैए के खिलाफ मप्र सरकार कोर्ट जाती। यह करना तो दूर सरकार नेशनल पार्क को नोटिफाई ही नहीं कर पा रही है, इससे मप्र का ही नुकसान हो रहा है।

नेशनल पार्क घोषित करने से इसका क्षेत्रफल 750 किमी ज्यादा फैल जाता


- हांलाकि, शेर को पालपुर कूनो लाने के लिए इसे नेशनल पार्क घोषित करना आवश्यक शर्तों में शामिल नहीं था। लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा इसे नेशनल पार्क घोषित कर देने से इसका वर्तमान क्षेत्रफल का दायरा 750 किलोमीटर से ज्यादा फैल जाता। जाहिर है इससे प्रदेश के दावे को और मजबूती मिलना थी। नेशनल पार्क के कोर एरिया में किसी तरह की गतिविधियों की अनुमति नहीं होती है। विस्थापित कर लाए गए शेरों के रहवास और प्रजनन के लिए यह एक आदर्श स्थिति मानी जाती है।

वैक्सीनेशन और ट्रेनिंग का काम भी पूरा
- शेरों को कूनो में लाने के लिए महत्वपूर्ण शर्तों में से एक अभ्यारण के 5 किमी की परिधि के करीब 58 गांव के जानवरों के वैक्सीनेशन करने की थी। क्षेत्र के कुत्तों और पालतू जानवरों का खास तौर पर वैक्सीनेशन होना था ताकि उनसे शेरों तक कोई संक्रामक बीमारी न पहुंच सके। श्योपुर वन विभाग करीब 1 साल पहले ही लगभग 5 हजार जानवरों का वैक्सीनेशन किए जाने की रिपोर्ट दे चुका है। एक और प्रमुख शर्त वन कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की थी। 3030 कर्मचारियों के दो दलों के प्रशिक्षण का काम भी मई 2017 में पूरा हो चुका है।

जल्द घोषित करेंगे नेशनल पार्क- प्रमुख सचिव

- मप्र के प्रमुख सचिव वन दीपक खांडेकर का कहना है कि यह सही है नेशनल पार्क घोषित करने में कुछ देरी हुई, जल्द ही कार्रवाई करेंगे। जमीनी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद नोटिफिकेशन में देरी से गुजरात को मदद मिलने के सवाल पर वे बोले कि पहले हमें चंबल की करेरा सोन चिरैया बर्ड सेंचुरी को डिनोटिफाई करना है, इसे डिनोटिफाई किए बिना पालपुर कूनो को नेशनल पार्क घोषित नहीं कर सकते। जल्द कैबिनेट में करेरा की बर्ड सेंचुरी को डिनोटिफाई करवाएंगे, फिर पालपुर कूनो के लिए नोटिफाई करेंगे।

अभी तक नहीं चुना शेर परिवार
- मूल योजना के तहत गुजरात के गिर के जंगलों से एक पूरा शेर परिवार पालपुर कूनो लाया जाना है। फिर इनके बच्चे होने के बाद मूल माता-पिता को यहां से हटा देना था। गिर के किस जोड़े (लायन प्राइड) को मध्यप्रदेश भेजा जाना है, यह चिह्नित करने की जिम्मेदारी गुजरात के वन अफसरों की थी। भास्कर के पास मौजूद रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में अभी इस दिशा में कोई जमीनी काम नहीं किया है। जाहिर है उसकी मंशा आसानी से मप्र को शेर देने की नहीं है।

एनजीओ ने लगाई याचिका
- होना तो यह था कि गुजरात सरकार के शेर न देने के रवैए के खिलाफ मप्र सरकार खुद सुप्रीम कोर्ट जाती। आखिरकार वन जीव पर काम कर रही भोपाल की संस्था प्रयत्न ने सुप्रीम कोर्ट में गुजरात सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका लगाई। गुजरात के साथ प्रदेश सरकार को भी पार्टी बनाया है। जनवरी 2018 में सुनवाई होनी है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |
Web Title: kaibinet ki muhar nahi lgani , ab tak nahin mil paayaa neshnl paark paalpur kuno
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×